Friday, January 27, 2023

सुरक्षा परिषद कक्ष के बाहर लगा पिकासो का चित्र ‘गुवेर्निका’ दिलाता है युद्ध विभीषिका की याद

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दुनिया के दस मशहूर चित्रों में से एक, पाब्लो पिकासो का चित्र ‘गुवेर्निका’ है। 1937 में युद्ध की विभीषिका का चित्रण करता यह चित्र अपनी युद्ध विरोधी प्रतीकात्मकता के लिए अपने बनने के समय से ही चर्चित है। मूल चित्र स्पेन के मेड्रिड के संग्रहालय में है और इस चित्र की टेपेस्ट्री (tapestry*) अनुकृति  फिलहाल संयुक्त राष्ट्र संघ में सुरक्षा परिषद कक्ष के बाहर प्रवेश द्वार पर लटकी हुई है। अपने युद्ध विरोधी सन्देश के लिए इस चित्र का उचित स्थान संयुक्त राष्ट्र संघ में सुरक्षा परिषद कक्ष का प्रवेश द्वार माना गया था और कुछ समय को छोड़ दिया जाये तो मूल चित्र की यह टेपेस्ट्री अनुकृति 1984 से वहीं पर है।

इस चित्र के बारे में हम दो स्तर बात कर सकते हैं पहला अपनी सुविधा के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में प्रभावी दुनिया के हुक्मरानों, खासकर अमेरिका, ने इस चित्र के प्रतीकात्मक महत्व का कैसे इस्तेमाल किया और जरूरत पड़ने पर क्यों निषेध भी किया है और दूसरे यह चित्र क्या कहता है और किस राह से यह चित्र संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय तक पहुंचा।

इस चित्र के राजनीतिक इस्तेमाल का ताज़ा उदहारण 25 फरवरी को यूक्रेन के सवाल पर सुरक्षा परिषद् की बैठक के समय देखा गया। उस दिन यूरोप और यूक्रेन के राजनयिक दुनिया को रूस विरोधी, युद्ध विरोधी सन्देश देने और यूक्रेन के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करने के उद्देश्य से यूक्रेन के झंडे के साथ इस चित्र के सामने खड़े हुए थे। लेकिन ऐसा नहीं है कि सुरक्षा परिषद् हमेशा ही युद्ध विरोधी सन्देश ही देती है। साम्राज्यवादी देश अपने युद्ध के मंसूबों पर भी संयुक्त राष्ट्र की मोहर लगवाना पसंद करते हैं। उस समय यह चित्र उनके लिए समस्या का सबब भी बन जाता है।

पिकासो का यह चित्र अब अनिवार्य रूप से इराक में अमेरिका के नेतृत्व वाले युद्ध से भी जुड़ा हुआ है। 5 फरवरी, 2003 को संयुक्त राष्ट्र में इस चित्र को ढकने के उद्देश्य से एक बड़ा नीला पर्दा रखा गया था, ताकि यह चित्र अमरीकी नुमाइंदे कॉलिन पॉवेल और जॉन नेग्रोपोंटे द्वारा उस समय की गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पृष्ठभूमि में दिखाई न दे। ये प्रेस कांफ्रेंस इराक युद्ध की अनिवार्यता सम्बन्धी सुरक्षा परिषद् की बैठक के बाद हुई थी।

अगले दिन, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने दावा किया कि टेलीविजन समाचार कर्मचारियों के अनुरोध पर पर्दा वहां रखा गया था। हालांकि, कुछ राजनयिकों ने पत्रकारों के साथ बातचीत में बताया कि बुश प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों पर टेपेस्ट्री को ढकने के लिए दबाव डाला था। विशेषज्ञों का कहना है कि गुवेर्निका  के चित्र के नीचे दुनिया को यह बताने के लिए कि अमेरिका इराक में युद्ध के लिए क्यों जा रहा था बहुत ही हास्यास्पद लगता। इसलिए कोई आश्चर्य नहीं की वो उस समय “एक असुविधाजनक कृति” हो गयी थी और उसे ढका गया।

