Monday, October 18, 2021

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छत्तीसगढ़: अपनी मांगों को लेकर कांकेर में 90 गांवों के 5 हजार से ज्यादा आदिवासी हुए लामबंद

कांकेर। छत्तीसगढ़ में लगातार आदिवासी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के लिए बाध्य हो रहे हैं। अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए आदिवासी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा सरकार आदिवासियों की मांगों को...

छत्तीसगढ़: कोयला खनन के लिए आदिवासियों और वनों की दी जा रही है बलि

छत्तीसगढ़ राज्य में सरगुजा जिले का हसदेव अरण्य क्षेत्र अपनी जैव विविधता, विशेषकर हाथियों के झुंड़ों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां हजारों प्रजाति के वन्य जीवों का बसेरा है और इनके साथ माइग्रेटरी चिड़ियों का भी आगमन होता...

झारखंड के जल, जंगल और जमीन आंदोलन के मॉडल थे फादर स्टेन

आज 8 अक्टूबर 2021 को झारखंड में रांची स्थित राजभवन झारखंड के समक्ष विभिन्न जनसंगठनों द्वारा फादर स्टेन स्वामी की प्रायोजित हत्या में शामिल दोषियों को सजा की मांग को लेकर धरना दिया गया। उक्त धरना कार्यक्रम "शहीद फादर...

पुस्तक समीक्षा: त्रासदियों की नींव पर घटती नई त्रासदियों की कहानी

'एक देश बारह दुनिया' पुस्तक अनूठे भाषा-प्रवाह और दृश्य-बिम्बों के कारण अपने पहले पन्ने से ही पाठकों को बांधकर आगे बढ़ती हुई नजर आती है। फिर भी पुस्तक की भाषा और भावपूर्ण प्रस्तुति इसकी दूसरा विशेषता कही जाएगी। इसकी...

‘हूल दिवस’ पर विशेष: आज झारखंड में जरूरत है एक और हूल की!

भले ही 'हूल दिवस' (संताल दिवस) को बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक स्तर पर याद किया जाता हो, लेकिन झारखंड के आम आदिवासी हूल दिवस के औपचारिक ज्ञान से भी दूर हैं। मैंने लगभग 50 आम आदिवासियों से यह...

ये आग तो बुझ जायेगी, मगर सवाल तो सुलगते रहेंगे!

इस साल जनवरी के महीने ही से उत्तराखण्ड के अधिकांश जंगल जलने लग गये थे। ये हालत जंगल की बदहाली को बयान कर रहे थे, पर जंगलात इस आड़ में छुपता रहा कि ये जंगल की आग दरअसल “कंट्रोल...

वैशाली की घटना पर तेजस्वी ने पीएम मोदी से पूछा- इस जंगलराज का महाराजा कौन है?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार के वैशाली में युवती को जिंदा जलाने का मामला दबाने को लेकर जदयू-भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि चुनावी फायदे के लिए और सुशासन की नकली बुनियाद को...

‘जंगल राज का युवराज’ बनाम ‘मौत का सौदागर’!

जंगल राज का युवराज और मौत का सौदागर। पहले जुमले पर ग़ौर करें तो ज़्यादा से ज़्यादा एक अफरातफरी का दृश्य ज़हन में तैयार होता है। और दूसरे यानि ‘मौत का सौदागर’ पर नज़र डालें तो 2002 में पूरे...

नॉर्थ ईस्ट डायरीः पूर्वोत्तर सूबों की सरहदें क्यों रहती हैं हिंसक झड़पों से गरम?

पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संवैधानिक और ऐतिहासिक सीमाओं की अलग-अलग समझ के कारण समस्या उत्पन्न होती है। असम स्वतंत्रता के बाद निर्मित नागालैंड, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से निर्धारित सीमाओं का पालन करने की अपेक्षा रखता है, लेकिन...

छत्तीसगढ़: 3 साल से एक ही मामले में बगैर ट्रायल के 120 आदिवासी जेल में कैद

नई दिल्ली। सुकमा के घने जंगलों के बिल्कुल भीतर स्थित सुरक्षा बलों के एक कैंप से महज 200 मीटर की दूरी पर एक छोटा गांव स्थित है। नाम है बुरकापाल। यहां जाने पर गांव में या तो महिलाएं मिलती...
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भारतः भूख और गरीबी की नई कथा

बीते हफ्ते जारी हुई वर्ल्ड हंगर इंडेक्स रिपोर्ट से भारत में बढ़ रही भूख और कुपोषण की समस्या पर...
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