Tuesday, October 3, 2023

सुकमा मुठभेड़ को ग्रामीणों ने बताया फर्जी, कहा- परिजनों को नहीं सौंपे शव, सुरक्ष बल ने लगा दी आग

सुकमा। बस्तर में अक्सर सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों को मारने की खबरें आती रहती हैं। लेकिन कई बार फर्जी मुठभेड़ें भी होती हैं। जिसमें कई आदिवासी अपने जान से हाथ धो बैठते हैं। हाल ही में सुकमा जिले के तालमेटला गांव में पांच सितंबर को फर्जी मुठभेड़ में दो स्थानीय निवासियों को मार दिया गया। पुलिस का दावा है कि रवा देवा और सोड़ी कोसा दोनों ही इनामी नक्सली थीं। जबकि गांववालों ने मुठभेड़ को फर्जी बताया है।

क्या है पूरा मामला?

पांच सितंबर को सुकमा जिले के मोरपल्ली, कुम्माड़तोग, ताममेटला गांव के जंगलों में पुलिस बल द्वारा अभियान चलाया गया। जिसमें दो आदिवासियों को मार दिया गया। मूलवासी बचाओ मंच (बस्तर संभाग) द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि यह मुठभेड़ फर्जी है।

आरोप है कि पुलिस ने अपने अभियान के दौरान तिम्मापुर गांव में संगा से तालमेटला वापस आ रहे दो बाइक सवार ग्रामीणों को मोरपल्ली गांव के गरगड़गुड़ा पारा के जंगल के पास पहले यातनाएं दीं, उसके बाद उन्हें गोली मार दिया।

अब इस मुठभेड़ को लेकर बस्तर संभाग में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस मुठभेड़ पर सबसे पहले सीपीआई नेता और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने सवाल उठाए।

‘जनचौक’ से बात करते हुए विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि “पांच सितंबर को मैं एलमागुंडा गांव में एक कार्यक्रम में जा रहा था। तभी सुकमा एसपी (किरन चव्हाण) का फोन आता है, वो कहते हैं कि तालमेटला में मुठभेड़ चल रही है। वहां जाना उचित नहीं है। इसलिए कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है।”

मनीष कुंजाम बताते हैं कि “इसी दौरान पार्टी के कुछ कार्यकर्ता चर्चा करते हैं कि यहां से चार-पांच किलोमीटर पर तालमेटला गांव है। अगर वहां मुठभेड़ हो रही है तो फायरिंग की आवाज क्यों नहीं आ रही? जबकि फायरिंग की आवाज 10 से 15 किलोमीटर तक सुनाई देती है।

इसी दौरान तालमेटला गांव के कुछ लड़कों का फोन आया। उन्होंने बताया कि वहां कोई भी फायरिंग नहीं हो रही है। रात में मुझे पूरी घटना के बारे में पता चलता है कि रवा देवा और सोड़ी कोसा नाम के दो युवक अपने बहनोई की बाइक से आ रहे थे। बहनोई ने ही उन्हें छोटी मछली (मछली बीच) लाने के लिए पैसा दिया था। ताकि वह मछली पालन का काम शुरू कर सकें।”

विधायक मनीष कुंजाम कहते हैं कि “फिलहाल मैं गांव नहीं गया हूं। लेकिन आगे जाऊंगा। अभी तक की सारी जानकारी लोगों द्वारा ही मिली है।” मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए वह कहते हैं कि “गांव के लोगों के साथ इस घटना पर चर्चा करने पर ग्रामीणों का कहना था कि यदि मुठभेड़ रात से चल रही थी तो आवाज क्यों नहीं सुनाई दी? वहीं एसपी ने दिन में कहा था कि मुठभेड़ जारी है। यह संदेहपूर्ण है।”

जानकारी के अनुसार दोनों मृतकों के पास आधार कार्ड थे। जिससे साफ जाहिर होता है कि वह नक्सली नहीं थे। पुलिस ने कहा कि दोनों ही एक-एक लाख के इनामी नक्सली थे, जबकि मुठभेड़ में मारे जाने के हिसाब से यह रकम बहुत कम है।

