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Wednesday, September 29, 2021

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झारखंड के बाद अब यूपी में जज को मारने की कोशिश, हत्या के प्रयास पर एफआईआर

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झारखंड के बाद अब यूपी में जज को मारने की कोशिश। फतेहपुर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद अहमद खान सड़क दुर्घटना में बाल-बाल बच गए। यह घटना गुरुवार को उस वक्त हुई जब कौशांबी के कोखराज इलाके के चकवां गांव के पास एक इनोवा ने खान की कार को टक्कर मार दी। घटना में उनका गनर घायल हो गया और एडीजे की कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। झारखंड के न्यायाधीश उत्तम आनंद को एक वाहन द्वारा कुचले जाने के बाद, इस बार उत्तर प्रदेश के एक अन्य न्यायाधीश ने एक शिकायत दर्ज कराई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि जब गुरुवार को वह प्रयागराज से फतेहपुर आ रहे थे तो उनकी कार पर टक्कर मारकर उनकी जान लेने की कोशिश की गई।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में तैनात अतिरिक्त जिला न्यायाधीश मोहम्मद अहमद खान ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें जानबूझ कर एक एसयूवी से टक्कर मार दी गई और परिणाम स्वरूप उन्हें चोटें आईं और यह उन्हें मारने का प्रयास था। न्यायाधीश की शिकायत में कहा गया है कि एक वादी ने हाल ही में उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी जब उसने उस व्यक्ति द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

न्यायाधीश की शिकायत के बाद, स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। घटना उस समय हुई जब वह निजी यात्रा के बाद प्रयागराज से फतेहपुर लौट रहे थे। न्यायाधीश की शिकायत में कहा गया है कि एक वादी ने हाल ही में उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी, जब उन्होंने उस व्यक्ति द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

न्यायाधीश उत्तम आनंद, जो धनबाद में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश थे, सुबह की सैर के लिए निकले हुए एक सड़क दुर्घटना में मारे गए। हालांकि शुरू में इसे एक दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन सामने आई घटना के सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि वाहन को जानबूझकर जज से टकराया था क्योंकि वह सड़क के किनारे चल रहे थे।

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे) की कार में टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए चार लोगों को हिरासत में लिया है। इस दुर्घटना में एडीजे मोहम्मद अहमद खान के अलावा उनका गनर भी घायल हो गया था। एडीजे की कार में टक्कर मारने वाले इनोवा चालक को इनोवा सहित हिरासत में लिया गया है। यह घटना गुरुवार को उस वक्त हुई जब कौशांबी के कोखराज इलाके के चकवां गांव के पास एक इनोवा ने खान की कार को टक्कर मार दी। घटना में उनका गनर घायल हो गया और एडीजे की कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। एडीजे अहमद खान ने तहरीर में लिखा है कि बरेली में दिसंबर 2020 में एक युवक की जमानत खारिज करने के दौरान उन्हें जान से मार देने की धमकी मिली थी। वह युवक कौशांबी का ही रहने वाला है।

धनबाद जज हत्याकांड

झारखंड हाईकोर्ट ने एसआईटी को 03 अगस्त तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि पुलिस महानिदेशक, झारखंड इस न्यायालय को जनवरी, 2020 के बाद झारखंड राज्य में अपराध की ग्राफ दर से अवगत कराएंगे। बुधवार को एक ऑटो रिक्शा द्वारा कुचले गए न्यायाधीश आनंद की मौत के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा शुरू किए गए स्वत: संज्ञान मामले में मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण की खंडपीठ ने यह निर्देश पारित किया था। कोर्ट ने कहा, ‘हम मामले में तेज, निष्पक्ष और पेशेवर जांच चाहते हैं।

न्यायाधीश उत्तम आनंद झरिया विधायक संजीव सिंह के करीबी सहयोगी रंजय सिंह की हत्या के मामले सहित कुछ हाई प्रोफाइल मामलों की सुनवाई कर रहे थे। इसके अलावा, उसने हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक अपराधी / गैंगस्टर अमन सिंह के एक गिरोह के दो सदस्यों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि शुरू में इसे एक दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन सामने आए घटना के सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि वाहन को जानबूझकर जज से टकराया था क्योंकि वह सड़क के किनारे चल रहे थे।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में, पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह एसआईटी के लिए उचित आदेश / निर्देश जारी करें, जिसकी अध्यक्षता आईपीएस, एडीजी संजय ए लठकर करेंगे और फरवरी 2020 से राज्य में अपराध दर के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। कोर्ट ने आदेश दिया कि हम सुनवाई की अगली तारीख पर एसआईटी को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दे रहे हैं। एक हलफनामा दायर कर यह खुलासा किया जाए कि पुलिस को घटना की सूचना कब मिली और एफआईआर कब दर्ज की गई। यह भी जानकारी दी जाए कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई या नहीं ? पुलिस महानिदेशक, झारखंड इस न्यायालय को जनवरी, 2020 के बाद झारखंड राज्य में अपराध की ग्राफ दर से अवगत कराएंगे।

न्यायाधीश आनंद के दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण निधन के संबंध में 29 जुलाई को प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा भेजे गए एक पत्र के आधार पर अदालत ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था। इस संबंध में, न्यायाधीश आनंद की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए, कोर्ट ने कहा कि “जब तक साजिश पूरी तरह से उजागर नहीं हो जाती है और मास्टरमाइंड को पकड़ लिया जाता है, तब तक मोहरे को पकड़ना व्यर्थ है। इस जांच में समय का सार होगा। देरी के साथ-साथ ही जांच में कोई भी दोष अंततः मुकदमे को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।

मामले में सीबीआई जांच के सवाल पर, महाधिवक्ता ने कहा कि चूंकि एसआईटी का गठन किया गया है और दो महत्वपूर्ण व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, इसलिए मामला सीबीआई को नहीं सौंपा जा सकता है अन्यथा इसका राज्य के पुलिस बल पर मनोबल गिराने वाला प्रभाव पड़ेगा।

बार के सदस्यों ने अदालत के समक्ष कहा कि इसे दुर्घटना या हत्या के एक साधारण मामले के रूप में नहीं लिया जा सकता है, बल्कि जांच एजेंसी द्वारा इस कोण पर जांच की जानी आवश्यक है कि न्यायिक अधिकारी की हत्या की साजिश हो सकती है क्योंकि उनके अनुसार संबंधित न्यायिक अधिकारी बहुत संवेदनशील मामलों में था। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

-वरिष्ठ पत्रकार जे पी सिंह की रिपोर्ट

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