संस्कृति-समाज

‘जंगलनामा-बस्तरां दे जंगल बिच’: एक कम्युनिस्ट कार्यकर्ता का सफरनामा

जंगलनामा-बस्तरां दे जंगल बिच, यह इस किताब का पंजाबी शीर्षक है जो सन 2004 में छपी थी।… Read More

स्वतंत्रता दिवस विशेष: जब लेखकों-कलाकारों ने अवाम में जगाया आज़ादी का अलख

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की क़ुर्बानियों का नतीजा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी… Read More

अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस: प्राकृतिक संसाधनों के भरोसेमंद संरक्षक हैं आदिवासी

9 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया जाएगा, यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 दिसंबर 1994… Read More

‘कफन’ की सफलता-असफलता और कहानी के पाठ की समस्या

‘जनचौक’ पर प्रेमचंद की बहुचर्चित और बहुविवादित कहानी ‘कफन’ पर डा. सिद्धार्थ की समीक्षा को पढ़ा। वह… Read More

फिल्म समीक्षा: उम्मीद जगाती एक उत्कृष्ट फिल्म ‘मानिक बाबूर‌‌ मेघ’

मसाला फिल्मों की भीड़ में जगह बनाना सबसे मुश्किल काम है। ऐसे में कोई फिल्म तमाम दिक्कतों… Read More