Sunday, October 24, 2021

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बैटल ऑफ बंगाल: तृणमूल और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू-आईशी घोष

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पिछले साल 5 जनवरी को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में हुई दो गुटों के बीच झड़प के बाद एक नाम राष्ट्रीय स्तर पर सामने आया, वह नाम है जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष। पश्चिम बंगाल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में घोष संयुक्त मोर्चा की तरफ से जामुड़िया में माकपा की प्रत्याशी हैं। जामुड़िया में वह चुनाव प्रचार करते हुए डोर-टू-डोर लोगों से मिल रही हैं। इस दौरान आईशी घोष से बंगाल में चल रही राजनीतिक उठापटक और उससे जुड़े चुनावी मुद्दों पर स्वतंत्र पत्रकार पूनम मसीह ने विस्तार से बातचीत की। पेश है उनकी पूरी बातचीत-

प्रश्न –आप जेएनयू की पहली महिला छात्र संघ अध्यक्ष हैं जिसे अध्यक्ष रहते हुए एमएलए का टिकट मिला है। इसके लिए आप कितनी तैयार हैं?

उत्तर– तैयारी तो पूरी है। हमारे हजारों कैडर हर दिन ग्रांउड पर इस लड़ाई को लड़ रहे हैं। वह रोज लोगों से मिल रहे हैं। उनकी परेशानियों को सुन रहे हैं। मैं इस लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हूं। हाँ, अंतर बस इतना है इससे पहले मैंने विश्वविद्यालय में लड़ाई लड़ी है। यहां क्षेत्र थोड़ा बड़ा है। वहां हम स्टूडेंट्स के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। यहां जनता को उसका हक दिलाने की लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया है।

प्रश्न – जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र में आप लगातार लोगों से मिल रही हैं। ऐसे में जनता की कौन सी समस्या है जो अक्सर सुनने की मिल रही है?

उत्तर- मैं अपने क्षेत्र में रोज लोगों से मिल रही हूँ। ज्यादातर लोगों से जब बात होती है तो वह शारदा चिटफंड का जिक्र करते हैं। गरीब लोग मेरे सामने डायक्यूमेंट लेकर आते हैं। जहां उनके पैसे लूट लिए गए हैं। यह सब देखकर बहुत दुःख होता है। जिस राजनीति को लोगों की सेवा करनी चाहिए थी। ताकि जनता का जीवन कुछ बेहतर हो आज वही राजनीति एक पर्सनल एजेंडा का स्पेस बन चुकी है। लाल झंडा जनता की हक की लड़ाई लड़ रहा है और आगे भी लड़ता रहेगा। साथ ही राजनीति की परिभाषा में समय के साथ जनपक्ष की जगह एक विशेष पक्ष में काम करने का जो चलन आया हैं उसे भी हमारे यूथ बिग्रेड बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आम लोगों में जन राजनीति की खोई हुई साख को दोबारा वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं ।

प्रश्न – जामुड़िया विधानसभा में आपकी लड़ाई सीधे तौर पर तापस राय से है। यहाँ भाजपा के कार्यकर्ता उनका विरोध कर रहे हैं। इस बारे में आपका क्या कहना है?

उत्तर- हम इस बात में समय नहीं बर्बाद कर रहे हैं कि कौन क्या कर रहा हैं। जनता सब जानती है। वह सभी चीजों को एक लम्बे समय से देखते आ रही हैं और समय आने पर वो मताधिकार का प्रयोग करते हुए अपना निर्णय देगी। लोग खुद बताते हैं किसी भी प्रशासनिक काम को करवाने के लिए रिश्वत देना पड़ता है। पंचायत चुनाव के दौरान वोटों की लूट हो रही है। गांव में रहने वाले ज्यादातर लोग इन परेशानियों से आए दिन दो चार होना पड़ता हैं।

प्रश्न – आप अपने प्रचार के दौरान जामुड़िया में बंद पड़े कारखानों और कोयला खदानों का ज़िक्र करती हैं जबकि पिछले 44 साल से जामुड़िया पर वामपंथी दलों का राज रहा है। आपको नहीं लगता इस पर चर्चा पहले होनी चाहिए थी?

