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मुसलमानों ने अकाल तख्त साहिब में सजदा कर सीएए मामले में सिख समुदाय से मांगी मदद

देश भर में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) का मुखर विरोध कर रहे मुस्लिम समुदाय ने अब सर्वोच्च सिख संस्था श्री अकाल तख्त साहिब में सजदा करके मुख्य जत्थेदार और समस्त सिख समुदाय से हस्तक्षेप तथा सहयोग की गुहार लगाई है। शुक्रवार को बड़ी तादाद में मुसलमानों ने अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब के प्रवेश द्वार पर जुमे की नमाज अदा करके दुआ मांगी और बाद में श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय जाकर जत्थेदार को विशेष पत्र सौंपकर हिमायत की अपील की।

ऐसा पहली बार है कि मुस्लिम समुदाय अपनी किसी ज्वलंत तथा अहम मांग के लिए श्री अकाल तख्त साहिब और श्री हरमंदिर साहिब के सम्मुख पेश हुआ हो और सिखों की प्रभावशाली शख्सियत से दखल के लिए निवेदन किया हो। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मुस्लिम समुदाय को आश्वासन दिया कि वह नागरिकता संशोधन विधेयक के मसले पर उनके साथ हैं और आगे उनकी प्रबल पैरवी करेंगे।

मानसा में 12 फरवरी को शुरू होने वाले बड़े ‘शाहीन बाग मोर्चा’ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते संयोजक।

जरूरत पड़ने पर ‘बड़े स्तर’ पर ‘दखलअंदाजी’ करेंगे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह पहले भी सीएए के मौजूदा प्रारूप का विरोध कर चुके हैं और उन्होंने फिर इसमें मुस्लिम समुदाय को शामिल न करने की खुली आलोचना की।

मुस्लिम समुदाय का जत्था ‘जॉइंट एक्शन कमेटी अहमदगढ़’ की अगुवाई में श्री अकाल तख्त साहिब और श्री हरमंदिर साहिब पहुंचा। संगठन के अध्यक्ष जीशान हैदर ने बताया कि अमृतसर के रूहानी दरबार से उन्हें सहयोग का पूरा आश्वासन मिला है और जिस उम्मीद के साथ वे गए थे, वह पूरी हुई है। जीशान हैदर कहते हैं, “हमने श्री हरमंदिर साहिब की देहरी पर जुम्मे की नमाज अदा की और फिर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मिले।

हमने उनसे अपील की कि वह देश-विदेश के सिखों के लिए हुकमनामा जारी करें कि सीएए के मामले में पूरी दुनिया के सिख हमारा साथ दें। जत्थेदार ने इस बाबत बेहद सकारात्मक भरोसा दिलाया है। जत्थेदार का फैसला हमारे आंदोलन को देश-विदेश में नई दिशा देगा और इसे सशक्त करेगा। पंजाब के सिखों का एक बड़ा तबका खुलकर हमारे साथ है।

विभाजन के वक्त हमारे बुजुर्गों ने पाकिस्तान नहीं जाने और हिंदुस्तान में ही रहने का फैसला किया था। हम इसे अपना देश मानते हैं और इसके लिए किसी भी कुर्बानी के लिए सदैव तैयार हैं, लेकिन अब नागरिकता संशोधन विधेयक भारतीय मुस्लिम समुदाय को बेगानगी का दर्दनाक और अपमानजनक एहसास करवा रहा है।” श्री अकाल तख्त साहिब और श्री हरमंदिर साहिब में 18 अन्य मुस्लिम संगठन के प्रतिनिधि भी अमृतसर पहुंचे थे। वहां से मिले आश्वासन से वे बेहद संतुष्ट हैं।

मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूं और फिर कहता हूं कि सीएए में मुसलमानों को बाहर रखना गलत और बहुत बड़ी ज्यादती है। किसी भी समुदाय के साथ ऐसा भेद भाव केंद्र सरकार को हरगिज नहीं करना चाहिए।” उधर, शाहीन बाग की तर्ज पर पंजाब के जिला मानसा में 12 फरवरी से विभिन्न संगठनों की ओर से गुरुद्वारा चौक में नियमित मोर्चा शुरू किया जा रहा है।

12 फरवरी को, पहले दिन मानसा में बनाए जा रहे ‘शाहीन बाग’ में शिरकत के लिए सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के वरिष्ठ नेता तथा जेएनयू छात्र संघ के पूर्व प्रधान सुचेता डे, आशुतोष कुमार, पूर्व सांसद धर्मवीर गांधी, पंजाब के प्रमुख मुस्लिम रहनुमा मुफ्ती आजम ईरताक ऊल हसन, लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान विधायक सिमरजीत सिंह बैंस, आम आदमी पार्टी के विधायक बुधराम, सीपीआई की केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य पूर्व विधायक हरदेव अर्शी, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), भीम सेना, राज्य के किसान संगठनों और विभिन्न धार्मिक जत्थेबंदियों के नेता तथा नामवर बुद्धिजीवी-साहित्यकार शिरकत करेंगे।

मानसा में लगाए जाने वाले ‘शाहीन बाग’ से जुड़े पंजाब किसान यूनियन के प्रधान रुलदु सिंह के मुताबिक, “मानसा का शाहीन बाग पूरे देश में नजीर बनेगा और नई मिसाल पेश करेगा। 12 फरवरी के बाद पंजाब में सीएए के खिलाफ शहरों और गांवों में जागृति तथा लामबंदी मुहिम शुरू की जाएगी। पंजाब वासियों को बताया जाएगा कि किस तरह यह कानून देश के संविधान के खिलाफ है। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई जाएगी। सीएए विरोधी संगठनों के सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा कि किस तरह भाजपा और आरएसएस की सोशल मीडिया मुहिम का माकूल एवं तार्किक जवाब देना है।”

जिक्रेखास है कि 16 फरवरी को सीएए के खिलाफ 30 से ज्यादा संगठन मलेरकोटला में एक विशाल रैली और रोष प्रदर्शन करने जा रहे हैं। इसमें पंजाब के हर शहर और कस्बे में शाहीन बाग की तर्ज पर मोर्चा लगाने की बाबत विचार-विमर्श होगा तथा फैसला लिया जाएगा।

बड़ी तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोग भी आगामी शुक्रवार को जुमे की नमाज श्री हरमंदिर साहब की देहरी पर अदा करेंगे। बता दें कि बादलों की अगुवाई वाला शिरोमणि अकाली दल नागरिकता संशोधन विधेयक पर ‘कभी हां कभी न’ वाले पैंतरे पर है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार मुसलमानों की गुहार पर कोई खास हिदायत सिख समुदाय के लिए जारी करते हैं तो पंथक पार्टी होने का दावा करने वाले बादल शिरोमणि अकाली दल को निर्णय मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और जालंधर में रहते हैं।)

This post was last modified on February 8, 2020 10:18 pm

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