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कांग्रेस ने गुजरात के ‘वेंटिलेटर घोटाले’ की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कल गुजरात में हुए वेंटिलेटर कांड को लेकर बीजेपी पर जमकर हमला बोला। और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जाँच कराने की माँग कर डाली। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कल एआईसीसी की अपनी नियमित प्रेस कांफ्रेंस में इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने सिलसिलेवार तरीक़े से पूरे मामले को सामने रखा।

उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ समूचा विश्व कोविड महामारी एवं उससे उत्पन्न सामाजिक एवं आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ गुजरात सरकार की कोविड से लड़ाई में एक हैरतअंगेज़ एवं दुखदायी कांड परत दर परत खुलता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 4 अप्रैल, 2020 को गुजरात के मुख्यमंत्री इस संकट काल में पहली बार गांधीनगर से अहमदाबाद आते हैं और धमन- 1 का उद्घाटन सिविल अस्पताल अहमदाबाद में करते हैं। इस दिन की प्रेस रिलीज जो गुजरात सरकार के सूचना विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है, में रूपानी साहब बार-बार अपने एक मित्र पराक्रम सिंह जडेजा एवं ज्योति सीएनसी नामक एक कंपनी की तारीफ़ करते हैं, प्रशंसा करते हैं कि 10 दिन के भीतर ज्योति सीएनसी ने धमन नामक एक वेंटिलेटर बना डाला। उक्त प्रेस रिलीज में धमन-1 को दस बार वेंटिलेटर का दर्जा दिया जाता है।

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में CSR के तहत ज्योति सीएनसी 1,000 धमन-1 नामक मशीनें दे देती है। 15 मई 2020 को उसी अस्पताल के अधीक्षक सरकार को लिखकर सूचित करते हैं कि एनेस्थीसिया विभाग के अनुसार उक्त वेंटिलेटर मरीजों पर कामयाब नहीं है एवं तुरंत प्रभाव से अस्पताल को वेंटिलेटर दिए जाएं। (संलग्न 2 )अब यह पता चला है कि धमन-1 नामक मशीन वेंटिलेटर है ही नहीं, वह तो एक मैकेनाइज्ड एम्बू (Artificial Manual Breathing Unit) बैग है।

जहां लोगों की जान से जुड़ी हुई बात आए वहां एक कंपनी अपनी वेबसाइट पर धमन-1 को वेंटिलेटर बताती है। राज्य सरकार अपनी प्रेस रिलीज में उस मशीन को 10 बार वेंटिलेटर का दर्जा देती है और उसका इतना प्रचार करती है कि न केवल अन्य राज्य सरकारें धमन-1 को खरीदने के लिए आर्डर देती हैं, बल्कि भारत सरकार की कंपनी एचएलएल लाइफकेयर 5 हजार मशीनों का आर्डर करती है और उसके बाद यह सत्य उजागर होता है कि धमन-1 नामक मशीन वेंटिलेटर नहीं है और यह कोविड के मरीजों पर कतई कारगर साबित नहीं हो रही है।

यदि 25 मार्च, 2020 और 18 मई, 2020 के हम गुजरात के आँकड़े देखें तो सिविल अस्पताल में जहां 338 मरीज ठीक होकर अस्पताल से निकल चुके हैं, वहीं 343 की मृत्यु हो चुकी है। गुजरात के अन्य अस्पतालों से तुलना करें तो एसवीपी अस्पताल में 884 मरीज ठीक हो चुके हैं, 117 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। निजी अस्पतालों में 186 ठीक हो चुके हैं और 63 की मृत्यु हुई। सोला सिविल अस्पताल में 187 मरीज ठीक हो चुके हैं और 26 की मृत्यु हो चुकी है। इन आँकड़ों से यह दिखता है कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मृत्य दर सबसे अधिक है। यह वही अस्पताल है जहां धमन-1 का सर्वाधिक उपयोग हुआ। जब यह तथ्य सामने आया एवं राज्य सरकारों ने धमन-1 के आर्डर कैंसल करने शुरू किए, तब राज्य के स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव जयंती रवि ने परसों एक महीने में पहली बार 88 मिनट की एक पत्रकार सम्मेलन संबोधित किया, जहां वह लगातार धमन-1 के बचाव में नजर आईं। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि एचएलएल लाइफकेयर भी 5 हजार मशीनें खरीद रहा है।

