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प्रशासन के मंसूबों पर किसानों का हौसला पड़ा भारी, जगह-जगह पुलिस को दी मात

मोदी सरकार के किसान विरोधी बिल के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा आज और कल दिल्ली में होने वाले लाखों किसानों के विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए तीन दिन पहले से हरियाणा में गिरफ्तारियां शुरू हो चुकी थीं। दर्जनों किसानों को गिरफ्तार करने के बाद बीती रात दिल्ली कि पूरी सीमा सील कर दी गयी और किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान जगह-जगह तैनात कर दिए गये। केंद्र और हरियाणा सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जगह सड़कों पर बैरिकेटिंग की गयी और दिल्ली की तरफ बढ़ते किसानों पर पानी का तेज बौछार किया गया, आंसू गैस के गोले दागे गये। कुछ स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच झड़पें भी हुईं। इन सबके बाद भी लाखों की संख्या में किसान दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं।

हरियाणा ने पंजाब और दिल्ली के साथ लगने वाली अपनी सीमाओं को सील कर दिया है। हाईवेज़ पर भारी-भरकम बैरिकेडिंग की गई है। भारी संख्या में पुलिस तैनात है। एक दिन पहले हरियाणा-पंजाब के बीच बस सर्विस को भी सस्पेंड कर दिया था।

किसानों के साथ-साथ आज की तमाम केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी आज भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद का कई राज्यों में व्यापक असर पड़ा है।

अगरतला में बीजेपी के गुंडों ने सीपीआई के कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि मजदूरों की हड़ताल पर यह बीजेपी की प्रतिक्रिया है।

भारत बंद के मौके पर सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर किसानों के आंदोलन के प्रति सरकार द्वारा बरते जा रहे रवैये की कड़ी निंदा की। उन्होंने सरकार को इस तानाशाही से बाज आने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा कि अब इस प्रदर्शन के बाद सरकार को किसान विरोधी नीतियों को वापस लेने की घोषणा कर देनी चाहिए।

आज सुबह पंजाब के किसान पटियाला अंबाला हाईवे पर किए गए बैरिकेड को तोड़ते हुए और वाटर कैनन व आंसू गैस के गोले झेलते हुए आगे बढ़े। जब ये किसान हरियाणा के सादोपुर पहुंचे तो इन्हें एक बार फिर वाटर कैनन की बौछारें झेलनी पड़ीं।

गुरुग्राम में योगेंद्र यादव ने किसान मोर्चा को दिल्ली कूच के लिए बुलाया था, लेकिन वहां पहुंचे सभी लोगों को हिरासत में ले लिया गया। हरियाणा में धारा 144 लागू कर दी गई है।

किसानों के साथ कई छात्र संगठन और अन्य संगठन भी आज देश भर में सड़कों पर उतर आये।

किसान संगठनों ने आज दिल्ली में दस लाख किसानों के जमा होने का दावा किया था। आज जयपुर दिल्ली हाइवे से पहले शांति भंग के आरोप में सैकड़ों किसानों को हिरासत में लिया गया  और उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

जहां एक तरफ तमाम रुकावटों और पूरी सरकारी मशीनरी के लगाने के बाद भी किसानों का दिल्ली की तरफ बढ़ना जारी है, वहीं देश के अलग-अलग राज्यों में किसान प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

बुधवार देर रात आगरा में यूपी पुलिस ने नर्मदा बचाव आन्दोलन की नेता मेधा पाटकर,  महाराष्‍ट्र की किसान आदिवासी नेता प्रतिभा शिंदे सहित कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्यप्रदेश से दिल्ली आ रहे किसानों को भी पुलिस ने रोक दिया था।

गिरफ्तारी के खिलाफ  मेधा पाटकर उपवास पर
बुधवार रात को महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से AIKKMS के मनीष श्रीवास्तव, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राहुल राज, लोक संघर्ष मोर्चा की प्रतिभा शिंदे, नर्मदा बचाओ आंदोलन और NAPM की नेत्री मेधा पाटकर व अन्य नेताओं के नेतृत्व में दिल्ली की और अपनी मांगों को लेकर जा रहे किसानों को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा  सैया बॉर्डर पर रोक लिया गया। जिसके विरोध में  कल रात से ही मेधा पाटकर 12 घंटे के उपवास पर थीं।

किसानों पर पुलिस बल और पानी के बौछार करने के लिए तमाम किसान संगठन, ट्रेड यूनियन और राजनीतिक दलों के नेताओं ने हरियाणा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना की है और इसे अनैतिक और असंवैधानिक करार दिया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने किसानों के साथ एकजुटता जाहिर की है। उन्होंने पहली बार किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर अपनी बात रखी है। केजरीवाल ने खेती बिलों को किसान विरोधी बताया है और उन्होंने किसानों के प्रदर्शन को दबाए जाने को भी गलत करार दिया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों पर पानी की बौछार और हरियाणा पुलिस द्वारा बलपूर्वक उनके मार्च को रोकने की कोशिश की निंदा की। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जब किसान दो महीने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे तब उनसे बात कर समस्या का हल निकालने की कोशिश नहीं की गई और उन्हें रोका जा रहा है।