उत्तर- इन सारी बातों पर लगातार बात हो रही है। ऐसा नहीं है कि आज चुनाव है, इसलिए इन सभी मुद्दों पर बात की जा रही है। बल्कि इन सभी विषयों पर लगातार चर्चा होती रही है। हमारा संकल्प ऊपर के लोगों के हिसाब से नहीं बल्कि निचले तबके के लोगों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसलिए हमें पता है लोग क्या चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि इस पर चर्चा अभी हो रही है। जब मैं आई थी तो मेरी मुलाकात स्टील प्लांट में काम करने वाले कामगार से हुई थी। लोगों का कहना है कि सीआईटीयू ने प्रशासन से लड़ाई लड़ वेतन में वृद्धि करवाई है। आज जो मेहनताना दिया जा रहा हैं वो तृणमूल के शासन में उन्हें नहीं दिया जा रहा था। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात वाम  सरकार के शासनकाल में जामुड़िया को इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जा रहा था। यहां वीडियोकोन और रेशमी जैसे कारखानों को स्थापित किया जा रहा था। लेकिन तृणमूल ने इस पर रोक लगा दी। जिसका सीधा असर जनता पर पड़ा रहा है।

प्रश्न – वाम के एक हिस्से का कहना है कि हमारी लड़ाई भाजपा से है। कुछ का कहना है कि कांटे की टक्कर तृणमूल से है। ऐसे में लड़ाई को लेकर पार्टी में इतना मतभेद क्यों है?

उत्तर- हमारी लड़ाई बीजेपी की सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ है। लेकिन यहां देखने वाली बात यह है कि बंगाल में तृणमूल को हराए बगैर हम बीजेपी को मात नहीं दे सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां तृणमूल भी वही कर रही है जो बीजेपी सत्ता में आने के बाद से करती आ रही है। देखा जाता है लोगों ने बीजेपी को हराने के लिए तृणमूल को वोट किया था, लेकिन  चुनाव जीतने के कुछ महीने के बाद ही वह सभी लोग बीजेपी में शामिल हो जा रहे हैं। ऐसे में जरुरी है कि पहले तृणमूल को हराया जाए।

प्रश्न – आप भाजपा को बंगाल में किस तौर पर देखती हैं?

उत्तर– मैं बीजेपी को बाहरी और भीतरी पार्टी के तौर पर नहीं देख रही हूं। बीजेपी और आरएसएस एक साम्प्रदायिक ताकत है। इसलिए हम लोगों का एक ही मकसद है। साम्प्रदायिकता फैलाने वाले दल को पश्चिम बंगाल में जीतने से रोकना।

प्रश्न – पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी स्वयं चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को रोजगार देने की बात कर रहे हैं। इस बारे में आपका क्या कहना है?

उत्तर- केन्द्र में सात साल से बीजेपी की सरकार है। पहले भी लोगों को रोजगार का प्रलोभन दिया गया है। लेकिन कितने लोगों को नौकरी मिली है। रोजगार देने के लिए बीजेपी बंगाल ही क्यों आ रही है जबकि जहां उनकी सरकार है वहां नौजवान नौकरियों को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। लोग इनके जुमलों को समझ चुके हैं इसलिए अब इनके झांसे में नहीं आने वाली जनता। इसका सीधा असर पश्चिम बंगाल चुनाव में देखने को मिलेगा।

प्रश्न – जेएनयू छात्रसंघ चुनाव डिबेट में आप महिलाओं के हक दिलाने की बात कर रही थीं। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने के लिए क्या आप किसी उद्योग का सृजन करेंगी। जो सिर्फ महिलाओं के लिए हो?

