Sunday, May 22, 2022

जहां भी रहीं आईएएस पूजा सिंघल ने भ्रष्टाचार किया

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रांची। महज 21 साल की सबसे कम उम्र में यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बनने वाली पूजा सिंघल का नाम जब लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ होगा, तब शायद ही किसी को लगा होगा कि यह नाम आगे जाकर भ्रष्ट अधिकारी के रिकॉर्ड्स में भी दर्ज होगा।

झारखंड सरकार की खनन सचिव पूजा सिंघल इन दिनों पूरे देश में सुर्खियों में इसलिए हैं कि देशभर के 5 राज्‍यों और उनसे संबंधित 25 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय, ईडी द्वारा की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में अकूत सम्पत्ति का खुलासा हुआ है, खासकर उनके सीए सुमन कुमार सिंह के घर में अघोषित खजाना मिला है। 

बावजूद इसके इस पूरे मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि तीन दिनों तक चली कार्रवाई के बाद भी ईडी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वहीं इस मामले की केंद्र बिन्दु बनीं आईएएस पूजा सिंघल ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

दूसरी तरफ पूजा सिंघल से जुड़े स्थानों और लोगों पर ईडी की छापेमारी के बाद झारखंड में सियासत ने भी अलग मोड़ ले लिया है।  सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा विगत 8 मई को बीजेपी कार्यालय के समक्ष जुलूस निकालकर केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने उसी की शाम को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीए सुनील कुमार के बयान का वीडियो जारी करते हुए कहा कि यह जांच की जानी चाहिए कि उन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम लेने का दबाव कौन बना रहा है।

उन्होंने कहा कि पूजा सिंघल के यहां जिस मामले में छापेमारी की गई है, वह घोटाला बीजेपी की सरकार के वक़्त का है और बीजेपी की ही रघुवर दास सरकार ने उन्हें क्लीन चिट भी दी थी। ऐसे में हमारी सरकार को घेरने की कोशिशें नाकामयाब होंगी।

वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी की कार्रवाई को गीदड़ भभकी क़रार देकर भ्रष्टाचारियों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूजा सिंघल के पूरे कार्यकाल की जांच कराई जानी चाहिए।

 वहीं सीए सुनील कुमार के घर पर मिले करोड़ों के कैश की गिनती करती मशीनों का एक वीडियो और नोटों के बंडलों से एक आकृति बनाकर ईडी लिखा हुई एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि वह वीडियो या तस्वीर किसने उतारी थी। आश्चर्य की बात यह है कि फुटेज और तस्वीर वायरल होने के बाद भी ईडी अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

बता दें 6 मई, 2022 को पूजा सिंघल प्रकरण पर बगोदर के माले विधायक विनोद सिंह ने 2011 के मनरेगा में हुए घोटाले को लेकर अपने फेसबुक पर लिखा था। 

इस बाबत जब मैंने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि 2011 की बात है, जब मैं विधान सभा की एक कमेटी जिला परिषद पंचायती राज मनरेगा के मामलों का चेयरमैन था और अरूप चटर्जी सदस्य थे। हम मनरेगा के कार्यों की समीक्षा को लेकर जिलों के दौरे के क्रम में चतरा गए थे। इसी क्रम में जब हम रिपोर्ट देख रहे थे। मनरेगा में उस वक्त कुछ-कुछ नई चीजें आई थीं। हमने पूजा सिंघल के बारे में कुछ-कुछ सुन रखा था। लेकिन पाकुड़ में उन्हें अवार्ड मिला था। मैंने फाइल देखा तो पाया कि कार्य योजना के नाम पर मनरेगा में उन्होंने एक एनजीओ को एडवांस दिया था। जबकि मनरेगा में एडवांस का शुरू से ही कोई प्रावधान नहीं है। 

विनोद सिंह ने बताया कि फिर हमने देखा कि काम की तस्वीर नहीं है। हमें संदेह हुआ, हमने जिला प्रशासन से कहा कि आस-पास के गांव में कुछ काम दिखलाइए। कार्यस्थल सूची में जिला मुख्यालय के आसपास ही दो तीन गांव में काम का चयन हुआ था। 

हमने कहा चलिए जरा काम देखकर आते हैं। प्रशासन ने यह कहकर मना किया कि इलाका उग्रवाद प्रभावित है, अतः हम फोर्स नहीं दे पाएंगे। हमने कहा – कोई बात नहीं, जो होगा देखा जाएगा, चलिए काम देखते हैं। उनकी तरफ से कोई हरकत नहीं देखकर हम लोग खुद ही चल दिए। हमारे साथ स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान भी थे। हमने देखा कि हमारे पीछे प्रशासन के लोग भी हो लिए। 

