Monday, October 18, 2021

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कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का देश भर में चक्का जाम, 500 किसान संगठनों ने की शिरकत

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देशव्यापी चक्का जाम के तहत कल गुरुवार को पूरे देश में किसानों ने तमाम सड़कों, हाईवे और रेल पटरियों पर बैठकर चक्का जाम किया। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए किसान विरोधी तीन ड्रैकोनियन कृषि कानून के खिलाफ़ अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) ने चक्का जाम का आह्वान किया था। 500 से अधिक किसान संगठनों ने ‘कॉर्पोरेट भगाओ- खेती-किसानी बचाओ- देश बचाओ’ के केंद्रीय नारे के साथ इसमें शिरकत की। माकपा समेत प्रदेश की पांचों वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता भी इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतरे।

कर्नाटक, तमिलनाड़ू, तेलांगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ़ जैसे तमाम राज्यों में किसानों ने चक्का जाम किया। पंजाब और हरियाणा में किसानों के चक्का जाम का ज़्यादा व्यापक असर दिखा। हरियाणा और पंजाब की लगभग सभी मुख्य सड़कें, हाईवे और रेल मार्ग किसानों ने ब्लॉक कर दिया। हरियाणा और पंजाब में जगह-जगह जन सैलाब नज़र आया, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े बुजुर्ग तक और स्त्री पुरुष सब ने अपनी भागीदारी निभाई। हालांकि हमेशा की तरह किसानों का देशव्यापी चक्का जाम मीडिया कवरेज से महरूम रहा। किसानों और मजदूरों के आंदोलन को मीडिया हमेशा से ही ब्लैकआउट करता आया है।

हरियाणा, पंजाब पूरी तरह रहे बंद
किसानों के चक्का जाम का असर पंजाब और हरियाणा की सड़कों पर ज्यादा देखने को मिला। देशव्यापी चक्का जाम में हरियाणा के 34 किसान संगठनों ने भाग लिया। गुरदासपुर के बटाला में किसानों ने एसएसपी कार्यालय के सामने धरना लगा दिया। यहां किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नवांशहर और जालंधर में भी किसान राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठे। रोपड़ में किसानों ने चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय मार्ग जाम कर दिया।

लुधियाना के जगरांव टोल प्लाजा, बठिंडा में राष्ट्राय राजमार्ग और फतेहगढ़ साहिब में किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किया। वहीं पठानकोट, जालंधर, मुक्तसर और अबोहर में भी किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर स्थित गोल्डन गेट के पास प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों के साथ महिलाएं भी इस धरने में शामिल हुईं। धरने के कारण अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इसके अलावा किसानों ने लॉरेंस रोड, मजीठा रोड, छेहरटा और बाईपास के कई क्षेत्रों में धरना दिया।

किसान संगठनों ने चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव खाबड़ा के पास चक्का जाम किया। इस प्रदर्शन में किसान जत्थेबंदियों के अलावा मजदूर यूनियनों और विद्यार्थी यूनियन भी किसानों के साथ खड़ी दिखी। इसके अलावा किसानों द्वारा गांव रंगीलपुर के पास राष्ट्रीय मार्ग और श्री आनंदपुर साहिब में गांव नक्कियां के पास भी केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

पातड़ां में क्रांतिकारी किसान यूनियन ने दिल्ली-संगरूर हाईवे पर जाम लगा दिया। वहीं किसान यूनियन उगराहां ने न्याल बाईपास पातड़ां पर पातड़ां-पटियाला रोड मुकम्मल तौर पर बंद कर दिया। न्याल बाईपास पटियाला रोड पर और नाभा में भारतीय किसान यूनियन डकौंदा ने रोहटी पुल चौक में जाम लगाया। साथ ही भारतीय किसान यूनियन राजेवाल की ओर से नाभा में दुलदी गेट के पास नाभा-मालेरकोटला चंगी सड़क पर जाम लगाकर धरना दिया गया। कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर पंजाब बंद के आह्वान को संगरूर में पूर्ण समर्थन मिला। जिले के विभिन्न हिस्सों में मुख्य मार्गों पर किसान संगठनों ने जाम लगाया। महावीर चौक में किसान संगठनों ने दिल्ली-लुधियाना और बठिंडा-चंडीगढ़ मार्ग पर दोपहर 12 से 4 बजे तक जाम लगा कर यातायात पूरी तरह बाधित रखा।

हरियाणा के करनाल में किसानों ने जीटी रोड जाम कर दिया। रतिया में भी बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे। कैथल में तितरम मोड़ पर किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। रेवाड़ी में किसान संगठनों ने रैली निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसान संगठनों ने कृषि कानून के विरोध में मक्खू, जीरा, जलालाबाद, फिरोजपुर और बंगाली पुल पर धरना देकर जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जाने वाले राजमार्ग को चार घंटे तक पूरी तरह बंद रखा। किसानों ने केंद्र सरकार और कारपोरेट घरानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

