बीच बहस नीरो, नीरो होता है, इन्सान नहीं होता by अभय कुमार May 18, 2021May 18, 2021 कहानियों और मुहावरों में सुना था कि जब रोम जल रहा था तो कोई नीरो बादशाह बांसुरी… Read More
संस्कृति-समाज स्पार्टाकसः गुलामों की सेना ने हिला दी थी रोम की चूलें by ईश मिश्रा November 29, 2020November 29, 2020 हावर्ड फॉस्ट के कालजयी उपन्यास स्पार्टाकस का हिंदी अनुवाद अमृत राय ने आदिविद्रोही शीर्षक से किया है।… Read More
बीच बहस हाथरस नहीं, मनाली की हसीन वादियां निहार रहा है नीरो by यूसुफ किरमानी October 3, 2020October 3, 2020 रोम के जलने पर नीरो अब बाँसुरी नहीं बजाता वह मनाली की हसीन वादियों को किसी टनल… Read More