यूपी में जारी दलितों, आदिवासियों पर अत्याचार और मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ संगठनों ने निकाला मार्च

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लखनऊ में प्रदर्शन।

लखनऊ। प्रदेश में जारी दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों पर अत्याचार के खिलाफ बुधवार को लखनऊ में कई संगठनों ने मिलकर मार्च निकाला। सैकड़ों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम में लोगों ने अपने हाथों में सरकार विरोधी नारों के प्लेकार्ड ले रखे थे। मार्च में महिलाओं की तादाद सबसे ज्यादा थी। इस मौके पर हुई सभा में सभी वक्ताओं ने एक सुर में योगी सरकार की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि भय मुक्त प्रदेश का नारा देकर सत्ता में आई योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश को हिंसा का प्रदेश बना दिया है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था (ला एंड ऑर्डर) पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले छह महीने में प्रदेश में बच्चियों के साथ बलात्कार के 3, 457 मामले दर्ज हुए हैं। इन आकड़ों के मुताबिक बच्चियों पर हिंसा के मामले में प्रदेश अव्वल है।

इसी तरह अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हिंसा के मामले भी चिंतित करते हैं। हाल ही में सोनभद्र जिले में 10 आदिवासियों जिसमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं, की भूमाफियाओं द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस घटना ने जलियावाला बाग हत्याकांड की याद दिला दिया है।

इस मौके पर प्रदेश में भूमि आयोग गठित करने, सोनभद्र के आदिवासी किसानों को उनकी जमीन पर मालिकाना हक देने और नरसंहार के जिम्मेदार दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गयी। इसके साथ ही इस षड्यंत्र में शामिल सभी प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गयी।

शामिल संगठनों में एपवा, एडवा, महिला फेडरेशन, साझी दुनिया जागरूक नागरिक मंच, आली, एनएपीएम और राहुल फाउंडेशन प्रमुख थे।

कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख लोगों में रमेश दीक्षित, संदीप पांडेय, रूपरेखा वर्मा, वंदना मिश्रा, राकेश वेदा, अजय सिंह, किरण सिंह, नाइस हसन, अरुधंति धुरु, राजीव यादव व कौशल किशोर आदि प्रमुख लोग थे।

आदिवासियों, महिलाओ , दलितों व अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले व भीड़ हत्या के खिलाफ महिला संगठनों एपवा , एडवा , महिला फेडरेशन…

Meena Singh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಜುಲೈ 24, 2019
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