Saturday, October 16, 2021

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हिंदू पाखंड को खंड-खंड करतीं ‘डॉक्टर अंबेडकर की पहेलियां’

डॉ. भीमराव आंबेडकर भारत के उन नेताओं में अग्रणी रहे, जिन्होंने देश के नव-निर्माण को नई दिशा दी। जोतीराव फुले द्वारा शूद्रों-अतिशूद्रों के प्रबोधीकरण के लिए तैयार की गई जमीन को उन्होंने न केवल सींचा, बल्कि उसमें आधुनिक विचारों...

‘गुलामगिरी’: शूद्रों-अतिशूद्रों की मुक्ति का दस्तावेज

1 जून यानी आज 2020 को ‘गुलामगिरी’ पुस्तक के 147 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह महात्मा ज्योतिबा फुले (11 अप्रैल 1827 - 28 नवंबर 1890) की प्रमुख रचना है। ‘गुलामगिरी’ अंधविश्वास, पाखंड, छल-कपट पर आधारित ब्राह्मणी ग्रंथों एवं...

जयंती पर विशेष: भारतीय पुनर्जागरण के जनक जोतीराव फुले हैं, राजाराम मोहनराय नहीं

(भारत की देशज शोषण-उत्पीड़न और गैर-बराबरी की आर्य-ब्राह्मणवादी व्यवस्था (भारतीय सामंतवाद) को आधुनिक युग में पहली बार चुनौती देने वाले पहले व्यक्तित्व फुले दंपति- जोतीराव फुले और सावित्रीबाई फुले हैं। जिन्होंने सत्य शोधक समाज (1873) के माध्यम से वर्ण-जाति...

दलित बर्बरताः अपराधियों का स्वागत न करने का विवेक

राजस्थान के नागौर में दलित युवकों के साथ की गई अमानवीय बर्बरता की कारुणिक चीख और रुदन कानों से जा ही नहीं रही है, लेकिन इस बर्बरता के बाद जब ये अपराधी घर पहुंचे होंगे, तो उनकी मांओं ने...

शाहीन बाग से शुरू हुआ पढ़ने-पढ़ाने का भी आंदोलन

शाहीन बाग़ में किताबों का जो एक पौधा रोपा गया था, वो पेड़ की शक़्ल अख़्तियार कर रहा है। उसकी एक जड़ हौज़ रानी के गांधी पार्क में फूटी है, जैसे कि शाहीन बाग़ के आंदोलन की जड़ें यहां-वहां...
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विघटन और विखंडन में विश्वास करने वाले नहीं समझ सकते हैं गंगा-जमुनी तहजीब

विश्व हिन्दू परिषद के महासचिव मिलिन्द परांडे ने हाल (सितम्बर, 2021, 'दि टाइम्स ऑफ इंडिया') में कहा कि गंगा-जमुनी...
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