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श्री रामकृष्ण परमहंस: “जतो मत, ततो पथ”, यानी धार्मिक विविधता की स्वीकृति का दर्शन

श्री रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) उन्नीसवीं सदी के भारतीय संत और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने सभी धर्मों की… Read More

मूल्यों और प्रगति को बदरंग करता अंधविश्वास,धर्म और आध्यात्मिकता का घालमेल

जितना पुराना धर्म है, उससे कहीं ज़्यादा पुराना शायद अंधविश्वास है। शुरुआत में हर धर्म सही मायने… Read More

पुस्तक समीक्षा: मिथक, धर्म, और विज्ञान : मिथकों से विज्ञान तक की कहानी

पिछले दिनों मैंने एक अच्छी किताब पढ़ी, जिसका नाम है “मिथकों से विज्ञान तक”I  इसके लेखक हैं गौहर रज़ा।… Read More

भारतीय समाज व सत्ता के लोकतांत्रिक होने की चुनौतियां और सामाजिक न्याय का सवाल

हमारे समाज और साहित्य में समता और सामाजिक न्याय के विचारों और मूल्यों की मौजूदगी काफी पहले… Read More

पीके की बिहार में होगी अग्नि परीक्षा; लालू, नीतीश और बीजेपी भी हैं हतप्रभ!

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानी पीके अब चुनावी मैदान में डंका पीटने जा रहे हैं। अगले बिहार… Read More