Sunday, May 22, 2022

रांची एयरपोर्ट से मानव तस्करी के आरोप में एक महिला गिरफ्तार

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झारखंड की राजधानी रांची से एक नवजात को खरीद कर मुंबई ले जाने के क्रम में रांची एयरपोर्ट पर निखत परवीन (36) नामक एक महिला को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले का पता तब चला जब उसके टिकट में नवजात का जिक्र नहीं था। इस पर सीआईएसएफ के जवानों ने उसे गेट पर ही रोक दिया। हालांकि वह इंडिगो के काउंटर पर बच्चे का नाम जुड़वाने गयी। लेकिन इंडिगो कर्मी अंजनी नंदन पांडेय ने जब उससे बच्चे का नाम और उसकी उम्र पूछा तो वह हड़बड़ा गयी।

शक होने पर जब इंडिगो मैनेजर रिजवान ने जांच की, तो पता चला कि 11 जनवरी को वह महिला बिना बच्चे के मुंबई से रांची आयी थी। 13 जनवरी को फ्लाइट 6ई-341 से दोपहर दो बजे मुंबई जाने के लिए उसने 12 जनवरी को ऑनलाइन टिकट बनवाया था, लेकिन बच्चे की एंट्री नहीं करायी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गयी। कोतवाली एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना की पुलिस ने उसे ह्यूमन ट्रैफिकिंग के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

बता दें कि आरोपी महिला ने नवजात को सोनाहातू की रतनी देवी से 22 हजार रुपये में खरीदने की बात स्वीकारी है। उसने बताया कि उसे बगोदर की ही एक महिला से रतनी के जुड़वा बच्चा होने की जानकारी मिली थी। आरोपी अपने पति के साथ मुंबई के ठाकुरपाड़ा अपर नाइस स्कूल, गाजी महल के ग्राउंड फ्लोर में रहती है। पति का नाम जावेद शेख है। बरामद नवजात को पुलिस ने सीडब्ल्यूसी के सामने प्रस्तुत करके शेल्टर होम में भेज दिया है। महिला की योजना बच्चे को ले जाकर बेचने की थी या पालने की, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद होगी। वह मुंबई से फ्लाइट से 11 जनवरी को अकेले रांची पहुंची थी, लेकिन 13 जनवरी को तीन दिन के दूध पीते बच्चे को साथ लेकर वापस फ्लाइट से मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंची थी।

आरोपी महिला को कोई लड़का नहीं है और वह एक बेटा चाहती थी। वह सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ी है और उसकी दो बेटियां हैं। माता-पिता हजारीबाग जिले में रहते हैं। महिला का पति मुंबई में जनता होटल में वेटर का काम करता है। अब महिला के पते का सत्यापन करने के लिए पुलिस की एक टीम को मुंबई भेजा गया है। पुलिस बच्चे की मां का भी बयान लेगी कि आखिर उसने गरीबी के कारण अपने नवजात को बेचा था या किसी दूसरे कारण से उसने आरोपी महिला को नवजात को दिया था।

बताते चलें कि पिछले दिसंबर, 2021 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली पुलिस ने छह महिलाओं को दो नवजात शिशु के साथ गिरफ्तार किया था। शिशु मिले। वे महिलाएं नवजात को गरीब माता-पिता से खरीद कर निःसंतान दंपति को बेचकर मोटा कमाई करती थीं।

बता दें कि इस गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ के बाद अपराध शाखा ने गरीब, लाचार और मजबूर माता-पिता को लालच देकर उनके बच्चों को खरीदकर मानव तस्करी करने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस तरह की छह महिलाओं को गिरफ्तार किया है। उनके पास से दो नवजात शिशु भी मिले हैं। यह गैंग दो से तीन लाख रुपये में जरूरतमंदों को बच्चे बेच देता था। अब तक आरोपी 50 से अधिक शिशु बेच चुके हैं। बच्चे खरीदने वाले 10 लोगों की पहचान हो गई है। गिरोह का सरगना फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त राजेश देव ने बताया कि पकड़ी गई महिलाओं की पहचान गगन विहार (साहिबाबाद) निवासी प्रिया जैन (26), मंगोलपुरी दिल्ली निवासी प्रिया, वेस्ट पटेल नगर निवासी काजल, शाहदरा निवासी रेखा उर्फ अंजलि, विश्वास नगर निवासी शिवानी (38) गांव डूंडाहेड़ा, गुरुग्राम निवासी प्रेमवती के रूप में हुई है।

17 दिसंबर को अपराध शाखा की टीम को सूचना मिली थी कि नवजात बच्चों की तस्करी करने वाला एक गैंग गांधी नगर पुश्ता रोड, श्मशान घाट के पास आने वाला है। इसके बाद टीम ने करीब 3.30 बजे वहां से प्रिया जैन, प्रिया और काजल को पकड़ लिया। इनके पास से सात-आठ दिन का नवजात शिशु बरामद हुआ।

जांच के दौरान पता चला कि तीनों महिलाएं नवजात को बेचने के लिए गांधी नगर पहुंची थीं। इस बच्चे का इंतजाम गैंग सरगना प्रियंका ने किया था। प्रियंका मंगोलपुरी निवासी प्रिया की बहन है। तीनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अगले दिन तीन अन्य महिलाओं को एक नवजात के साथ पकड़ लिया।

तीनों एक दलाल के जरिये बच्चे का सौदा करने वाली थीं। पुलिस की पूछताछ में इन महिलाओं ने अपना अपराध कबूल कर लिया। इन लोगों ने बताया कि प्रियंका और काजल इनकी गैंग लीडर हैं। फिलहाल प्रियंका फरार है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी महिलाओं ने बताया कि सभी बेहद गरीब परिवार से संबंध रखती हैं। कुछ समय पूर्व उन्हें पता चला था कि आईवीएफ सेंटर पर गर्भ धारण के लिए अंडे (एग्स) बेचे जाते थे। जिन महिलाओं को सामान्य तरीके से बच्चे नहीं होते हैं उन्हें आईवीएफ की मदद से प्रजनन कराया जाता है। ऐसी कुछ जरूरतमंद महिलाओं को यह महिलाएं अपने अंडे बेचती हैं।

इसके बदले उन्हें 20 से 25 हजार रुपये मिलते हैं। काजल आईवीएफ सेंटर पर गरीब महिलाओं को ले जाकर कमीशन पर बच्चे बिकवाती थी। यहां इसकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई, जिन्हें बच्चे नहीं हो सकते थे। ऐसे लोगों को बच्चे गोद लेने होते थे, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण वह नहीं ले पा रहे थे। काजल व प्रियंका ऐसे दंपति को बच्चा दिलवाकर उसमें भी मोटा कमीशन लेती थीं।

जेजे क्लस्टर व गरीब बस्तियों में काजल व प्रियंका पता लगा लेती थीं कि यहां कौन-कौन महिलाएं गर्भवती हैं। ऐसी महिलाओं और उनके पति को बहला-फुसलाकर उन्हें बच्चा बेचने के लिए तैयार किया जाता था। बदले में एक से डेढ़ लाख दिलवाने का वादा किया जाता था। बाद में या तो खुद या दलाल के जरिए नवजात को दो से तीन लाख रुपये में बेच दिया जाता था। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह 50 से अधिक बच्चे बेच चुके हैं।

निखत परवीन के मामले को भी मानव तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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