ग्राउंड रिपोर्ट: गेहूं के खेतों से खेल रही है आग, पेट का सवाल और सदमे में किसान

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उत्तर प्रदेश।  उत्तर प्रदेश के गेहूं किसान समय से पहले चढ़े तापमान से प्रभावित फसल और तूफान-बारिश के नुकसान का जख्म अभी भरा भी नहीं था। हर आपदा-विपदा सहकर खेतों में बची फसल की कटाई-मढ़ाई कर घर लाने की जुगत में थे। इसी बीच अब सूबे के जनपदों में हो रही गेहूं के खेतों में अगलगी की घटनाओं से किसान सहम गए हैं।

अगलगी से पीड़ित किसानों के अरमान चंद मिनटों में राख हो जा रहे हैं। यह सब आंखों के सामने होते देखना किसानों के लिए आसान नहीं है। पूर्वांचल में एक पुरानी कहावत है कि “किसान पूत शोक सह जाता है, लेकिन फसल शोक नहीं।

अगलगी से हुए नुकसान में मन मसोस कर रह जाता है, और उसका पीछा करने लगती है कर्ज, गृहस्थी के खर्च, सामाजिक जिम्मेदारियां, घाटे का बोझ, बच्चों की पढ़ाई, शादी के उम्र को हो चली बेटियों के विवाह का खर्च, दवाई-इलाज और मवेशियों के लिए चारे-भूसे की दिक्कत। उत्तर प्रदेश में एक मार्च से 30 जून तक के समय को आग का मौसम कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में कृषि का हिस्सा 27 प्रतिशत है। ऐसे ही कृषि सेक्टर झटके खाता रहा और किसान घाटे का सौदा करते रहे तो जीडीपी का योगदान प्रभावित भी हो सकता है। इतना ही नहीं यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनामी बनाने का योगी का सपना बगैर किसानों की उन्नति और खुशहाली के सपन्न होने वाला नहीं है।

एक रिपोर्ट के अनुसार सूबे के खेत, गांव और घरों में आग लगने की कम से कम 500 से 700 घटनाओं की सूचना रोज मिल रही है। इन घटनाओं में सबसे ज्यादा सूचनाएं फसल में आग लगने की होती हैं। हमीरपुर जिले में सोमवार को 160 बीघा गेहूं की फसल जल कर खाक हो गई। आग में लाखों रुपये की कीमत का हजारों क्विंटल गेहूं जल गया। आग के पीछे बिजली के शॉर्ट सर्किट को वजह बताया जा रहा है।

पिछड़े जनपद चंदौली के सदर तहसील के ‘ओयरचक-असना’ गांव में के सिवान में शुक्रवार को आग लगने से छह बीघे की खड़ी फसल जलकर राख हो गई। यह खेत कुम्हार परिवार के हैं, जो अपने परिवार के गुजारे के लिए मजदूरी का काम करते हैं। इनके लिए दो-तीन बीघे खेत ही जीवन का आधार हैं।

बयालीस वर्षीय दिनेश प्रजापति पास के गांव से मजदूरी करके लौटे थे और भोजन करने के लिए हाथ-मुंह धो रहे थे। इतने में गली में शोर मचता हुआ सुनाई दिया। महिलाएं चीख-चिल्ला रही थीं कि खेतों में आग लग गई है। कोहरान (कुम्हार) का खेत जल रहा है। यह सुनते ही दिनेश का मस्तिष्क एक पल के लिए सुन्न पड़ गया और आंखों के सामने अंधेरा छा गया।

सालभर की कमाई को खोते ही टूट गया सब्र

दिनेश जनचौक से कहते हैं कि “मैं जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर खेत पर पहुंचा। आग से फसल जल रही रही थी जिसे बुझाने के लिए गांव वाले बेहाया, अरहर की लकड़ी, बांस, घास-झुरमुट, जुट के बोरे और गमछे से बुझाने में जुटे थे। आग तो आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बुझ तो गई, लेकिन मेरी की फसल को समूचा लील गई। राख हो चुके खेत गेहूं की भुनी हुई बालियों से पट पड़ी थीं। अपने सालभर की कमाई को खोते मेरा धैर्य जवाब दे गया और मैं खेत पर विलाप करने लगा। ग्रामीणों ने मुझे किसी तरह से संभाला।” चंदौली जनपद में गेहूं के खेतों में आग लगने से अब तक तीस बीघे से अधिक की फसल जलकर राख हो चुकी है।”

