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Thursday, August 5, 2021

‘शो ऑफ इवेंट’ से मोदी ने बना दिया स्वैच्छिक योग को मार्केट का माल

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भारत का हजारों बरस प्राचीन योगाभ्यास ‘शो ऑफ‘ के लिए नहीं है। ये इस शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया में शामिल लोगों के ‘शो इन‘ के लिए है। लेकिन, उफ ये लेकिन! भारत के प्रधानमंत्री पद पर सात बरस से विराजमान श्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ही नहीं बल्कि उसके समर्थक बाजारू ताकतों ने भी मिलकर इसे वैश्विक व्यापार में बदल दिया है। यही कारण है कि मोदी जी के आह्वान पर आज सोमवार 21 जून, 2021 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश भर में पसरी कोरोना कोविड 19 महामारी के बावजूद लाखों लोगों ने सरेआम योगासन के तमाशे में भागीदारी की। लेकिन उफ ये लेकिन ! ये भी सत्य है कि ‘इंडिया दैट इज भारत‘ में करोड़ों लोगों ने छुप कर भी कोई योगाभ्यास नहीं किए।

कलकत्ता विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर और संस्कृत–हिन्दी के विद्वान जगदीश्वर चतुर्वेदी दो टूक कहते हैं कि दरअसल, योग अब आसन नहीं रह गया है। ये अब शासन की क्रिया बन गई है।

सोशल मीडिया पर भारत में प्रतिबंध लगाने के लिए आतुर लगते मोदी ने खुद सुबह-सुबह ट्वीट कर आज के दिन के ‘माहात्म्य‘ और उसमें उनके व्यक्तिगत योगदान का बखान किया।

उनका ट्वीट है: 21 जून को हम 7वां योग दिवस मनाएंगे। इस वर्ष का विषय ‘योग फॉर वेलनेस’ है, जो शारीरिक और मानसिक कल्याण के लिए योग का अभ्यास करने पर केंद्रित है।

मोदी जी के मुताबिक उनकी ही पहलकदमी के फलस्वरूप 21 जून 2015 को विश्व में पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया जिसमें करीब 84 देशों के लोगों ने योग के 21 आसन किए थे।

मोदी जी ने ये ट्वीट पोस्ट करने के बाद आज सुबह करीब साढ़े छह बजे योग दिवस राष्ट्रीय कार्यक्रम को वर्चुअल रूप से संबोधित कर कहा कि योग ने मौजूदा कोरोना काल में स्वस्थ रहने में अहम भूमिका निभाई है।

कार्टून : गोकुला वर्धाराजन

‘हड़बड़ गड़बड़ गोदी मीडिया‘ से मोदी सरकार की तरफ से बयान जारी कर बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले महीने ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो और श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को अलग-अलग पत्र भेज कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने में उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

मोदी जी ने राष्ट्रपति राजपक्षे को लिखे पत्र में श्रीलंका में पिछले सात बरस से लगातार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह आयोजित करने के लिए भी खास तौर पर आभार व्यक्त किया।  

मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति बोल्सनारो को भेजे अलग पत्र में उल्लेख किया कि उनके प्रधानमंत्री बन जाने के बाद ही 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की सार्वभौमिक अपील जारी की गई ।

सरकारी बयानों में ये भी बताया गया कि मोदी सरकार में खेल एवं आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मौके पर देश के नौ राज्यों में 25 ‘फिट इंडिया‘ योग केंद्र शुरू करने की घोषणा की है।

मन-की-बात-आसन (मंकी बात) – 2016 क्लिक : एस सिंह

रिजिजू जी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को ही भविष्यवाणी कर दी कि ये नए केंद्र, लोगों को योग को ‘ फिट जीवन ‘ के तरीके अपनाने ने महती भूमिका निभाएंगे ।  

आयुष मंत्रालय के बयान के मुताबिक सभी सरकारी दूरदर्शन चैनलों पर सुबह 6:30 बजे शुरू इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री किरन रिजिजू का संबोधन और ‘मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ‘ के योगाभ्यास का ‘ लाईव ‘ प्रसारण भी हुआ।

