‘बच्चा चोर’ अफवाहें ले रही निर्दोषों की जान, सरकार भीड़ हिंसा को रोके और माॅब लिंचिंग निवारण कानून पारित करे : महासभा

झारखंड में आए दिन बढ़ते बच्चा चोर की अफवाह से निर्दोषों की हो रही हत्या पर झारखंड जनाधिकार महासभा ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि – “सरकार भीड़ हिंसा को रोके और माॅब लिंचिंग निवारण कानून को त्वरित पारित करे।”

उल्लेखनीय है कि फरवरी-मार्च 2026 में ताजा घटनाक्रम के अनुसार हाल ही में बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते झारखंड में 12 से अधिक घटनाओं में 30 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और कम से कम एक से दो लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। चतरा के पिपरवार इलाके में एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जबकि गुमला में गत 8 मार्च को एक विक्षिप्त महिला को मार डाला गया।

वहीं 9 मार्च को पश्चिम सिंहभूम के चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के इंदकाटा गांव गए एक युवक की ग्रामीणों ने बच्चा चोर के संदेह में पिटाई कर दी। पीड़ित युवक 9 मार्च की शाम को अपने लापता भाई की तलाश में इंदकाटा गया था। घटना का खुलासा तब हुआ, जब ग्रामीणों ने पिटाई का वीडियो वायरल कर दिया। 

घटना को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान ने एसपी, डीसी समेत वरीय अधिकारियों से शिकायत कर जांच की मांग की है। उन्होंने ग्रामीण इलाके में बच्चा चोरी की अफवाह पर निर्दोष की पिटाई पर अंकुश लगाने को कहा है। उन्होंने बताया कि चक्रधरपुर के कोलसाई अंसारी टोला निवासी बसीम उर्फ गुड्डू करीब डेड़ साल पहले लापता हुए भाई बिट्टू की तलाश में इंदकाटा गया था।

गांव पहुंचने पर थके-हारे गुड्डू ने प्यास लगने पर एक बच्चे से पानी की मांग कर दी। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे बच्चा चोर समझ लिया और पिटाई कर दी। हालांकि, इस दौरान कुछ लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद बसीम की पिटाई करने वाले लोगों से छुड़ाकर गांव में दोबारा नहीं आने की हिदायत दे भगा दिया।

दूसरी घटना गुमला जिला अंतर्गत बिशुनपुर थाना क्षेत्र के लापू गांव के गोरियाटांड़ टोला की है जहां 8 मार्च की रात लगभग 10.00 बजे बच्चा चोर की अफवाह में एक अज्ञात व विक्षिप्त महिला की ग्रामीणों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। 

बताया जाता है कि उक्त महिला दो दिन पहले लबगा गांव में भी विक्षिप्त अवस्था में घूमते हुए देखी गयी थी। 8 मार्च की रात को वह लापू गांव के जंगल से सटे गोरियाटांड़ टोला पहुंच गयी और एक घर के पास केले की झाड़ी में छिपकर बैठी हुई थी।

बता दें कि क्षेत्र में बच्चा चोर की अफवाह फैली हुई है। महिला को संदिग्ध स्थिति में देख ग्रामीणों ने उसे बच्चा चोर समझ लिया और इसकी सूचना गांव में फैल गई। सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गये और महिला की लाठी-डंडे से पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। 

पुलिस ने घटना में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिसमें तेतरा उरांव (45), बिरसाई उरांव (45), शिवलाल उरांव (50) व एतवा उरांव (64) शामिल हैं। सभी आरोपी बिशुनपुर थाना के लापू गांव के गोरयाटांड़ टोला के निवासी हैं।

महासभा ने बताया कि यूनाइटेड मिली फोरम द्वारा 2016 से अब तक के लिंचिंग के घटनाओं के समेकित आंकड़ों के अनुसार 50 से भी अधिक लोग मारे जा चुके हैं और कई घायल हुए हैं। इनमें अधिकांश मुसलमान, आदिवासी और दलित थे। लिंचिंग के अनेक मामले धर्म, गाय अथवा मांस के नाम पर हुए हैं एवं कई बच्चा चोरी के आरोप में। 

अभी तक न सभी पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा मिला है और न ही दोषियों पर कार्यवाई हुई है। गाय व धर्म के नाम पर हुई लिंचिंग के कई मामलों में स्थानीय पुलिस व प्रशासन की उदासीनता व संलिप्तता भी सामने आई थी। लेकिन वैसे पदाधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई नहीं हुई। 

लगातार जन दबाव के बाद ऐसी घटनाओं पर उचित कानूनी कार्रवाई व मुआवज़ा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने 2021 के विधानसभा शीतकालीन सत्र में “झारखंड भीड़ हिंसा एवं मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक, 2021” पारित कर राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजा था। राज्यपाल ने 2022 में कुछ संशोधनों के सुझाव के साथ यह विधेयक पुनः राज्य सरकार को लौटा दिया था। तब से यह विधेयक लंबित पड़ा हुआ है।

झारखंड जनाधिकार महासभा ने कहा है कि एक ओर मोदी सरकार ने भीड़ तंत्र व धर्म के नाम पर हिंसा को समाज में खुली छूट दे रखी है। लेकिन वहीं दूसरी ओर ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसी घटनाओं को रोकने में न हेमंत सोरेन सरकार इच्छुक है और न ही गठबंधन दल। जो 2024 में मिले जन समर्थन के साथ धोखा है। 

महासभा ने हेमंत सोरेन सरकार व सत्तारूढ़ी दलों से मांग करती है कि इसी सत्र में “झारखंड भीड़ हिंसा एवं मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक” को पारित कर पुनः राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजें। साथ ही, मॉब लिंचिंग के विरुद्ध बने सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शिका को पूर्ण रूप से लागू करें एवं पुलिस व प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करें।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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