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आखिरी वक्त में भी हाथ उठाकर बंधी रही चितरंजन भाई की मुट्ठी!

चितरंजन भाई अपने गांव लौट गए थे। कुछ महीने पहले। ग्राम सुल्तानपुर, तहसील बांसडीह, जिला बलिया, घाघरा… Read More

स्मृति शेष: ‘जुल्म और दमन के खिलाफ इंसाफ और लोकतंत्र की निर्भीक आवाज थे भाई चितरंजन सिंह’

आदरणीय चितरंजन भाई से अभी 10 अक्टूबर को टॉउनहाल बलिया में बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई थी।… Read More

नहीं रहे जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता चितरंजन, बलिया में ली आखिरी सांस

बलिया/नई दिल्ली। देश के जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता, जनवादी चिंतक व स्वतंत्र पत्रकार चितरंजन सिंह का आज निधन… Read More

हमेशा के लिए शांत हो गयी गरीबों की एक वेशकीमती आवाज, नहीं रहे जस्टिस होसबेट सुरेश

नई दिल्ली। 2002 के गुजरात नरसंहार समेत हिंसा और मानवाधिकारों के हनन की विभिन्न घटनाओं की जाँच… Read More

दुआ और पटेल मामला: प्रगतिशील लेखक संघ ने कहा- आजाद आवाजों को दबाने की हरकतों से बाज आए सरकार

पंजाब/ नई दिल्ली। प्रगतिशील लेखक संघ ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ… Read More

सांस्कृतिक संगठनों ने जारी किया खुला बयान, कहा- बंद हो मानवाधिकार-कर्मियों, लेखकों और पत्रकारों की गिरफ़्तारियों का सिलसिला

(जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, प्रतिरोध का सिनेमा, संगवारी और… Read More

क्या कोई अराजक समाज दे सकता है मानवाधिकारों के रक्षा की गारंटी?

क्या मानवाधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता किसी ताकतवर राष्ट्र की पहली पहचान है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा तभी मजबूत… Read More