Subscribe for notification

आखिर महामहिम मान गए! 14 अगस्त से होगा राजस्थान का विधानसभा सत्र

नई दिल्ली। एक हफ्ते की लगातार जारी जद्दोहद और दोनों पक्षों के बीच पत्रों के आदान-प्रदान के बाद आखिर राजस्थान के गवर्नर कलराज मिश्र विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राजी हो गए हैं। उन्होंने 14 अगस्त से सत्र को बुलाने की अनुमति दी है।

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि “कैबिनेट द्वारा भेजे गए नये प्रस्ताव पर मैं सदन को 14, अगस्त, 2020 से बुला रहा हूं।” उन्होंने सत्र को देरी से बुलाने के लिए कैबिनेट को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वह “इस महामारी और अप्रत्याशित राजनीतिक परिस्थितियों के दौर में सरकार इतनी संक्षिप्त नोटिस पर नियमित सत्र क्यों बुलाना चाहती थी उसके कारणों की व्याख्या नहीं कर पा रही थी। ”

इसके पहले शाम को राज्य सरकार ने असेंबली सत्र बुलाने के लिए 21 दिन पहले नोटिस भेजने के गवर्नर के निर्देशों को पूरा करते हुए 14 अगस्त से सत्र बुलाये जाने के नये प्रस्ताव को राजभवन भेजा।

कानून और संसदीय कार्यमंत्री शांति कुमार धारीवाल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार ने 14 अगस्त की नई तारीख को चुना जो 23 जुलाई से गिनती करने पर पूरा होता है। उन्होंने कहा कि “हमारा पहला प्रस्ताव 23 जुलाई को राज्यपाल के पास गया था।”

राजभवन के प्रवक्ता लोकेश चंद्र शर्मा ने कैबिनेट की संस्तुति पर गवर्नर की मुहर लगाने की पुष्टि की है।

बुधवार को सुबह राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा था कि उनके द्वारा उठाए गए सवालों का गहलोत सरकार ने साफ और तार्किक जवाब नहीं दिया था। और इस तरह से विधानसभा सत्र के बुलाने के एक हफ्ते के भीतर कैबिनेट की इस तीसरी सलाह को उन्होंने ठुकरा दिया था। वह सत्र बुलाने के लिए 21 दिन पहले नोटिस दिए जाने की अपनी शर्त पर कायम रहे।

इसके साथ ही राज्यपाल ने यह भी कहा कि रेसार्ट में रखे गए विधायकों की स्वतंत्र इच्छा को सुनिश्चित करने की सदन के अंदर और बाहर उनकी जिम्मेदारी है।

गवर्नर ने बुधवार की सुबह सरकार से कहा था कि “क्योंकि पिछले एक महीने में एक्टिव कोविड-19 मामलों की संख्या राज्य में तीन गुना बढ़ गयी है। तो फिर 1200 लोगों के जीवन को बगैर किसी कारण पर क्यों खतरे में डालना चाहते हैं। जबकि ऐसी कोई विशिष्ट परिस्थिति मौजूद नहीं है।“

राजभवन से नोट हासिल करने के बाद गहलोत ने कहा कि “आज भी हमें बताया गया कि हम इसे 21 दिन में बुला सकते हैं……प्रेम पत्र आ चुका है, और अब हम उनके (राज्यपाल) साथ चाय पीने जा रहे हैं। के भाई आपने प्रेम पत्र तीसरी बार भेज दिया। आप चाहते क्या हैं?” वह पार्टी दफ्तर में आयोजित एक समारोह में विधायकों से बात कर रहे थे जहां गोविंद सिंह दोतसरा ने औपचारिक तौर पर कांग्रेस का अध्यक्ष पद ग्रहण किया।

उसके बाद दिन में गहलोत राजभवन गए और फिर शाम को उन्होंने कैबिनेट की बैठक की। दिन में स्पीकर जोशी ने भी गवर्नर से मुलाकात की थी। सूत्रों का कहना है कि गतिरोध को तोड़ने के लिए ये दोनों बैठकें बेहद अहम थीं।

