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Sunday, September 19, 2021

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महाराष्ट्र और पंजाब भाजपा में भगदड़

जो खेल भाजपा अब तक दूसरे दलों के साथ खेलती आ रही थी वही खेल अब खुद उनके यहां भी शुरू हो चुका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद जहां भाजपा के 150 से अधिक नेताओं...

पहले संज्ञान लिया होता तो श्रमिकों की इतनी दुर्दशा नहीं होती! योर आनर

उच्चतम न्यायालय का हृदयपरिवर्तन हो गया है और आज उच्चतम न्यायालय स्वयं को प्रवासी मजदूरों का हितैषी बता रहा है। शहरों से मजदूरों के पलायन को लेकर उच्चतम न्यायालय में दाखिल पांच जनहित याचिकाओं और अपीलों को खारिज करने...

कोरोना काल: मज़दूर चेतना को नई ऊँचाई पर ले जाने का समय

तालाबंदी के डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी देश-व्यापी स्तर पर मेहनतकश मजदूरों की दुर्दशा का सिलसिला थमा नहीं है। हर दिन भूख, जिल्लत और अपने ही देश में बेगानेपन का दंश झेलते मजदूरों के हुजूम-दर-हुजूम चारों तरफ...

मजदूरों की महायात्रा के अर्थ !

माथे पर बोझ लिए, छोटे-छोटे बच्चों का हाथ थामे या शिशुओं को गोद में उठा कर लगातार भागी जा रही भीड़ ने सब कुछ उघाड़ कर रख दिया है। विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक मानी जाने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चेहरे का पाउडर धुल चुका है। चिलचिलाती...

कोरोना महामारी : अमीर इंडिया बनाम गरीब भारत

भारत में बीसवीं सदी का अंतिम दशक ख़त्म होते-होते समस्त मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों, मंचों और माध्यमों से गरीबी की चर्चा समाप्त हो गई। देश की शासक जमात के बीच यह तय माना गया कि अब देश में गरीबी...

संपन्न तबके ने अपने ही ‘चाकरों’ को धकेल दिया सड़कों पर

आख़िर उत्पीड़ितों को दोषी ठहराने का अभियान शुरू हो गया है। फ़ासिस्ट दिमाग़ जिस तरह की कार्यशैली अपनाते रहे हैं, उसे देखते हुए यही होना था। सड़कों पर ग़रीबों के जो हुज़ूम जिनमें युवा स्त्री-पुरुष, उनके मासूम बच्चे, बूढ़े परिजन...

माले ने फ़ोन नंबर समेत बाहर फंसे बिहार के मज़दूरों की जारी की सूची

पटना। भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने लाॅकडाउन से उत्पन्न भयावह स्थिति के दौर में भी केंद्र और बिहार सरकार व प्रशासन के अतिसंवेदनहीन रवैये पर गहरी चिता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी हेल्प लाइन नंबर...

लॉक डाउन: देश कोई एमसीबी नहीं कि जब चाहे ऑन-ऑफ किया जा सके

24 मार्च को अचानक लॉक डाउन की घोषणा के बाद से जो अफरातफरी मची वह केवल ज़रूरी चीजों की खरीदारी के लिये ही नहीं थी क्योंकि सरकार ने तुरंत यह स्पष्ट कर दिया था कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति...

दिल्ली से पैदल गांव लौटता हताश लोकतंत्र !

वे दिल्ली से लौट रहे हैं। क्योंकि दिल्ली से उन्हें लौटा दिया गया है। लौटने का कोई साधन नहीं है। न रेल, न बस और न ही टेम्पो जीप जैसे साधन। वे पैदल ही चल पड़े हैं। कोई हमीरपुर,...
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सरकार चाहती है कि राफेल की तरह पेगासस जासूसी मामला भी रफा-दफा हो जाए

केंद्र सरकार ने एक तरह से यह तो मान लिया है कि उसने इजराइली प्रौद्योगिकी कंपनी एनएसओ के सॉफ्टवेयर...
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