अखबारों में छपी खबरों के अनुसार धमन-1 डीसीजीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) का लाइसेंस नहीं प्राप्त है और इस मशीन को अस्पतालों में लगाने से पहले सिर्फ 1 मरीज पर जांचा गया था। अहमदाबाद की स्थिति भयावह है। लोगों में भय और अविश्वास का माहौल है। आलम यह है कि सरकार ने अहमदाबाद के कलेक्टर एवं आयुक्त को आनन-फानन में स्थानांतरित कर दिया है। मरीजों के रिश्तेदार उत्तर की तलाश में एफआईआर दर्ज कराने पर मजबूर हो रहे हैं। लोगों को प्रश्नों के उत्तर नहीं मिल रहे हैं :

  1. आखिर क्या कारण है कि बिना लाइसेंस के सिर्फ 1 मरीज पर टेस्ट करने के बाद धमन-1 को अस्पतालों में लगा दिया गया?
  2. धमन-1 जो एक मैकेनाइज्ड एम्बू बैग है, को मुख्यमंत्री द्वारा वेंटिलेटर का दर्जा क्यों दिया गया?
  3. गुजरात सरकार की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, ज्योति सीएनसी द्वारा निर्मित धमन-1 का बचाव करती हुई दिख रही हैं?
  4. एचएलएल लाइफकेयर जो 5 हजार धमन-1 मशीनें खरीद रहा है, क्या वे पीएम केयर फंड का उपयोग कर रहा है?

अब तक इन सवालों के उत्तर मिले भी नहीं थे कि एक और वेबसाइट ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ज्योति सीएनसी नामक कंपनी के 2 प्रमुख शेयर होल्डर विरानी परिवार से हैं। यह वही विरानी परिवार है, जिसने पीएम नरेन्द्र मोदी को 10 लाख का बहुचर्चित एवं प्रचलित सूट तोहफे के रूप में दिया था। यदि हम ज्योति सीएनसी की 31 मार्च 2019 की शेयर होल्डर सूची देखें तो यह स्पष्ट होता है कि एकनाथ इंफ्राकॉन एलएलपी (Eknath Infracon LLP) के पास इस कंपनी के 74,02,750 शेयर हैं एवं स्मित रमेश भाई विरानी के पास 60 लाख 8 हजार शेयर हैं। कंपनी के सीएमडी पराक्रम सिंह जडेजा ने स्वयं माना है कि विरानी परिवार का ज्योति सीएनसी में 46.76 प्रतिशत हिस्सा है।

प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि आज जब समूचा विश्व भय एवं अनिश्चितता में जी रहा हो, तब क्या यह शोभा देता है कि सरकार में ऊँचे पदों पर बैठे लोग जनता की जान की परवाह किए बिना अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने में जुटे रहें? हम सरकार से यह मांग करते हैं कि जो प्रश्न गुजरात की जनता के दिमाग में बार-बार आ रहे हैं, देश की जनता के दिमाग में बार-बार आ रहे हैं, मीडिया बार-बार पूछ रहा है। इनका उत्तर दिया जाएः 

  1. धमन-1 को स्वीकृति किसने और क्यों दी?
  2. डाक्टरों की आपत्ति के बावजूद गुजरात सरकार क्यों धमन-1 का बचाव कर रही है?
  3. 30 जनवरी, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी- अन्तर्राष्ट्रीय चिंता संबंधी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’’ का दर्जा दिया था। लेकिन गुजरात प्रशासन जनवरी के पूरे माह, फरवरी के पूरे माह “नमस्ते ट्रंप” के आयोजन में क्यों व्यस्त रहा?
  4. क्या कारण है कि अहमदाबाद में गुजरात के 74 प्रतिशत कोविड के केस मिल रहे हैं एवं अहमदाबाद में ही 80 प्रतिशत मौतें हो रही हैं? क्या कारण है कि देश के 11 प्रतिशत केस गुजरात में पाए जा रहे हों, लेकिन 22 प्रतिशत मौतें हो रही हों?

देश आज तथाकथित ’’गुजरात मॉडल’’ की हकीकत जान चुका है। जहां आप सत्ता का अर्थ अपने चुनिंदा मित्रों को लाभ पहुंचाना मानते हों। आप लोगों के जीवन के साथ खेल रहे हों, क्योंकि आपको लगता है कि आप खेल सकते हैं।

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This post was last modified on May 24, 2020 7:53 am

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