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गोदी मीडिया का सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी बचाव नहीं कर पा रही मोदी सरकार

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा भाजपा के सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडों को और धार देने के लिए चलाए गए और चलाए जा रहे प्रसारणों की न्यायिक समीक्षा से बचाव का कोई क़ानूनी आधार न होने से उच्चतम न्यायालय में चाहे तबलीगी जमात का मामला हो या फिर सुदर्शन टीवी के विवादास्पद बिंदास बोल का मामला हो, मोदी सरकार को जवाब नहीं सूझ रहा है और अधकचरे जवाब से जहां कोर्ट की फटकार सुननी पड़ रही है, वहीं गोदी मीडिया का प्रभावी बचाव भी अदालत में नहीं हो पा रहा है। यह राष्ट्रवाद या पर्सनल लिबर्टी के मामले नहीं हैं, बल्कि संविधान और कानून के अनुपालन से संबंधित मामले हैं, इसलिए इसमें न्यायपालिका को एक क्लियर स्टैंड लेना ही पड़ेगा।

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को सुदर्शन न्यूज चैनल के विवादास्पद शो के खिलाफ मामले की सुनवाई को दो हफ्ते टाल दिया,  ताकि पक्षकार सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे का जवाब दे सके। केंद्र ने सुदर्शन न्यूज चैनल को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ने की बात कही है।  सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की एक पीठ को सूचित किया गया कि उसने मुस्लिमों के सिविल सेवाओं में प्रवेश को सांप्रदायिक रूप देते हुए बिंदास बोल शो के लिए सुदर्शन टीवी को चेतावनी देते हुए कहा है कि सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल भविष्य में सावधान रहे।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने हलफनामे में में कहा है कि सुदर्शन टीवी चैनल ने नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ पर आधारित अपने ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम की चार कड़ियों के जरिए कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन किया है और चैनल को भविष्य में ऐसा करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। हलफनामे में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चार नवंबर को पारित किए गए अपने आदेश को प्रस्तुत किया है। विवादित कार्यक्रम पर चैनल को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के संबंध में कार्रवाई करते हुए यह आदेश जारी किया गया था।

हलफनामे में कहा गया कि चैनल द्वारा पेश की गई मौखिक और लिखित स्थापना तथा अंतर मंत्रालयी समिति के सुझावों का संज्ञान लेते हुए  मंत्रालय का मत है कि हालांकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, किंतु कार्यक्रम की कड़ियों में जो विषय वस्तु दिखाई जा रही थी उससे पता चलता है कि चैनल ने विभिन्न ऑडियो-विजुअल सामग्री से कार्यक्रम को दिखाने के नियमों का उल्लंघन किया है। मंत्रालय ने पाया कि वह अच्छे नहीं हैं, अपमानजनक हैं और सांप्रदायिक विचारों को प्रोत्साहित करते हैं। मंत्रालय ने सुदर्शन टीवी के इस विवादित कार्यक्रम के आगे के एपिसोड पर रोक नहीं लगाई और उन्हें भविष्य में सावधानी’ बरतने की सलाह देते हुए छोड़ दिया।

चैनल को चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन होता है तो चैनल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मंत्रालय ने ये भी निर्देश दिया कि चैनल अपने कार्यक्रम बिंदास बोल-यूपीएससी जिहाद के अगले एपिसोड्स पर पुनर्विचार करे और उस हिसाब से शो के कंटेंट में परिवर्तन किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले को अब दो सप्ताह के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। बुधवार को, यह बताया गया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सुदर्शन न्यूज को अपने कार्यक्रम के शेष चार एपिसोडों का प्रसारण करने की अनुमति दी है, जो उपयुक्त संशोधनों और संतुलन के अधीन हैं ताकि भविष्य में प्रोग्राम कोड का उल्लंघन न किया जा सके। मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच करने और ब्रॉडकास्टर के मौलिक अधिकारों को संतुलित करने के बाद, चेताया जाता है कि सुदर्शन टीवी चैनल लिमिटेड भविष्य में सावधान रहे। यह चेतावनी भी दी गयी है कि यदि भविष्य में, प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन पाया जाता है, कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ।

उच्चतम न्यायालय के 23 सितंबर के आदेश के अनुपालन में दायर हलफनामे में टीवी चैनल को चेतावनी दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि जैसा कि केंद्र ने सुदर्शन न्यूज चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, इससे कानून के अनुसार निपटा जाएगा और यह कि अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी जो परिणाम का संकेत देगी।

केंद्र इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि सुदर्शन न्यूज चैनल समेत हर निजी टीवी चैनल, जिसे केंद्र सरकार द्वारा अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइन्स, 2011 के तहत अनुमति दी गई है, कार्यक्रम और विज्ञापन कोड द्वारा निर्धारित है, केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत बाध्यकारी है।

मंत्रालय की राय है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन एपिसोड के प्रसारण के स्वर और सिद्धांत यह दर्शाते हैं कि चैनल ने कथनों और ऑडियो-विज़ुअल सामग्री के माध्यम से प्रोग्राम कोड को तोड़ दिया है। वे अच्छे स्वाद में नहीं हैं, आक्रामक हैं और सांप्रदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की संभावना है। नतीजतन, चैनल को चेतावनी दी गई है कि वह भविष्य में भी ऐसा न दोहराए क्योंकि ऐसा करने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी। इसलिए, कार्यक्रम के शेष चार एपिसोड को उसकी समीक्षा के बाद टेलीकास्ट किया जा सकता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन नहीं है।

मंत्रालय का आदेश उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परिणाम के अधीन होगा। केंद्र सरकार ने पिछले महीने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि अंतर-मंत्रालय समिति (आईएमसी), जो मंत्रालय की नियामक शक्तियों के आलोक में बनाई गई थी, ने सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल के संबंध में कुछ अतिरिक्त सिफारिशें की थीं, जो अखिल भारतीय सिविल सेवा में मुसलमानों के प्रवेश के बारे में उसके शो ‘बिंदास बोल’ पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने की शिकायतों का सामना कर रहा है। इससे पहले, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क नियामक अधिनियम के तहत प्रोग्राम कोड के उल्लंघन की शिकायतों पर चैनल को नोटिस दिया था।

गौरतलब है कि ‘बिंदास बोल’ सुदर्शन न्यूज चैनल के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके का शो है। अगस्त के आखिरी सप्ताह में जारी हुए इसके एक एपिसोड के ट्रेलर में चव्हाणके ने हैशटैग यूपीएससी जिहाद लिखकर नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षड़यंत्र का बड़ा खुलासा करने का दावा किया था।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on November 19, 2020 5:39 pm

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