जनार्दन पासवान ने भी शंका जतायी कि कुछ तो गड़बड़ झाला है। हमने गांव में पाया कि कोई काम हुआ ही नहीं है। जो कुछ काम हुआ भी था तो उस बाबत किसानों ने बताया कि एनजीओ के लोग आए थे और हमें पांच-पांच हजार रुपये दे गए और कहा कि कुंआ खोदवा दो, पैसा मिलेगा। हमने कुंआ खोदवाया, लेकिन बाकी का पैसा नहीं मिला और मजदूरों ने मजदूरी के लिए हम लोगों से मार-पीट कर दी। 

हमने देखा कि एक आदमी का सिर भी फट गया था। जबकि हमने फाइल में पाया था कि सभी योजना के नाम पर निकासी हो चुकी थी। मैंने लौटकर जिला प्रशासन से प्रतिवेदन मांगा और आकर हम सभी ने एक संक्षिप्त रिपोर्ट विधान सभा में दिया, ग्रामीण विकास विभाग को सौंपा, और एक उच्चस्तरीय जांच की मांग की। 

मैंने कहा कि इस पर उच्च निगरानी से विस्तृत जांच होनी चाहिए। यह प्रथम दृष्ट्या घोटाला लग रहा है। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी रही।

फिर हमने विधान सभा में सवाल किया। तो तत्कालीन मंत्री सुदेश महतो ने जवाब भी दिया। तब तक खूंटी का भी मामला आ चुका था। हमने खूंटी का मामला उठाया। वहां भी एनजीओ को बिना काम किये पैसै दे दिये गये थे। उस समय भी वहां की उपायुक्त पूजा सिंघल थीं, हमारे प्रश्न पर राम विनोद सिन्हा पर तो FIR हुई लेकिन वरीय अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। तब तक पलामू में भी क्रय में गड़बड़ी की शिकायत आई। जब मैंने खूंटी के मामले को भी उठाया और कहा मनरेगा में इतनी लूट कैसे है? तो नामधारी जी ने नाम पूछा तो मैंने बताया कि पूजा सिंघल हैं, जिसका यह कारनामा है, जो चतरा में और पलामू में भी थीं।

मैंने कहा कि ऐसे लोगों को सरकार को तत्काल निलम्बित कर देना चाहिए और उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। फिर मैंने दुबारा मामले को उठाया तो मेरे बार-बार के दबाव के बाद नितिन मदन कुलकर्णी जो हजारीबाग के उस वक्त कमिश्नर थे, को जांच का जिम्मा सौंपा गया। इसमें कोई दो मत नहीं कि कुलकर्णी ने काफी ईमानदारी से जांच की। उन्होंने जांच में पूजा सिंघल का पूरा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। 

इसके बाद मैं अपने विधायकी कार्यकाल 2011 से 2014 तक कई बार सवाल उठाया और सरकार से प्रश्न पूछा कि आयुक्त हजारीबाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? तो सरकार ने कहा कि कार्मिक विभाग समीक्षा कर रही है। 

मेरे सवालों को बार बार हो-हंगामा में टाला जाता रहा। लेकिन इतना जरूर हुआ कि मेरे विधायकी के कार्यकाल में पूजा सिंघल का प्रमोशन रूका रहा। 

मेरे 2014 के चुनाव हारने के बाद मैंने अरूप चटर्जी को कहा कि इस सवाल को उठाइए। उन्होंने भी सवाल उठाए। 2014 के बाद रघुवर दास की सरकार आई तो फिर से एक अलग जांच कमेटी बनाई गई ताकि नितिन मदन कुलकर्णी की जांच को खारिज किया जा सके और वही हुआ भी। कुलकर्णी की जांच को खारिज करके नई कमेटी ने पूजा को क्लीन चिट दे दिया।

एक सवाल के जवाब में विनोद सिंह आगे कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि केवल पूजा सिंघल भ्रष्ट हैं और दूसरे लोग भ्रष्ट नहीं हैं। यह सही है कि रघुवर दास सहित भाजपा सरकार में पूजा सिंघल को सबसे ज्यादा संरक्षण मिला है। 

विनोद आगे कहते हैं कि सबसे भ्रष्ट लोगों को सरकार सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती है और जब कभी कार्रवाई भी करती है तो अपने फायदे के लिए करती है। 

