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पी चिदंबरम ने बोला सरकार पर हमला, कहा- नया प्रोत्साहन पैकेज पुराने 20 लाख करोड़ पैकेज के फेल होने का सबसे बड़ा सबूत

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा कल घोषित किए गए प्रोत्साहन पैकेज को खोदा पहाड़ निकली चुहिया करार देने के साथ ही कहा कि यह सरकार की इस बात की स्वीकारोक्ति भी है कि उसका पूर्व घोषित 20 लाख करोड़ का पैकेज पूरी तरह से विफल रहा है। चिदंबरम ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि “वित्तमंत्री का तथाकथित प्रोत्साहन पैकेज पर बयान पढ़ने के बाद मुझे हिंदी की वही कहावत याद आ गई कि ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’। सबसे पहले मैं स्पष्ट कर दूँ – कल की गई बड़ी घोषणा, आर्थिक वृद्धि का पहिया घुमाने के लिए दिया गया कोई प्रोत्साहन पैकेज नहीं था, अपितु लोगों की आंखों को अतिश्योक्तिपूर्ण आंकड़ों से चौंधियाने की एक शातिर चाल थी, ताकि उन्हें ऐसा आभास दिया जा सके कि सरकार देश के नागरिकों व अर्थव्यवस्था की जरूरतों को लेकर संवेदनशील व सक्रिय है। यह घोषणा इस बात की भी स्वीकारोक्ति है कि पिछला ‘‘20 लाख करोड़ का पैकेज’’ पूरी तरह विफल रहा। यह इसलिए विफल हुआ क्योंकि यह एक छलावा था”। 

इस बीच तमाम सामने आए आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “याद रहे, कल हमें यह समाचार भी मिला कि आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) लगातार छठवें महीने संकुचित हुआ है और खुदरा महंगाई बढ़कर 7.34 प्रतिशत हो गई है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) महंगाई दर में हुई पूरी बढ़ोत्तरी सब्जियों की कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण हुई, जिसकी सबसे ज्यादा मार गृहणियों पर पड़ी”।

उन्होंने कहा कि इस बार भी बताए गए आंकड़े एक धोखा हैं। यह प्रोत्साहन भी 73,000 करोड़ रुपये का नहीं है। न ही इसकी कीमत बताए गए 1,00,000 करोड़ रुपेय है। विश्लेषकों ने इन घोषणाओं के वित्तीय प्रभाव को जीडीपी के केवल 0.1 प्रतिशत के बराबर आंका है।

उन्होंने कहा कि मैं ‘डिमांड इन्फ्यूज़न’ जैसे वाक्यांश के इस्तेमाल से हैरान हूँ। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि क्या इस तरह का कोई वाक्यांश भी है। सरकार सरकारी कर्मचारियों के लिए माँ-बाप की भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है और उन्हें यह निर्देशित कर रही है कि उन्हें अपना कितना पैसा, किस सामान पर और कब खर्च करना चाहिए। यह वैसे ही है, जैसे भाजपा लोगों को बताती आई है कि उन्हें क्या खाना चाहिए, क्या पहनना चाहिए, कौन सी भाषा बोलनी चाहिए, किसे प्यार करना चाहिए और किससे शादी करना चाहिए आदि-आदि। अब सरकार लोगों द्वारा खर्च करने की रुचियों पर भी नियंत्रण करना चाहती है। यह लोगों के जीवन में नकारात्मक हस्तक्षेप करने का एक और प्रयास है। 

उन्होंने कहा कि अब हम इन तीन घोषणाओं की मैरिट्स देखते हैं:

1. सरकारी कर्मचारियों को 10,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त फेस्टिवल एडवांस कोई अतिरिक्त खर्च नहीं है। यह 10 मासिक किश्तों में वसूल लिया जाएगा। यह एक समान मासिक किश्त यानि ईएमआई पर सामान खरीदने जैसा है।

2. राज्यों के लिए प्रस्तावित 12,000 करोड़ रुपये कोई अनुदान नहीं है, बल्कि एक ऋण यानि लोन है। सभी बड़े राज्यों को मिलाकर 7,500 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो राज्यों द्वारा 2020-21 के बजट के लिए निर्धारित 9,00,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर का एक बहुत छोटा हिस्सा है। यह पैसा कोई बड़ा अंतर नहीं ला पाएगा।

3. केंद्र सरकार के 35 लाख एलटीसी कर्मचारियों को टैक्स में रियायत दिए जाने का ऑफर टैक्स पर छोटा सा लाभ पाने के लिए दोगुना पैसा खर्च करने का लालच देने का ओछा प्रयास है। वित्तमंत्री ने 10 दिन की छुट्टी के बदले नकद लाभ प्राप्त करने का विकल्प समाप्त कर दिया तथा यह आवश्यक कर दिया कि इसे टैक्स का छोटा सा फायदा पाने के लिए सरकार द्वारा बताए गए निर्देश के अनुरूप ही खर्च किया जाए।

यदि हम एलटीसी किराया 6000 रुपये से 36000 रुपये के बीच मानें, तो एक सरकारी कर्मचारी को –

a) अपनी बचत/धन से 12,000 रुपये से 72,000 रुपये खर्च करना आवश्यक है।

b)  केवल अखाद्य सामग्री (नॉन फूड सामग्री) खरीदनी आवश्यक है। 

c) 12 प्रतिशत से ज्यादा जीएसटी दर का सामान खरीदना आवश्यक है।

d)  केवल जीएसटी रजिस्टर्ड दुकान से खरीदना आवश्यक है। 

e) भुगतान नकद में नहीं, अपितु डिजिटल रूप से किया जाना आवश्यक है।

f)  सामान 31/03/2021 से पहले खरीदना आवश्यक है।

g) जीएसटी बिल प्रस्तुत करना आवश्यक है।

आगे उन्होंने कहा कि यदि सरकारी कर्मचारी ये सातों शर्तें पूरी करेगा, तभी उसे 300 रुपये से 7200 रुपये तक का टैक्स लाभ मिल सकेगा। हमें देखना है कि वित्तमंत्री के इस ‘उदार तोहफे’ का लाभ कितने सरकारी कर्मचारी उठाएंगे। हम 2 से 3 साल बाद इस स्कीम पर कैग की ऑडिट रिपोर्ट आने का इंतजार करेंगे।

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को पैसे की सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें एक बार फिर उनके हाल पर छोड़ दिया गया। वो आय के मामले में भारत की सबसे निचली आधी जनसंख्या है। दर्जनों अर्थशास्त्रियों, कांग्रेस पार्टी एवं अन्य राजनैतिक दलों की मांग के बावजूद सरकार हठधर्मिता से इन सबसे जरूरतमंद परिवारों के खातों में सीधा पैसा पहुंचाने से इंकार करती आ रही है। मुझे विश्वास है कि वो लोग अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे इन दयनीय प्रयासों को देख रहे होंगे, जब 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 10 प्रतिशत की गिरावट आने जा रही है।

This post was last modified on October 13, 2020 7:49 pm

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