Friday, January 21, 2022

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मोदी मैजिक या उपचुनाव में मोदी मुक्त भारत के शंखनाद की शुरुआत !

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‘कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए

कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए !’ 

                                  -दुष्यंत कुमार

भारतीय जनमानस में एक कहावत बहुत ही मशहूर है कि कुदरत की मार बड़ी सधी हुई, निःशब्द और प्राणांतक होती है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार इस देश की महंगाई, भुखमरी बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से बुरी तरह से त्रस्त, बेहाल, परेशान, तिल-तिलकर मरती जनता-जनार्दन अब वर्तमान समय की सरकार के कर्णधारों की दुर्नीतियों व इसके कर्णधारों के जले पर नमक छिड़कने वाले असभ्य व अमर्यादित बयानों और कुकृत्यों मसलन उत्त्तर प्रदेश के कथित योगी के एक अशिष्ट और निर्लज्ज मंत्री का यह शर्मनाक बयान कि पेट्रोल की कीमतें अभी और बढ़नी चाहिए या इस देश के ज्यादातर लोगों को पेट्रोल की जरूरत ही नहीं है।

इसके अलावे पिछले 07 सालों में मोदी-शाह द्वारा किए गए एक-एक बेशर्म, बीभतत्सतम् और क्रूरतम् कुकृत्य इस देश के मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, आंगनवाड़ी की गरीब महिलाओं, बेरोजगार युवाओं को पूरी तरह याद है। वर्तमान समय के सत्ता के निरंकुश नीरो की औलादों द्वारा आज इस देश के अन्नदाताओं को अपनी न्यायोचित मांग के लिए भी जबरन खुली सड़क पर भीषण गर्मी, ठिठुरती ठंड और घनघोर बारिश में भी बैठने को बाध्य करते हुए अब एक साल होने को जा रहा है, अब तक 750 किसानों की शहादत के बावजूद भारतीय समाज और पूरे राष्ट्र राज्य को भूख से निजात दिलाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की बात छोड़िए अभी तक कथित सबसे योग्यतम् प्रधान जनसेवक जी के मुँह से उनकी मौत की संवेदना के लिए उफ् का एक शब्द तक न निकलना, उनके रास्तों में नुकीली कीलें ठोक देना, सड़क काट देना, उन्हें खालिस्तानी कह देना, आतंकी कह देना, दो मिनट में ठीक कर दूँगा, कह देना, आंदोलनरत किसानों को किसान ही न मानना, एक गुँडे को गृह राज्य मंत्री बनाना, उसके कुपुत्र द्वारा सीधे, दिन-दहाड़े कारों से अन्नदाताओं को कुचलकर, रौंदकर मौत के मुँह में धकेल देना, गृहमंत्री द्वारा उस दरिंदे को अपने मंच को साझा करना, आरएसएस संचालित गौशालाओं में हजारों गायों का भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मर जाना, बड़े कसाई घरों को आर्थिक मदद करके दुनिया में भारत को सबसे बड़े गोमांस का निर्यातक देश बना दिया जाना, दूसरी तरफ गरीब मुस्लिम गोपालकों और व्यापारियों को सड़क पर अपने पालित गुँडों से घसीट-घसीट कर मौत के घाट उतार देना, प्रशिक्षित भारतीय बेरोजगारी से बेहाल युवाओं से पकौड़े तलने की नसीहत दे देना, अचानक लॉकडाउन लगाकर मजदूरों को उनके नन्हें बच्चों सहित हजारों किलोमीटर पैर घसीटने को बाध्य कर देना, मजदूर वर्ग को ले जाती ट्रेनों का अपना रास्ता भूल जाना, इस देश के लोगों को भारत का नागरिक मानने से ही इंकार कर देना, दर्जनों पत्रकारों, लेखकों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, दलित-आदिवासियों के हक के लिए आजीवन लड़ने वाले व्यक्तियों पर फर्जी मुकदमें रचकर उन्हें जेलों में सड़ा देना, जमानत न होने देने के लिए न्यायालयों के जजों को गुप्त इशारा कर देना, उन्हें मौत के घाट उतार देना आदि-आदि मोदी द्वारा किए गए सभी अमानुषिक कुकृत्यों की अनगिनत कड़वी यादें आमजन के जहन में खूब ठीक से अभी भी धंसी हुईं हैं।

इसीलिए जनता-जनार्दन ने अभी हुए उपचुनावों में अपने मतदान रूपी कोड़े की बड़े ही शालीन तरीके से पलटवार कर बेहूदगी और अमर्यादित बयान देने वाले बीजेपी के बेशर्म और अशिष्ट नेताओं और उनकी पार्टी को भी यह बड़ा और कठोर संदेश दे दिया है कि लोकतंत्र में सत्ता किसी की भी बपौती नहीं होती है। हकी़कत यह है कि बकौल मोदीजी सत्ता में आने से पूर्व ‘हम सत्ता में आएंगे तो इस देश के युवाओं को हर साल 02 करोड़ नौकरी देंगे’ की उनके पहले ही कार्यकाल में पकौड़ा टेक्नोलॉजी अपनाने की नसीहत भरी सलाह देने से 02 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी देने की जुमलेबाजी की हवा पूरी तरह निकल चुकी है। बेरोजगारी से बेहाल, किसानों से भी ज्यादा खुदकुशी करते इस देश के बेरोजगार युवकों का जुमलेबाज और दुनिया के इस सबसे झूठे, निरंकुश और फ्रॉड मोदी से पूरी तरह से मोहभंग हो चुका है। उत्तर प्रदेश के कथित सबसे काबिल मुख्यमंत्री के पुलिस के हाथों बेरोजगारी के मारे विद्यार्थी, बेरोजगार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, संविदा पर रखे डॉक्टर्स आदि अपनी सिर फोड़वाए बैठे हैं।

