Thursday, April 18, 2024

झारखंड में कोरोना वायरस से पहली मौत, सरकार पर उठते सवाल

राँची। झारखंड में कोरोना वायरस से मौत का सिलसिला शुरू हो गया है। बोकारो के गोमिया प्रखंड के बुजुर्ग मो. याकूब ने 8 अप्रैल को देर रात करीब डेढ़ बजे दम तोड़ दिया। बोकारो सिविल सर्जन डाॅ. अशोक कुमार पाठक ने कहा कि यह बुजुर्ग बीजीएच में बने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती था। 

डाॅ. अशोक कुमार ने बताया कि मृतक की कोई उस तरह की ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं थी। हालांकि उसे कोरोना संदिग्ध मानकर चल रहे थे। और फिर सैम्पल लेकर रांची रिम्स भेजा गया था, जहां उसकी मौत से 15 मिनट पूर्व ही उसमें कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की पुष्टि हुई थी।

कोरोना के कारण मौत का मामला सामने आने के बाद गुरुवार सुबह-सुबह ही पुलिस-प्रशासन साडम पहुंच गई। बेरमो एसडीओ प्रेम रंजन के नेतृत्व में पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है। इसके अलावा घर से किसी को भी बाहर नहीं निकलने की बात कही गई है। इसके अलावा इलाके को सेनेटाइज करना शुरू कर दिया गया है।

मालूम हो कि झारखंड में कोरोना वायरस की पहली पाॅजिटिव मरीज 31 मार्च को रांची के हिन्दपीढ़ी में मिली थी, जो मूल रूप से मलेशिया की रहने वाली थी। दूसरा मरीज 2 अप्रैल को हजारीबाग जिला के विष्णुगढ़ थानान्तर्गत एक गांव में मिला था, जो पश्चिम बंगाल के आसन सोल से गांव आया था। तीसरी मरीज 5 अप्रैल को बोकारो जिला के तेलो गांव में मिली थी, जो हाल-फिलहाल अपने परिवार के साथ बांग्लादेश देश से आयी थी।

जबकि चौथी मरीज रांची के हिन्दपीढ़ी से ही मिली थी। कल झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने शाम 6 बजे हेल्थ बुलेटिन जारी कर बताया था कि अभी तक 1315 सैंपल कलेक्ट किये गये हैं, जिसमें 1099 निगेटिव और 4 कोरोना पाॅजिटिव मिले हैं, बाकी सैंपल जांच के प्रोसेस में हैं। साथ ही जारी बुलेटिन में बताया गया था कि झारखंड में होम क्वारंटाइन में अभी 1,31,942 लोग हैं, जबकि सरकार के द्वारा बनाये गये क्वारंटाइन सेंटर में 15,186 लोग हैं। 

8 मार्च को देर रात ही खबर फैलनी शुरु हो गयी थी कि झारखंड में और भी 9 लोग कोरोना पाॅजिटिव पाये गये हैं, जिसकी पुष्टि बाद में स्वास्थ्य सचिव नितिन कुलकर्णी ने की। इस 9 में से 5 कोरोना पाॅजिटिव रांची के हिन्दपीढ़ी से ही हैं, जहाँ पर 31 मार्च और 6 अप्रैल को एक-एक महिला कोरोना पाॅजिटिव पायी गयी थी, जबकि 4 मरीज बोकारो जिले के तेलो गांव में पाए गए हैं, जहाँ पर 5 अप्रैल को 1 महिला मरीज कोरोना पाॅजिटिव पायी गयी थी। 

एक दिन में दो जगह से थोक भाव में कोरोना पाॅजिटिव पाये जाने के कारण अब झारखंड में भी कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका काफी बढ़ गयी है, लेकिन अभी भी कोरोना की जांच झारखंड में मात्र रांची और जमशेदपुर के ही एक-एक अस्पताल में होना काफी चिंताजनक है। जहाँ लाखों लोगों को होम क्वारंटाइन व सरकारी क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया हो, वहाँ अभी तक मात्र 1315 सैंपल ही कलेक्ट करना स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है।

झारखंड सरकार लगातार कह रही है कि हमने केन्द्र सरकार से कोरोना से लड़ने के लिए पीपीई, एन-95 मास्क, वेंटिलेटर, कोरोना जांच किट आदि की मांग की है, लेकिन केन्द्र सरकार झारखंड की मांग पर ध्यान नहीं दे रही है। यहाँ तक कि मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी पीएम ने झारखंड के मुख्यमंत्री को बोलने का मौका नहीं दिया। गैर एनडीए राज्य सरकार के प्रति केन्द्र सरकार की दोरंगी नीति आज किसी से छिपी हुई नहीं है, फिर भी कोरोना जांच की धीमी रफ्तार से झारखंड सरकार पर कई सवाल उठते हैं। तब तो और जब कोरोना से हुई पहली मौत की कोरोना पाॅजिटिव रिपोर्ट उसकी मौत से मात्र 15 मिनट पहले आई हो।

(रूपेश कुमार सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल झारखंड के रामगढ़ में रहते हैं।)

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