इसके पहले सुबह गवर्नर ने सरकार के साथ हुए संवाद में अपने तीन मुद्दों को उठाया था: अर्जेंट नोटिस पर सदन में शक्ति परीक्षण विधानसभा का सत्र बुलाने का एक कारण हो सकता है। नहीं तो सरकार को साफ-साफ 21 दिन की नोटिस देनी चाहिए और सामान्य परिस्थितियों में यही नियम है। और कोविड -19 की महामारी को देखते हुए सरकार को सुरक्षा के प्रोटोकाल के बारे में विस्तार से बताना चाहिए।

उन्होंने इस सिलसिले में राजस्थान विधान सभा के बिजनेस को चलाने के लिए रूल्स ऑफ प्रोसीजर के सेक्शन 3(2) का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि सामान्य तौर पर तारीख फिक्स होने से 21 दिन पहले नोटिस जारी किया जाना चाहिए। और ऐसी परिस्थिति जबकि संक्षिप्त नोटिस पर सत्र बुलाया जाना हो तो सेक्रेटरी को स्पीकर के निर्देश पर विधानसभा की बैठक बुलाने की तारीख, समय और स्थान सदस्यों को बताना होगा।

राजभवन के मुताबिक नियम इस बात को बिल्कुल साफ कर देते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में सत्र को बुलाने के लिए 21 दिन की नोटिस जरूरी है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जब सरकार संक्षिप्त नोटिस पर सत्र बुलाने के पीछे के कारणों को नहीं बताना चाहती है तब इसे वास्तव में 21 दिनों के नोटिस की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

गवर्नर के दफ्तर ने कहा कि “संक्षिप्त नोटिस पर सत्र बुलाने के पीछे के कारणों के बारे में पूछे जाने पर सरकार ने कहा था कि गवर्नर कैबिनेट की संस्तुतियों को मानने के लिए बाध्य है और यह कि उसे कारण जानने का कोई अधिकार नहीं है।”

इस पर धारीवाल ने कहा कि “हम लोगों ने मोटा-मोटी उन बातों को लिस्ट कर दिया था जिन पर हमें बातचीत करनी थी: जिसमें कोरोना वायरस, बिजली, पानी और कुछ दूसरे कानूनी काम शामिल थे।“ और इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर सरकार की लाइन को दोहराया कि हाउस का एजेंडा तय करने का अधिकार बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) के पास होता है। सप्ताह में चौथे प्रस्ताव को आखिर गवर्नर ने स्वीकार कर लिया। जिसमें अभी भी फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं किया गया है।

कोविड को देखते हुए विधानसभा सत्र बुलाने के लिए सुरक्षा के प्रोटोकाल संबंधी गवर्नर की चिंता पर धारीवाल ने कहा कि “यह स्पीकर का विशेषाधिकार है। वह पहले ही उनसे (गवर्नर) मिल चुके हैं”।

गवर्नर ने कहा था कि “रूल के मुताबिक विधानसभा के सत्र को बुलाने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है।” उसके आगे उन्होंने कहा कि “संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों की आत्मा है”। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की भी घोषणा की कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन द्वारा आयोजित किए जाने वाला एट होम इस साल नहीं होगा।

दोपहर में पार्टी दफ्तर पर गहलोत ने 15 दिनों तक फेयरमांट में बने रहने और किसी भी प्रलोभन में न आने पर अपने विधायकों की जमकर तारीफ की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “इतिहास बन रहा है….यह 21 दिन में हो या कि 31, हम जीतेंगे।”

उन्होंने कहा कि “राज्य और देश गवर्नर से पूछ रहे हैं कि विधानसभा बुलाने में तुम क्यों बाधा बने हुए हो। यह किसी के भी समझ से बाहर है।“

बागी विधायकों को एक संदेश में गहलोत ने कहा कि जिन्होंने धोखा दिया है वो हाईकमान से माफी मांग लें और पार्टी हाईकमान का जो भी फैसला होगा वह हमारे लिए स्वीकार्य होगा।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on July 30, 2020 7:01 am

Share