अगर गुवेर्निका की बात करें तो यह चित्र 1937 में पिकासो ने लगभग पांच हजार की आबादी वाले स्पेन के गुवेर्निका शहर की हवाई बमबारी की भयावहता को दिखाने के लिए बनाया था। इस चित्र में काले और धूसर (grey) रंग की  भिन्न-भिन्न रंगतों के द्वारा गुवेर्निका  पर बमबारी की भयावहता को दर्शाया गया है। बमबारी ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और शहर की अधिकांश ऐतिहासिक वास्तुकला को नष्ट कर दिया। इसी तबाही को यह चित्र मनुष्यों और जानवरों के चीखने-चिल्लाने की छवियों के माध्यम से चित्रित करती है। 

आग की लपटों में घिरा हुआ चिल्लाता आदमी, घबराया हुआ घोड़ा, और अपने बच्चे के शव को ले जा रही बिलखती हुई एक महिला, सब, उस तबाही का   देखने वालों से सामना कराती है। चित्र में बाईं ओर, एक बैल असमान आँखों से आपकी ओर देखता है। नीचे एक योद्धा मृत पड़ा हुआ है, वो फिर भी एक टूटी हुई तलवार पकड़े हुए है। इस चौतरफा पागलपन के बीच भी, एक औरत रौशनी के लिए दीया लिए हुए है, ताकि हम सब युद्ध की तबाही को साक्षात् देखें और उसकी गवाही दें और भविष्य की आशा के संकेत स्वरुप टूटी हुई छवियों के नीचे मुश्किल से ध्यान देने पर, एक लिली का फूल भी दिखाई देता है।

आज गुवेर्निका  युद्ध की पीड़ा और तबाही के खिलाफ मानवता को चेतावनी देने वाला एक सार्वभौमिक और शक्तिशाली प्रतीक बन गया है। एक कला आलोचक, अलेजांद्रो एस्कालोना (Alejandro Escalona) के शब्दों में कहें तो “गुवेर्निका  का चित्रकला में वही महत्व है जो बीथोवेन की नौवीं सिम्फनी का संगीत में है। वह एक ऐसा सांस्कृतिक प्रतीक है जो मानव जाति से न केवल युद्ध के खिलाफ बल्कि आशा और शांति के बारे में भी बात करता है।” (“Guernica is to painting what Beethoven’s Ninth Symphony is to music: a cultural icon that speaks to mankind not only against war but also of hope and peace)

गुवेर्निका  के मूल चित्र को नेल्सन रॉकफेलर (अमरीकी उपराष्ट्रपति और न्यूयॉर्क के गवर्नर) खरीदना चाहता था लेकिन पिकासो ने उसे बेचने से मना कर दिया। तब फ्रांस के एक वस्त्र कालाकर से इसे 1955 में बुनवाया गया। बुनी गयी टेपेस्ट्री मूल चित्र की तरह एक रंगी नहीं बल्कि इसमें भूरे (brown) रंग की कई रंगतों का इस्तेमाल किया गया है। 1984 में रॉकफेलर परिवार ने इसे संयुक्त राष्ट्र संघ को उधार दिया। बीच-बीच में थोड़े समय के लिए बाहर आने जाने के बावजूद तब से यह टेपेस्ट्री मुख्यतः वहीं रही है। लेकिन कितने दिन वह वहां रहेगी कहना मुश्किल है। रॉकफेलर परिवार ने बयान दिया है कि वो इस टेपेस्ट्री को भी अपने परिवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय ट्रस्ट को भविष्य में दान दे देंगे।  

* tapestry एक मोटे धागे/ऊन से बुने गए चित्र को कहते हैं, जो आमतौर पर दीवार पर लटकाया जाता है।

(रवींद्र गोयल दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड अध्यापक हैं।)

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