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भोपाल: कोवैक्सीन लेने वाले वॉलंटियर की मौत, कंपनी ने दी सफाई

भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में 12 दिसंबर को कोवैक्सीन का ट्रायल वैक्सीन लगवाने वाले 42 वर्षीय वॉलंटियर दीपक मरावी की 21 दिसंबर को मौत हो गई। दीपक ने कोरोना वैक्सीन ट्रायल में हिस्सा लिया था। पहले डोज के बाद ही तबियत खराब हो गई और अस्पताल पहुंचने से पहले दीपक की मौत हो गई। दीपक अपने घर में मृत मिले थे। 22 दिसंबर को उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में शव में जहर मिलने की पुष्टि हुई है। बता दें कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत बायोटेक की कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन का ट्रायल 7 जनवरी को पूरा हुआ था।  इस ट्रायल में हिस्सा लेने वाले 42  वर्षीय दीपक मरावी मजदूरी करते थे और टीला जमालपुरा की सूबेदार कॉलोनी में किराये के एक कमरे में तीन बच्चों के साथ रहते थे।

मरहूम के परिवार ने वैक्सीन पर उठाया सवाल

अब मरहूम दीपक मरावी के परिवार ने कोविड वैक्सीन को लेकर सवाल खड़ा कर दिये हैं। मरहूम दीपक मरावी के 18 वर्षीय बेटे आकाश मरावी ने शुक्रवार को पिता की मौत की जानकारी दी। हालांकि, मौत कोवैक्सीन का टीका लगवाने से हुई या किसी अन्य कारण से इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद होगी। दीपक के शव का विसरा पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस विसरे का केमिकल एनालिसिस कराएगी। फिलहाल, पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

मरहूम के बेटे आकाश ने मीडिया में बताया है कि उसके पिता दीपक मरावी को 19 दिसंबर को अचानक घबराहट, बेचैनी, जी मिचलाने के साथ उल्टियां होने लगी। लेकिन उन्होंने इसे सामान्य बीमारी समझ कर उसका कहीं इलाज नहीं कराया। आकाश के मुताबिक, डोज लगवाने के बाद से पिता ने मजदूरी पर जाना बंद कर दिया था। पापा कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे। पिताजी की सेहत 19 दिसंबर को बिगड़ी थी। आकाश के मुताबिक उसने पिता को अस्पताल चलने को कहा था, लेकिन वे नहीं माने। 21 दिसंबर को जब उनका निधन हुआ, तब वे घर में अकेले थे। और वीबी काम से बाहर गई थी और छोटा बेटा बाहर खेल रहा था। हमने मौत की सूचना उसी दिन पीपुल्स कॉलेज को भेज दी थी। अगले दिन सुभाष नगर विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया था।

आकाश ने आगे बताया कि डोज लगवाने के बाद सेहत का हाल जानने अस्पताल से फोन आते रहे। 21 दिसंबर को पिताजी के निधन की जानकारी लेने पीपुल्स प्रबंधन से तीन बार फोन आए। लेकिन संस्थान से कोई भी मिलने नहीं आया। पिता दीपक मरावी भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित भी थे। आकाश के मुताबिक पीपुल्स मेडिकल कॉलेज की थर्ड फेज क्लीनिकल ट्रायल टीम ने शुक्रवार दोपहर को दीपक के मोबाइल फोन पर वैक्सीन के दूसरे डोज के लिए फोन किया। यह कॉल आकाश ने रिसीव किया। उन्होंने टीम को पिता के निधन की फिर से सूचना दी। इसके बाद एग्जीक्यूटिव ने कॉल डिसकनेक्ट कर दिया।

भारत बायोटेक की सफाई

वहीं इस मसले पर कोविड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने सफाई देते हुए कहा है कि ट्रायल के दौरान सभी प्रक्रियाओं का सही से पालन किया गया और टीका लगने के अगले सात दिनों तक वॉलंटियर की निगरानी भी की गई थी।

बयान में बायोटेक ने कहा है- “रजिस्ट्रेशन के वक्त वॉलंटियर ने तीसरे चरण से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को पूरा किया था और टीका लेने के अगले सात दिनों तक उसके सेहत पर निगरानी रखी गई थी। इस दौरान उसके साथ किसी भी तरह की कोई परेशानी सामने नहीं आई।” कोवैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक कंपनी ने आगे अपने बयान में कहा कि “भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज द्वारा जारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि यह आशंका जताई गई है कि वॉलंटियर की मौत जहर की वजह से हुई है।”

वहीं, मध्य प्रदेश मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. अशोक शर्मा ने मीडिया में जानकारी दी है कि 22 दिसंबर को पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के अनुसार प्रारंभिक जांच में दीपक के शरीर में जहर की पुष्टि हुई है। मौत कोवैक्सीन का टीका लगवाने से हुई या किसी अन्य कारण से, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद होगी। दीपक के शव का विसरा पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस विसरे का केमिकल परीक्षण कराएगी। बता दें कि भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा बनाई गई स्वदेशी कोरोना वैक्सीन (कोवैक्सीन) का 7 जनवरी को अंतिम ट्रायल पूरा हुआ है।

वहीं डॉ. राजेश कपूर ने दावा किया है कि वैक्सीन ट्रायल दीपक मरावी की मर्जी के बाद ही हुआ। साथ ही ट्रायल के दौरान अस्पताल ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया। 21 दिसंबर को दीपक की मौत के बाद हमने भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल और वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक को घटना की सूचना दी थी। वैक्सीन लगाने के बाद आधे घंटे तक दीपक का परीक्षण भी किया गया था। और सात से आठ दिन तक दीपक के स्वास्थ्य का ध्यान भी रखा गया था।

इस बीच भोपाल स्थित गांधी चिकित्सा महाविद्यालय की ओर से एक जांच समिति गठित की गयी। 6 सदस्यों की इस समिति ने आनन-फानन में अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी है। जिसमें कहा गया है कि मरावी के मामले में सभी प्रोटोकाल का पालन किया गया है। और उसमें किसी तरह की खामी नहीं पायी गयी है। वैक्सीन जैसे गंभीर मामले में जिसमें कि एक शख्स की मौत हो चुकी है इस तरह से जल्दबाजी में की गयी जांच का भला क्या औचित्य हो सकता है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on January 9, 2021 10:24 pm

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