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गाजीपुर बॉर्डर की बिजली काटे जाने के बाद रात में पुलिसिया कार्रवाई की आशंका बढ़ी

नई दिल्ली। गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसानों के धरना स्थल की प्रशासन ने बिजली काट दी है। जिसके चलते वहां पचास हजार से ज्यादा की संख्या में बैठे किसानों को अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच गाजियाबाद जिले के एडीएम ने धरना स्थल का दौरा किया है और उन्होंने कहा है कि धरनास्थल को एक से डेढ़ दिन के भीतर खाली कराया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद किसानों पर पुलिसिया कार्रवाई की आशंका बढ़ गयी है।

बिजली जाने के बाद अचानक वहां अफरातफरी मच गयी है। और धरना स्थल पर बैठे किसानों ने सोने की जगह रात भर जगने का फैसला कर लिया है। किसान नेता चंद्रपाल सिंह ने जनचौक से बात करते हुए बताया कि न केवल बिजली काटी गयी है बल्कि दोनों छोर पर लगे सुरक्षा के बैरिकेड्स भी हटा दिए गए हैं जिससे होकर कई गाड़ियां भी गुजरी हैं। उन्होंने बताया कि जिले के एडीएम आए थे। उन्होंने किसानों से बातचीत में बताया कि पहले मुख्यमंत्री कहते थे कि किसानों को छूना नहीं है। लेकिन अब उनके सुर बदल गए हैं। उन्होंने कहा है कि धरनास्थल को एक से डेढ़ दिन के भीतर खाली करा लिया जाना चाहिए। एडीएम के इस बयान के बाद आंदोलनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई की आशंका बढ़ गयी है। हालांकि आंदोलनकारी हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। इस लिहाज से उन्होंने रात भर जगने का फैसला किया है।

उधर किसान नेता वीएम सिंह के आंदोलन से खुद को बाहर करने की घोषणा के बाद किसानों का उन पर गुस्सा फूट पड़ा। और बताया जा रहा है कि न केवल 10 से 15 हजार की संख्या में किसानों ने जुलूस निकालकर उनका विरोध किया बल्कि खुद उनके समर्थकों ने उनके कार्यालय को तोड़कर उसे लंगर में तब्दील कर दिया। उनके समर्थक खासकर युवा बेहद गुस्से में थे और उन्होंने उनके कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। और इसका नतीजा यह हुआ कि वीएम सिंह को अकेले धरनास्थल से अपने घर को लौटना पड़ा।

आपको बता दें कि आज प्रेस कांफ्रेंस करके वीएम सिंह ने कल की घटना के विरोध में खुद को आंदोलन से अलग करने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा कि वह अपने किसानों को मरवाने और उनका नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं आए हैं। इस मौके पर वह भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर खासे हमलावर थे।

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This post was last modified on January 27, 2021 11:56 pm

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