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नहीं रहे जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता चितरंजन, बलिया में ली आखिरी सांस

बलिया/नई दिल्ली। देश के जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता, जनवादी चिंतक व स्वतंत्र पत्रकार चितरंजन सिंह का आज निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे।

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक चितरंजन सिंह लम्बे समय से बीमार थे और आखिरी दिनों में कोमा में चले गए थे। चितरंजन मधुमेह की बीमारी से पीड़ित थे। कुछ दिनों पहले ही वह जमशेदपुर से बलिया जिले में स्थित अपने गांव मनियर आ गए थे और यहीं पर रह रहे थे। इस बीच एक दिन अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गयी। पहले उन्हें बलिया के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन वहां चिकित्सकों ने उन्हें बीएचयू के सरसुंदरलाल अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।

जिसके बाद उन्हें बीएचयू लाया गया था। यहां चिकित्सकों ने उनको देखने के बाद कुछ दवाएं दीं और उन्हें घर ले जाकर रखने की सलाह दी। हालांकि बीएचयू आने पर उनको होश आ गया था और वह भोजन आदि लेने लगे थे। घर लौटने पर भी वह कुछ दिनों तक ठीक रहे। लेकिन तकरीबन चार दिनों पहले वह अचानक कोमा में चले गए। उनके करीबी और सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत यादव का कहना है कि इस दौरान उनके सारे अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया। एक दौर के बाद उनकी आवाज ने भी साथ छोड़ दिया। अब से तकरीबन डेढ़ घंटे पहले उनका निधन हो गया।

चितरंजन सिंह आजीवन लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल से जुड़े रहे। वे सीपीआई (एमएल) से भी जुड़े थे। उन्होंने आईपीएफ के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चितरंजन सिंह को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति की एक नई धारा चलाने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने पीएसओ (प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन) की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई थी। वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भी काफी करीबी थे। उनके निधन पर जिले के पत्रकारों, जनवादी चिंतकों व राजनीतिक व्यक्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

चितरंजन देश के तकरीबन सभी हिस्सों में एक ऐसी शख्सियत के तौर पर जाने जाते थे जो न केवल मानवाधिकारों के सवाल पर सक्रिय रहता है बल्कि समाज और राजनीति का कोई भी मुद्दा उनसे अछूता नहीं था। दलितों के उत्पीड़न का मसला हो या कि बुद्धिजीवियों के अधिकारों पर हमला वह हमेशा संघर्ष के मोर्चे पर रहते थे। इसको कभी सड़कों पर आंदोलन के जरिये पूरा करते थे तो कभी अखबारों में लेख लिख कर।

(कुछ इनपुट वार्ता से लिए गए हैं।)

This post was last modified on June 26, 2020 7:34 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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