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चीन ने भारत पर फायरिंग के जरिये गंभीर सैन्य उकसावे का लगाया आरोप

नई दिल्ली। चीनी सेना ने अपने एक बयान में भारत पर सोमवार की रात को आक्रामक तरीके से फायरिंग करने का आरोप लगाया है। घटना चोशुल सेक्टर के पैंगांग झील के दक्षिण किनारे पर हुई है। इसके साथ ही इलाके में तनाव और बढ़ गया है। आपको बता दें कि 7 सितंबर को यहां दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी।

हालांकि भारतीय सेना ने चीन के इस दावे को खारिज कर दिया है कि उसने एलएसी पार किया है और उसके बाद फायरिंग की है। इसकी बजाय उसने चीन पर भड़काने वाली गतिविधियों को संचालित करने तथा उसके जरिये इलाके में तनाव को बढ़ाने का आरोप लगाया है। भारत ने कहा है कि चीन की वेस्टर्न कमांड थियेटर ने कल रात के अपने बयान के जरिये घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को बरगलाने की कोशिश की है।

मंगलवार यानी आज सुबह एक बयान में भारतीय सेना ने कहा कि “वैसे भारत एलएसी पर डिसएनगेजमेंट और डिएस्केलेशन के लिए प्रतिबद्ध है। जबकि चीन लगातार अपनी भड़काऊ गतिविधियों के जरिये इसको बढ़ाने का काम कर रहा है।”

उसने आगे कहा कि किसी भी मोड़ पर भारतीय सेना ने एलएसी को पार नहीं किया है और फायरिंग समेत किसी भी तरह के हमले जैसी किसी भी घटना को अंजाम नहीं दिया है।

चीन की सेना ने सोमवार की झड़प को गंभीर सैन्य उकसावा करार दिया है।

1975 के बाद से भारत और चीन की सीमा पर अभी तक कोई भी फायरिंग की घटना नहीं हुई थी।

चीनी बयान से यह जाहिर होता है कि पैंगांग झील के दक्षिणी हिस्से में जारी गतिरोध हाल के दिनों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शुरू हुए तनाव में सबसे गंभीर है। इसके पहले 15 जून को गलवान घाटी में झड़प हुई थी जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गयी थी। और कुछ चीनी सैनिक भी इस घटना में मारे गए थे। गलवान झगड़े में किसी भी तरह की फायरिंग नहीं हुई थी।

देर रात को 1.30 बजे यानी भारतीय समय के मुताबिक 11 बजे जारी एक बयान में पीएलए के सीनियर कर्नल झांग श्यूली जो वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता भी हैं, ने कहा कि “7 सितंबर को भारतीय सैनिक अवैध रूप से एलएसी को पार कर पैंगांग झील के दक्षिणी किनारे और चीनी-भारतीय सीमा के पश्चिमी हिस्से के शएनपाओ पहाड़ में घुस गए।”

ग्लोबल टाइम्स न्यूज़ पेपर की रिपोर्ट के मुताबिक “चीन ने भारतीय सेना पर उन चीनी पैट्रोल सैनिकों पर आक्रामक तरीके से फायरिंग करने का आरोप लगाया है जो बातचीत करने के लिए जा रहे थे”।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक बयान में कहा गया है कि “भारतीय पक्ष की यह नई पहल दोनों पक्षों के बीच इससे संबंधित हुए समझौते का गंभीर उल्लंघन है और इसने इलाके में तनाव को और गहरा कर दिया है। यह आसानी से भ्रम और गलत फैसले का कारण बन सकता है। जो अपने आप में एक गंभीर सैन्य उकसावा है और अपनी प्रकृति में बेहद घिनौना है।”

बयान में आगे कहा गया है कि “हम भारतीय पक्ष से तत्काल इस खतरनाक पहल को रोकने की मांग करते हैं। तुरंत उन सैनिकों को वापस ले जाए जो एलएसी पार कर वहां पहुंच गए हैं। फ्रंटलाइन के सैनिकों पर कड़ा नियंत्रण रखे। (भारत) गंभीरता से पूरे मामले की जांच करे और उन सैनिकों को दंडित करे जिन्होंने उकसावे वाली फायरिंग की है। इसके साथ ही इस बात को सुनिश्चित करे कि आइंदा ऐसी घटना नहीं होगी।”

इसमें आगे कहा गया है कि “पीएलए वेस्टर्न थियेटर कमांड के सैनिक पूरी दृढ़ता के साथ अपनी ड्यूटी और मिशन को पूरा करेंगे और साथ ही राष्ट्रीय भौगोलिक संप्रभुता की पूरे संकल्प के साथ रक्षा करेंगे।”

इस सेक्टर में तनाव 29 अगस्त से ही बहुत ज्यादा बढ़ गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दक्षिणी किनारे पर यथास्थिति को बदलने की नियति से पिछले हफ्ते 29 अगस्त को चीनी सैनिक उकसावे वाली कार्रवाई में शामिल हो गए थे। जिसने भारत को उसके बचाव में कदम उठाने के लिए बाध्य कर दिया था। उसके बाद से भारत ने चोशुल सेक्टर में महत्वपूर्ण ऊंचाइयों को अपने कब्जे में ले लिया है।

दो दिन बाद मास्को में चीनी विदेश मंत्री से होने वाली मुलाकात के कार्यक्रम से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच राजनैतिक स्तर पर यह बहुत-बहुत गहरी बातचीत की मांग करती है।

आपको बता दें कि जयशंकर संघाई कोऑपरेशन आर्गेनाइजेशन (एससीओ) की विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए मास्को जा रहे हैं। यह बैठक 9 से 11 सितंबर को होगी। इन सारी घटनाओं के बाद चीनी विदेश मंत्री के साथ यह उनकी पहली बैठक होगी।

इसके पहले मास्को में हुई एससीओ देशों के रक्षामंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह की मुलाकात चीन के रक्षामंत्री से हुई थी। जिसमें माना रहा था कि राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षामंत्री को हालात को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही थी।

इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि सीमा की स्थिति को रिश्तों की स्थिति से अलग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “अगर सीमा पर शांति और स्थायित्व नहीं रह पाता है तो बाकी रिश्ता भी उसी आधार पर आगे नहीं बरकरार रह सकता है।”

“अगर आप पिछले 30 सालों को देखिए, क्योंकि इस दौरान सीमा पर शांति और स्थायित्व था- वहां समस्याएं भी थीं- मैं उसको खारिज नहीं कर रहा हूं- जिसने बाकी रिश्ते को आगे बढ़ने में मदद की। इसका नतीजा यह हुआ कि चीन दूसरा सबसे बड़ा भारत का व्यापारिक सहयोगी बन गया….निश्चित तौर पर शांति और स्थायित्व रिश्तों का आधार है।”

This post was last modified on September 8, 2020 12:55 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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