बयान में दावा किया गया कि लोगों को कोरोना महामारी के अनुभवों ने स्वास्थ्य के लिए योग के फायदे के बारे में और भी अधिक जागरूक बना दिया है। इस अनुभव को आयुष मंत्रालय ने अपने प्रचार प्रयासों में ‘ विधिवत समायोजित ‘ किया है। कोविड-19 पर मंत्रालय की सलाह की बदौलत लोगों के बीच नियमित योगाभ्यास से इस महामारी से निपटने के लिए आवश्यक प्रतिरक्षण को बढ़ावा मिला है।

मंत्रालय के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों से आई रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि कोविड-19 मरीजों के इलाज में सहायक प्रक्रियाओं के रूप में कई अस्पतालों में योग अभ्यासों को सफलतापूर्वक शामिल किया गया है और योग इस बीमारी से तेजी से ठीक होने में अपना योगदान देता है।

जवाहरलाल नेहरू

ये बात साफ हो जानी चाहिए कि मोदी जी से बहुत पहले स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नित दिन योगाभ्यास किया करते थे। इस आलेख में संलग्न एक तस्वीर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या से कुछ पहले की है। इसमें पंडित नेहरू उन्हें बतौर प्रधानमंत्री आवंटित तीन मूर्ति भवन, नई दिल्ली में सुबह के समय शीर्षासन कर रहे हैं। तस्वीर के पार्श्व में महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी भी हैं जो पंडित नेहरू का घर संभालती थीं ।

हम जानते हैं कि मोदी जी भारत की लगभग हर समस्या के लिए पंडित नेहरू को दोषी बताने से नहीं थकते। मोदी सरकार के दुष्प्रचार ने बहुत सारे लोगों के दिमाग में इतना जहर भर दिया है। इतना जहर कि वे मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं कि पंडित नेहरू योगाभ्यास भी किया करते थे और उसमें भी वो शीर्षासन जो सबसे कठिन आसन है।

हमने अपने एक सूत्र से हासिल ये तस्वीर 2016 में फेसबुक पर शेयर कर मित्रों से जानना चाहा था कहीं यह फ़ोटोशॉप तो नहीं है।

नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के दो पूर्व छात्र मित्रों में से शिक्षाविद मोहन क्षोत्रिय (जयपुर) और वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप कुमार (नई दिल्ली) ने पुष्टि की ये फ़ोटोशॉप नहीं है।

रांची (झारखंड) के एलोपैथिक चिकित्सक डॉक्टर राजचंद्र झा की टिप्पणी थी : अब ‘ट्रोल आर्मी‘ इस फोटोग्राफ को ही फेक साबित कर देगी।

मुझे कहना पड़ा: ट्रोल आर्मी मन मार के ही सही हमसे सोशल मीडिया पर पंगे नहीं लेती है। वो इस फोटो के खिलाफ 1948 से अब तक कुछ भी नहीं कर सके हैं। अब क्या कर लेंगे?

जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे प्रो जगदीश्वर चतुर्वेदी का कहना है :पहले योग ज्ञान का अंग था। इन दिनों उपभोग का हिस्सा है। योग आसन था। अब योग शासन और मुनाफा है। यह योग के महापतन की सूचना है। मैं बाबा रामदेव और मोदी जी से बहुत ख़ुश हूँ कि उन्होंने योग को ‘ग्लोबल ब्राण्ड‘ बना दिया। पूँजीवादी विरेचन का हिस्सा बना दिया। उसे एक माल बना दिया। योग आज कारपोरेट मुनाफा संस्कृति का एक आकर्षक माल है। हम इस प्रश्न पर विचार करें कि योग के वस्तुकरण से हिंदू परंपरा का लाभ हुआ या नुकसान? योग करने के कई फ़ायदे हैं जिनको ‘योगीजन‘ टीवी पर बता रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा फ़ायदा है कि वह अब सरकारी फ़ैशन, वोट पाने का नारा, सरकारी जनसंपर्क और सरकारी जुगाड़ का अंग बन गया है। पहले योग स्वैच्छिक था, आज माल है।

बहरहाल, ये तो तथ्य है कि योग के प्रचार और इवेंट पर जितना धन खर्च किया जा रहा है उतना स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मद में किया जाता तो देश का ज्यादा भला होता। पिछले सात बरस की तरह इस बरस भी मोदी जी के ‘योग इवेंट‘ ने भारी धनराशि बाजार के कर्ताधर्ताओं की तिजोरी में पहुँचा दी है।

(चंद्रप्रकाश झा स्वतंत्र पत्रकार और लेखक हैं।)

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