मोदीजी 2019 के चुनाव में विधायकों, सांसदों आदि को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आपातकालीन संचित पैसों को जबरन लेकर उन्हें खरीदने, ईवीएम सहित तमाम तिकड़मों के सहारे दूसरी बार सत्ता में आए मोदीजी एंड कंपनी सरकार 2014 के चुनाव में अपने हवाई जहाजों, हेलीकॉप्टरों व अरबों रूपये चंदे के रूप में में आर्थिक मदद करने वाले अपने लंगोटिया यारों अडानी और अंबानी के एहसानों को इस देश के करोड़ों मजदूरों, कामगारों, किसानों, दिहाड़ी मजदूरों, कर्मचारियों, गरीबों के पेट पर लात मारकर बेशर्मी से अपने लंगोटिया यारों अडानी और अंबानी के एहसानों को उतारने में लगे हुए हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दादरा नागर हवेली में हुई करारी हार ने मोदीजी, उनके भक्तों और गोदी मीडिया आदि को दिन में तारे दिखाने और छठी का दूध याद करने को विवश और अभिशापित कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में तो 4 में से 3 सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो जाना, ममता बनर्जी ने कथित मोदी जादू को पूर्णतया धूल चटाकर रख दिया है। ऐलनाबाद हरियाणा में अपने समर्थक अभय चौटाला को जिताकर वहाँ के किसानों ने मोदी-खट्टर की क्रूर जोड़ी को अपनी शक्ति का अहसास कराने के अतिरिक्त उन दोनों की औकात को भी ठोक-बजाकर बता दिया है। बीजेपी चुनाव से ठीक पहले अपने तीन-तीन मुख्यमंत्रियों को आनन-फानन में हटाना यह साबित करता है कि बीजेपी को अपने मुख्यमंत्रियों की आम जनता में पैठ खत्म होना सिद्ध हो चुका है। हर चुनावी सीट पर बीजेपी को मिलने वाले मतप्रतिशत का बेहद कम होना भी यह साबित करता है कि बीजेपी के सबसे लोकप्रिय मुद्दे मसलन मंदिर-मस्जिद, हिन्दू-मुस्लिम दंगे आदि तथा अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण, चारधाम सड़क चौड़ीकरण योजना, कुंभ मेले, पटेल की सबसे ऊँची मूर्ति बनवाने, कथित बुलेट ट्रेन योजना, स्मार्ट सिटी के सब्ज-बाग में अरबों-खरबों खर्च करने से भी भारत की धीर-गंभीर जनता दिग्भ्रमित नहीं हुई है, भारत की गरीबी से बेहाल जनता को सबसे पहले रोजगार और रोटी की सख्त जरूरत है।

इस उपचुनाव से यह साबित होता है कि देश की जनता ने बीजेपी को यह ठीक से बता दिया है कि महाराष्ट्र के बीजेपी नेताओं के इस बेशर्म बयान पर कि हम चैन की नींद सोते हैं, क्योंकि केन्द्र में हमारी मोदी एंड कंपनी सरकार के रहते सरकारी एजेंसियों के छापे का डर हमें नहीं सताती, लेकिन अभी हुए उपचुनावों ने भारत की अशिक्षित, गरीब परन्तु राजनैतिक रूप से जागरूक जनता ने बीजेपी के असंसदीय, अलोकतांत्रिक, अराजक नेताओं को यह स्पष्टता और दृढ़ता से बता दिया है कि निकट भविष्य में अब हम चैन की नींद सोएंगे, लेकिन अब तुम्हारी नींद खराब कर देंगे।

अभी उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुए पंचायत चुनावों में कुल 3050 सीटों में से मात्र 543 सीटों पर जीतना और बाकी सीटों का विपक्ष और निर्दलीय प्रत्याशियों की झोली में टपका देना भी यह सिद्ध करता है कि भारत की आवाम अब भविष्य में मोदीमुक्त भारत की तरफ स्पष्टता से इशारा कर रही है। यह एक भविष्य में होने वाले परिवर्तन की झलकमात्र है। अभी तो जनता ने पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तराखंड में बीजेपी का सूपड़ा साफ करके मोदीमुक्त भारत का श्रीगणेश ही किया है, शीघ्र ही पूरे देश से बीजेपी मुक्त भारत का महायज्ञ होने जा रहा है। समय बहुत बलवान होता है, आज एडोल्फ हिटलर और बेनिटो मुसोलिनी को याद करने वाला इस दुनिया में कोई नहीं है, उन दोनों को दुनिया भर के लोग याद भी करते हैं तो घृणा और तिरस्कार से उनकी तरफ एक बार थूक देते हैं, निकट भविष्य में ही भारत में भी ठीक वही हश्र मोदी-शाह और कथित योगी का भी होने जा रहा है। 

(निर्मल कुमार शर्मा स्वतंत्र लेखक और पर्यावरणविद हैं। आजकल गाजियाबाद में रहते हैं।)

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