‘‘गोबर और गोमूत्र से काम नहीं बना। कल मछली खाकर देखता हूं’’। मई के मध्य में यह… Read More
nationalism
इतिहास के साथ दुष्प्रचार और गलतबयानी एक आम बात रही है। सत्तारूढ़ शासक अक्सर अपने विकृत और… Read More
विचारधारा अब दिल्ली के बजट में एक मद भर रह गई है। आप ब्रांड देशभक्ति = 500… Read More
2021-22 का बजट सामान्य रूटीन का बजट नहीं हैं, यह खुलेआम इस बात की घोषणा करता है… Read More
वर्तमान लोकतांत्रिक भारत राष्ट्रवाद के जिस रास्ते पर चल रहा है, उसमें ‘भारत माता’ के नाम का… Read More
सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) और बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) के बैनर तले किसान आंदोलन के साथ एकजुटता… Read More
आप जिससे लड़ रहे हैं, उसे इस बात से बहुत कम फर्क पड़ता है कि आपकी बात… Read More
अगले साल बंगाल में चुनाव हैं। वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेता और… Read More
अरुंधति रॉय भारत की उन चंद लेखकों में हैं, जिनकी समकालीन भारत की नब्ज़ पर उंगली है… Read More
जेएनयू के परिसर में सन् 2016 की सर्दियों में हुए राष्ट्रवाद पर भाषणों के संकलन, ‘What the… Read More