उत्तर- हां जरुर, महिलाओं का आर्थिक रुप से मजबूत होना बहुत जरुरी है। मैंने खुद यहां देखा है कि महिलाएं लोगों के घरों में या फिर कोयला खदान में काम करती हैं। गांव में बहुत सारी लड़कियां ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं लेकिन यहां उद्योग न होने के कारण उन्हें पैसों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए हमारा संकल्प है कि कुछ ऐसे उद्योग-धंधों का सृजन किया जाएगा जो महिलाओं की आर्थिक स्थिति को अच्छा करें।

प्रश्न – संयुक्त मोर्चा के गठबंधन में वाम पार्टी ने इस बार युवाओं को मौका दिया है। आपको क्या लगता है दीदी के ‘खेला होबे’ को ये युवा ब्रिगेड बिगाड़ सकती है?

उत्तर- माकपा के प्रत्यशियों द्वारा लगातार लोगों से जनसंपर्क कर संवाद कर हैं। यहां तृणमूल ने राजनीति को एक सिरे से खेल बना दिया है। हमारे कैडर के लोग जनता से मिल रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि राजनीति जनता के हित में होना चाहिए, न कि किसी नेता के निजी स्वार्थ के लिए के लिए इसमे कोई जगह है। जनता इस खेल को समझ चुकी है। इसलिए इस बार युवा बिग्रेड फिर से बंगाल में वापसी करने जा रहा है। एक बार फिर लोग वाम पर अपना भरोसा दिखा रहे हैं।

प्रश्न- ममता दीदी ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कन्याश्री योजना चलाई, बच्चों को साईकल दिया गया। लेकिन आपको नहीं लगता कक्षा आठ तक सभी बच्चों को पास कर देना उनके भविष्य को खराब कर रहा है? अगर आप यहां से जीत कर विधानसभा जाती हैं तो क्या इस मुद्दे को वहां उठाएंगी?

उत्तर- हां, इसी प्रणाली ने बच्चों के बेस को कमजोर कर दिया है। जबकि माकपा सरकार के दौरान पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाता था। पास-फेल की पद्धति द्वारा बच्चों की क्षमताओं को आका जा सकता है। बाकी शिक्षा व्यवस्था की बात की जाए तो पूरे बंगाल में ही शिक्षा के स्तर में बहुत कमी आई है। सरकारी स्कूल की स्थिति देखी जाए तो एक क्लास में लगभग सौ बच्चे पढ़ रहे हैं। जहां एक ही टीचर बच्चों को सभी विषय पढ़ा रही है। गांव में कई सारे सरकारी स्कूल बंद हैं। ऐसे में अब जरुरी हो गया है कि इन सारे मुद्दों को उठाया जाए, ताकि बंगाल में शिक्षा के स्तर को अच्छा किया जा सके।

प्रश्न – आपके चुनावी क्षेत्र में एक भी कॉलेज नहीं है और आपको नहीं लगता जिस वाम ने शिक्षा की लड़ाई लड़ी है उसने अपने ही गढ़ को शिक्षा के मामले में मजबूती नहीं दी है?

उत्तर- चुरुलिया में एक महाविद्यालय है। लेकिन वह जामुड़िया से थोड़ा दूर है। साल 2011 से पहले यहां रानीगंज, इकड़ा होते हुए बसें चलती थीं लेकिन बाद में इन्हें बंद कर दिया गया। अब इसका सीधा असर स्टूडेंट्स की जिदंगी पर पड़ा रहा है। क्योंकि हर कोई दिल्ली या कोलकाता जा कर पढ़ नहीं सकता है। अब समय आ गया है कि इस मुद्दे पर काम किया जाए।

प्रश्न – अंतिम सवाल यह कि आपके सभी प्रतिद्वंद्वी आपसे ज्यादा अनुभवी हैं। आपके लिए यह लड़ाई आपके लिए कितनी कठिन है?

उत्तर- देखिए उम्र सिर्फ एक नंबर है। इसलिए यहां सीनियर, जूनियर की कोई बात नहीं हैं। वो अपना काम कर रहे हैं। मैं अपना काम कर रही हूँ। बाकी जनता सब जानती है। 26 अप्रैल को जनता माकपा को एक बार फिर विजयी बनाने जा रही है।

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