पैसे वालों के लिए ऐसी कार्रवाई का कोई मतलब नहीं होता है। पैसे जो मिले हैं, उन्हें वे कहीं ना कहीं दिखा देंगे। इसलिए होना यह चाहिए कि इनके द्वारा किए गए कार्यों की जांच हो। तब न पता चलेगा कि इन्होंने क्या क्या और कैसे कैसे किया। पैसा तो ये कहीं ना कहीं दिखा देंगे। कई कंपनी, भाई- भतीजा का दिखाकर इनकम टैक्स भर देंगे। एक महीना बाद सब लोग भूल जाएंगे।

इसलिए फाइल में जो गड़बड़ियां की जाती हैं उस पर जांच हो। यह ईडी तो करेगी नहीं, सरकार को ही करना है।

बताना जरूरी होगा कि पूजा सिंघल ने चतरा में उपायुक्त रहते हुए मनरेगा योजना से 2 एनजीओ को 6 करोड़ रुपये दिये थे। इस मामले में रघुवर सरकार के शासन काल में क्लीन चिट मिल गयी। वहीं खूंटी जिले में उपायुक्त रहने के दौरान मनरेगा में 16 करोड़ रुपये के घोटाले में उनका नाम आया, जिस मामले की जांच अभी ईडी कर रही है। इससे पहले पलामू में उपायुक्त रहने के दौरान पूजा सिंघल पर उषा मार्टिन ग्रुप को कठौतिया कोल ब्लॉक आवंटन में नियमों की अनदेखी का आरोप लगा है। इस तरह से उनका नाम कई तरह की अनियमिताओं के मामलों में सामने आया।

जबकि साल 2006 में उपायुक्त (डीसी) के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग पाकुड़ में हुई। इस दौरान मनरेगा के तहत बेहतर कार्य प्रबंधन और रोजगार सृजन के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। वे झारखंड के उन गिने-चुने आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें ‘पीएम अवॉर्ड फार एक्सीलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ मिल चुका है। अतः वर्तमान मामलों को देखें तो साफ हो जाता है कि पूजा सिंघल का सत्ता के गलियारे में कितनी गहरी पैठ है।

बता दें 2006 में भाजपा के अर्जुन मुंडा की सरकार थी। कहना ना होगा कि अगर पूरी ईमानदारी से पूजा सिंघल प्रकरण की जांच की जाए तो सत्ता के गलियारे के काफी बड़े बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे, चाहे वे भाजपा के चेहरे हों या जेएमएम के। 

उल्लेखनीय है कि पाकुड़, चतरा, लोहरदग्गा, खूंटी और पलामू ज़िलों की उपायुक्त (डीसी) रह चुकीं पूजा सिंघल कई महत्वपूर्ण पदों को भी संभाल चुकी हैं। इस दौरान सभी मुख्यमंत्रियों से उनके अच्छे संबंध रहे हैं।

पूजा सिंघल देहरादून में पैदा हुईं, गढ़वाल विश्वविद्यालय से स्नातक कीं और 21 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में वर्ष 2000 में वो आईएएस बन गईं।

खबर के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय को आईएएस पूजा सिंघल के ठिकाने पर छापेमारी में एक अहम डायरी हाथ लगी है। जिसमें मनी लांड्रिंग के जरिये किए गए पैसों के लेनदेन का पूरा ब्‍योरा दर्ज है। रिपोर्ट है कि इस डायरी में कई मंत्री, नेता, आईएएस, विधायक और पत्रकारों के नाम व उनके मोबाइल नंबर दर्ज हैं। संभव है कि जांच आगे बढ़ने पर ईडी डायरी में जिक्र किए गए लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। इस डायरी में पैसे के लेनदेन और निवेश संबंधी अहम व गोपनीय जानकारी लिखी गई है।

सूत्र बताते हैं कि इन तमाम हालातों के बाद भी ईडी कुछ नहीं करेगी और संभवतः अंत में मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया जाएगा। सीबीआई जैसा चाहेगी जांच की दिशा को उसी दिशा में ले जाएगी। मतलब यह कि अगर ऐसा होता है तो इस प्रकरण से अंततः राजनीतिक लाभ किसे होगा यह सीबीआई की जांच के बाद तय हो पाएगा। दूसरी जो सबसे अहम बात है वह यह है कि अगर उपर्युक्त तथ्य सही साबित होते हैं तो साफ जाहिर हो जाता है कि पूजा सिंघल प्रकरण पूरी तरह प्रायोजित है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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