परिवार अब दाने-दाने को मोहताज

आग ने खेतों को फसल से महरुम कर दिया था जिसे दिखाते हुए प्रजापति रुंधे गले से बताते हैं, “हमारे पास खाने को कुछ नहीं बचा। गेहूं की फसल ही एक मात्र सहारा था। अब अपने परिवार को कैसे पालेंगे। सात-आठ लोगों के परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा? अनाज तो गया ही अब भूसे की भी समस्या उत्पन्न हो गयी है।

हम लोग गरीब हैं, अनाज खरीदेंगे या भूसा? चारे की कमी से मवेशी को बेचना पड़ेगा। हमारा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। फसल जाने के आर्थिक बोझ से जेब ही नहीं आत्मा भी दब गई है। पांच बेटियां हैं एक की शादी हो चुकी है दूसरे की तैयारी के बारे में सोच-विचार रहा था। इसी बीच यह अनहोनी हो गई। बाकी पढ़ाई-लिखाई, मेहनत-मजदूरी के दम पर करा रहा हूं। आगे क्या होगा कुछ सूझ नहीं रहा।”

कई किसानों पर संकट

दिनेश आगे कहते हैं कि “खरीफ सीजन के बाद रबी से बहुत उम्मीदें थी। दो बीघे में गेहूं बुआई पर बीज, खाद, जुताई-बुआई, कीटनाशक और देखरेख पर अबतक छह से सात हजार रुपए खर्च कर चुका था। फसल होती हो लागत को छोड़िये सालभर मुझे अनाज नहीं खरीदना पड़ता। अब तो सभी खर्चों के साथ अनाज की व्यवस्था भी करनी पड़ेगी। लेखपाल सर्वे कर ले गया है।”

बरहनी विकास खंड के पान कुंवर प्रजापति  ने बताया कि “मेरे भी खेत में लगे गेहूं की कटाई का काम जल्द ही होने वाला था। इसी बीच आग लगने से मेरी डेढ़ बीघे की फसल जल गई। हमारा परिवार बड़ा है राशन और मवेशियों के लिए चारे-भूसे का संकट खड़ा हो गया है। सरकार और प्रशासन से मांग है कि जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।”

मिट्टी के बरतन बनाने वाले हाथ करते हैं मजदूरी

ओयरचक की सत्तर वर्षीय फुलेसरा देवी ने जनचौक को बताया कि “गांव में कुम्हारों की आबादी 30 से 35 है दो-तीन दशक पहले तक कुम्हार परिवार मिट्टी के सुन्दर घड़े, बर्तन,  कुल्हड़ और दीये आदि बनाते थे। लेकिन बाद के वर्षों में गांव के दबंगों के लड़कों ने गड्ढे से मिट्टी लाना रोक दिया। एक-दो बार प्रयास करने पर पुलिस बुला लिए।

पुलिसकर्मियों ने कुम्हारों को गांववालों के सामने भला-बुरा कहा। इसके बाद से कुम्हारों ने मिट्टी के बर्तन बनाना छोड़ दिया। अब लोग मजदूरी करके पेट पालते हैं। उल्लेखनीय है कि सूबे की योगी सरकार ‘माटी कला बोर्ड’ के जरिये कुम्हारों के विकास और इनके कला के संवर्धन के दावे करती है। बाजार की प्रतिस्पर्धा और दबंगों के बढ़ते दखल से हकीकत में कुम्हारों की स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है।

श्रावस्ती में जला 84 बीघा गेहूं

श्रावस्ती जिले में रविवार को सोनवा क्षेत्र के दो अलग-अलग स्थानों पर गेहूं के खेतों में आग लग गई। इससे 94 बीघे गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। दमकल कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से कड़ी मशक्कत कर किसी तरह आग पर काबू पाया। जमुनहा तहसील के ककंधू गांव के पश्चिम के एक खेत में अज्ञात कारणों से आग लग गई।

देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर अन्य खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल को अपने चपेट में ले लिया। इससे ककंधू गांव के शंकर दयाल की चार बीघे, वेद प्रकाश की 18 बीघे, मधुरा व श्यामता की साढ़े चार-चार बीघे, हंसराम की सात बीघे, जगदंबा की दस बीघे, निर्मला की ढाई बीघे, गोबरे की तीन बीघे, किशोरी लाल की ढाई बीघे व राम बदल की आठ बीघे गेहूं की फसल जलकर राख हो गई है।

हल्के के लेखपाल प्रदीप कुमार खेतों में पहुंच कर जली गेहूं फसल के क्षति का आकलन किया। इसी प्रकार सतरही गांव में खेत में लगी आग से जगदंबा की तीन बीघे, राम पिंगल की दो बीघे, अभिरन लाल, रामअचल व कृपाला की ढाई-ढाई बीघे, लच्छू राम की साढ़े चार बीघे, शालिनी व विनीता की एक-एक बीघे, खुशीराम की छह बीघे, राजितराम व प्रमोद की डेढ़-डेढ़ बीघे व होली की आधा बीघे समेत लगभग 30 बीघे गेहूं की फसल जल गई। लेखपाल अनिल पांडेय ने बताया कि यहां लगभग 30 बीघे गेहूं की फसल जली है। क्षति का आकलन किया जा रहा है।

सोनभद्र में बिजली के जर्जर तार ढा रहे कहर

सोनभद्र में बेमौसम बारिश के बाद अब बिजली के जर्जर तार किसानों पर कहर ढा रहे हैं। आज कोन थाना क्षेत्र के देवाटन गांव में बिजली तार का टूटने से लगी आग में खलिहान में रखी फसल जलकर राख हो गई। आंखों के सामने धू-धूकर अपनी फसल को जलता देख किसान सदमे में है। ग्राम पंचायत देवाटन के टोला लौगांबाध निवासी औलाद मुहम्मद ने अपने पांच बीघे खेत में गेहूं, चना, मसूर की खेती की थी। फसल कटाई के बाद उसे अपने दरवाजे के सामने बने खलिहान में रखा था।

अब खाने तक को कुछ नहीं बचा

सोनभद्र जनपद में गत गुरुवार की सुबह करीब साढे पांच बजे ऊपर से गुजरा एलटी तार अचानक टूटकर फसल पर गिर गया। तार में प्रवाहित करंट से खलिहान में आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें इतनी तेज हो गई कि खलिहान में रखी पूरी फसल उसकी जद में आ गई। शोर गुल मचाते हुए लोग आग बुझाने के लिए दौड़े।

काफी प्रयास के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली। सूचना मिलते ही कोन की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आसपास पानी की व्यवस्था नहीं होने से पूरी फसल घंटों जलती रही। ग्राम प्रधान ने बताया कि बिजली कर्मचारियों को जर्जर तार बदलने के लिए कई बार सूचना दी गई  मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित औलाद मुहम्मद ने बताया कि “फसल बेचकर ही परिवार का जीविकोपार्जन चलता था, अब खाने तक को कुछ नहीं बचा।”

बलिया में फसल के अलावे जल गए मवेशी

बलिया जनपद में पांच सौ बीघे की गेहूं की फसल जलकर राख हो चुकी है। इधर, बांसडीहरोड में थाना क्षेत्र के साहोडीह गांव में बुधवार की रात अज्ञात कारणों से दो झोपड़ी में आग लग गई। आसपास के लोगों ने मशक्कत कर आग पर काबू पाया। जबकि आग की चपेट में आने से तीन बकरियों की मौत हो गई। वहीं, एक भैंस गंभीर रूप से झुलस गई।

साहोडीह गांव निवासी रमाशंकर राजभर व छांगुर राजभर का परिवार बुधवार की रात झोपड़ियों में सो रहे थे। देर रात में झोपड़ी में आग की लपटें उठनी शुरू हो गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आगलगी में रमाशंकर राजभर की एक झोपड़ी में रखे घरेलू सामानों के साथ ही एक भैंस झुलस गई। छांगुर राजभर की एक झोपड़ी में रखे घरेलू सामानों के साथ तीन बकरियां जलकर मर गईं।

(उत्तर प्रदेश से पवन कुमार मौर्य की रिपोर्ट।)

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