वहीं शिरोमणि अकाली दल के नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो बहुत कुछ कर सकते हैं। वे केंद्र पर दवाब बना कर बहुत सी समस्या सुलझा सकते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह को दिल्ली जाकर दबाव बनाना चाहिए था और साथ ही किसानों के साथ एक बैठक करनी थी। उन्होंने हरियाणा के किसानों से पंजाब के किसानों का समर्थन करने का भी आह्वान किया है।

सीपीआई (एमएल) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने किसानों पर पानी बरसाने के वीडियो को ट्वीट कर लिखा-क्या यह कुरुक्षेत्र का नया युद्ध है? बीजेपी सरकार भारत के किसानों के साथ युद्ध लड़ रही है।

बता दें कि इससे पहले हरियाणा में खट्टर सरकार द्वारा आज के दिल्ली मार्च को देखते हुए गिरफ्तार किये गये सौ से अधिक किसान नेताओं के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह नोटिस अधिवक्ता प्रदीप कुमार रपरिया, हरिंदर पाल सिंह और प्रवीन कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका पर जारी किया है।

इस याचिका में कहा गया है कि सरकार की किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध-मार्च को कुचलने के लिए किसान नेताओं के घर रात एक बजे से सुबह तीन बजे के बीच छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों के इस हड़ताल को बीजेपी और उसके कुछ सहयोगी दलों को छोड़ कर सभी अन्य दलों का समर्थन मिला है।

यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर लिखा है– किसानों से समर्थन मूल्य छीनने वाले कानून के विरोध में किसान की आवाज सुनने की बजाय भाजपा सरकार उन पर भारी ठंड में पानी की बौछार मारती है। किसानों से सब कुछ छीना जा रहा है और पूंजीपतियों को थाल में सजा कर बैंक, कर्जमाफी, एयरपोर्ट रेलवे स्टेशन बांटे जा रहे हैं।

गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किसान विरोधी तीन विधेयक संसद में जबरन पास किये जाने के बाद से देश भर के किसान विशेषकर पंजाब और हरियाणा के किसान उबाल पर हैं। बीते दो महीने से अधिक समय से पंजाब में रेल सेवाएं बाधित हैं और एक भी माल गाड़ी को पंजाब में घुसने नहीं दिया दिया। वहां किसान रेल पटरियों पर तम्बू गाड़ कर बैठे हैं। केन्द्रीय रेल मंत्री और कृषि मंत्री के साथ किसान संगठनों की पिछली बैठक भी बेनतीजा ही रही थी।

वहीं देश भर के तमाम ट्रेड और मजदूर यूनियन भी सरकार की जनविरोधी नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी, रेल, बैंक और सार्वजानिक क्षेत्र के उद्योगों के निजीकरण के खिलाफ आज और कल बंद का ऐलान किए हैं।

गौरतलब है कि, मोदी सरकार द्वारा लाये गये कृषि विधेयकों के खिलाफ बीते दो महीनों से शांतिपूर्ण विरोध के बाद संविधान दिवस के दिन 26 नवंबर को देश भर के 400 से अधिक किसान संगठनों द्वारा ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान पर देश के लाखों किसानों ने राजधानी के लिए कूच किया था। किसानों के इस महा मार्च ने मोदी और हरियाणा की खट्टर सरकार की नींद इस कदर उड़ाई कि इन किसानों को रोकने के लिए राज्य की पूरी पुलिस के अलावा सीआरपीएफ और रेपिड एक्शन फोर्स को भी लगाना पड़ा। बावजूद इसके सरकार अपने मंसूबों में कामयाब नहीं रही।

देशव्यापी हड़ताल मे इलाहाबाद के श्रमिक वर्ग ने बढ़ चढ़कर शिरकत की। केंद्र सरकार के किसान विरोधी और श्रमिक विरोधी पास हो चुके बिलों के खिलाफ लोगों ने भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया। केन्द्रीय श्रम संगठनों एटक से रामसागर तथा नसीम अंसारी, इंटक से देवेन्द्र प्रताप सिंह, सीटू से रविशंकर मिश्र, हरिश्चंद्र द्विवेदी तथा अविनाश मिश्र, एक्टू से अनिल वर्मा, एस पी बहादुर तथा डॉ. कमल उसरी, एआईयूटीयूसी से राजवेंद्र सिंह तथा निर्मल मिश्र, सेंट्रल गवर्नमेंट कॉन फेडरेशन से सुभाष पाण्डेय, अधिवक्ता मंच से प्रमोद कुमार गुप्ता तथा सईद सिद्दीकी आल इंडिया लाइयर यूनियन से आशुतोष तिवारी तथा माता प्रसाद पाल,आदि नेता कर रहे थे।

रैली एलआईसी गेट से प्रारंभ होकर ज़ोरदार नारों तथा हड़ताल के मुद्दों को जनता के बीच बताते हुए मोदी सरकार के जनविरोधी कार्यों के विरुद्ध अपने आक्रोश को व्यक्त कर रही थी । हजारों की संख्या मे कर्मचारी ए जी आफ़िस पहुँचे जहाँ यह सभा मे तब्दील हो गयी।

(पत्रकार और कवि नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on November 26, 2020 8:38 pm

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