फरीदकोट में 10 स्थानों पर दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक नेशनल और स्टेट हाईवे पर चक्का जाम किया। फरीदकोट में गांव पक्का, सादिक और गोलेवाला, कोटकपूरा के मुख्य चौक, मोगा रोड, कोठे गज्जन सिंह और जैतो में बस स्टैंड, गांव गोंदारा, रोमाना अलबेल सिंह और वाडा भाई का में चक्का जाम कर मोदी सरकार के खिलाफ रोष जताया। लुधियाना में सतलुज पुल पर ट्रालियां लगाकर लुधियाना-जालंधर नेशनल हाईवे रोक दिया। दोपहिया वाहनों को भी निकलने का रास्ता नहीं दिया गया। हालांकि सैन्य वाहन और एंबुलेंस को किसान नेताओं ने खुद जाम से निकलवाया।

हिसार जिले में किसानों ने सरसौद में जाम लगा दिया और हिसार-नरवाना राजमार्ग पर बैठ गए। सिरसा में मुहिशबवाला के पास पंजाब-हरियाणा सीमा पर किसानों ने हाईवे पर धरना दिया। फतेहाबाद के ढाणी गोपाल में किसानों ने जाम लगाकर भारत बंद का समर्थन किया। बठिंडा जिले में किसान संगठनों ने जिले के आठ स्थानों पर किसानों ने हाईवे पर धरना लगाकर जाम लगाया।

देशव्यापी चक्काजाम की कुछ झलकियां

लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश

कर्नाटक

तेलंगाना

पश्चिम बंगाल

आंध्र प्रदेश

उत्तराखंड

महाराष्ट्र

उड़ीसा

तमिलनाडु

गुजरात

झारखंड

हरियाणा

इलाहाबाद और छत्तीसगढ़ में किसानों ने निकाला जुलूस
मोदी सरकार के कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ प्रदेश में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के बैनर तले 25 से ज्यादा संगठन एकजुट हुए और कोरबा, राजनांदगांव, सूरजपुर, सरगुजा, रायगढ़, कांकेर, चांपा, मरवाही, बिलासपुर, धमतरी, जशपुर, बलौदाबाजार और बस्तर सहित 20 से ज्यादा जिलों में अनेकों स्थानों पर सड़क रोक कर भारी विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। मोदी सरकार के पुतले भी जलाए गए। किसानों के इस चक्का जाम का प्रदेश में व्यापक असर देखने को मिला और राष्ट्रीय राजमार्ग सहित राज्य की सड़कें और विशेष रूप से गांवों को शहरों से जोड़ने वाली सड़कों पर आवागमन बाधित हुआ।

इलाहाबाद में कंजासा गांव में मजदूरों की नाव से खनन प्रारंभ करने के लिए सभा
जारी मंडी में किसानों-मजदूरों ने विरोध जताया। धान का सरकारी रेट 1868 पर खरीद करने का आग्रह किया गया। कंजासा की जनसभा में मजदूरों ने जून 2019 के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश, कि केवल प्रयागराज में, केवल जमुना नदी में, बालू खनन करने में नाव से खनन पर रोक रहेगी, की जमकर आलोचना की और मांग की कि इस आदेश को वापस लेकर तुरंत खनन का काम नाव से शुरू कराया जाए ताकि मजदूरों का रोजगार बहाल हो सके।

पंजाब में कोयले की कमी से ब्लैक आउट का ख़तरा
केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में कई किसान संगठन रेल रोको अभियान चला रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहन) उस ट्रैक पर धरना दे रहा है, जिसके जरिए राजपुरा और मनसा पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति होती है। वहीं किसान मजदूर संघर्ष समिति के लोग अमृतसर के ट्रैक को ब्लॉक कर रहे हैं। पंजाब के राज्य बिजली बोर्ड के चेयरपर्सन ए वेणु प्रसाद ने कहा कि मंगलवार से राज्य में कम से कम दो से तीन घंटे का पावर कट करना पड़ेगा, क्योंकि राज्य में पांच थर्मल प्लांट्स में बिजली का उत्पादन बाधित है। किसानों के आंदोलन और रेलवे ट्रैक पर धरने को लेकर रेल मंत्रालय ने राज्य में 7 नवंबर तक रेलगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस वजह से थर्मल प्लांट्स को कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं बिजली बोर्ड के अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि यदि समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो पंजाब में ब्लैकआउट का ख़तरा है।

वहीं रेलवे ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि पंजाब में मालगाड़ियों की आवाजाही रुकने से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है।

पंजाब सरकार को प्राइवेट थर्मल पावर प्लांट को अनुबंध के मुताबिक रोज 5 से 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। औद्योगिक इकाइयों तक कच्चे माल की आपूर्ति ठप है और खेती में उपयोग होने वाले उर्वरक भी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उधर, किसान हितों के खिलाफ़ कृषि कानून बनाने वाली केंद्र सरकार में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पंजाब सरकार से ट्रेनों की सुरक्षा का आश्वासन मांगा है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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