इस घटना के बारे में ‘जनचौक’ ने सुकमा के एसपी किरन चव्हाण से बातचीत की। उन्होंने इस मुठभेड़ पर बात करते हुए कहा कि “रवा देवा और सोड़ी कोसा नक्सली मिलिशिया के सदस्य थे। इन दोनों पर चार मुकदमे दर्ज थे। जिसमें कुछ दिन पहले तालमेटला गांव में शिक्षा दूत और उप सरपंच की हत्या का मामला भी था। इसके साथ ही 31 अगस्त को इन दोनों ने दो ग्रामीणों की हत्या कर उन्हें रास्ते में फेंक दिया था।”

रवा देवा और सोड़ी कोसा के पास आधार कार्ड के बारे में पूछने पर एसपी किरन कहते हैं कि “आधार कार्ड होना इस बात का सबूत नहीं है कि वह नक्सली नहीं थे। आजकल नक्सलियों के पास भी आधार कार्ड होते हैं।”

वकील बेला भाटिया को गांव जाने से रोका गया

सामजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने तालमेटला मामले पर बात करते हुए बताया कि उन्हें गांव जाने से पहले ही जगरगुड़ा थाने में रोक दिया गया। इस मामले में उन्होंने सुकमा एसपी से बात की। एसपी ने उन्हें कहा कि आगे के रास्ते में आईडी होने की संभावना है। इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें और बाकी लोगों का रोका गया है।

बेला भाटिया ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के इस तरह के बयान के बाद हमने उनसे बार-बार जाने देने की अनुमति मांगी और कहा कि हम लोग ये लिखित में देने को तैयार हैं कि हम अपनी जिम्मेदारी पर जा रहे हैं। इस पर भी जाने नहीं दिया गया।”

बेला भाटिया सवाल उठाती हैं कि “जगरगुड़ा थाना से दो गेट है जो तालमेटला की तरफ जाते हैं, क्या सारे रास्ते में आईडी थी? जो मुझे जाने नहीं दिया गया।” वह कहती हैं कि “एक वकील होने के नाते मैं घटनास्थल पर जाना चाहती थी, उनके परिवारजनों से मिलकर उसकी जांच करना चाहती थी। दो लोगों की हत्या पर गांव वालों की मदद करना चाहती थी ताकि वह शिकायत दर्ज करा सकें।”

दोनों लोगों को जलाने वाली बात पर वह कहती हैं कि “मुझे गांव के लोगों ने बताया कि सुरक्षा बल दोनों लाशों को जला रहा है। मैंने तुरंत एसपी को इसके बारे में सूचित किया। हमें आश्वन दिया कि ऐसा नहीं होगा। लेकिन इसे रोका नहीं गया। बल्कि जो लोग वीडियो बना रहे थे उनके फोन ले लिए गए।”

वह फिर सवाल करती हैं कि “पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि पुलिस ने लाश को जलाया हो। ऐसा क्या हो गया कि पुलिस ने परिवार वालों को लाश न देकर खुद आग लगाई। जबकि परिवार वाले बार-बार कह रहे थे कि उन्हें अपने रिश्तेदारों का इंतजार करना है। फिर दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ताओं को गांव नहीं जाने दिया जा रहा। यह सारी बातें पुलिस की मुठभेड़ पर सवाल उठाती हैं। जिस पर जांच होना बहुत जरूरी है।”

पांच सितंबर की घटना के बाद ग्रामीणों ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया है। जिसमें वो बता रहे हैं कि सुरक्षा बल के जवानों ने दोनों आदिवासियों की लाश को जला दिया है। जबकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। मृतक के परिवार वाले उनसे गुहार लगा रहे थे कि उनके रिश्तेदारों के आने का इंतजार किया जाए। लेकिन सुरक्षा बल ने उनकी एक नहीं सुनी और लाश को आग लगा दी।

बस्तर आईजी ने नक्सलियों को दी चुनौती

सामजिक कार्यकर्ता और नेता लगातार इस मुठभेड़ पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन तालमेटला गांव किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। इस घटना के बाद बस्तर रेंज के आईजी ने नक्सलियों को चुनौती देते हुए कहा कि “वह 48 घंटे के अंदर मुठभेड़ को फर्जी साबित करके दिखाएं।”

आईजी ने कहा कि “प्रतिबंधित संगठन सीपीआई माओवादी अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जिसके लिए झूठा प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। नक्सलियों द्वारा निर्दोष ग्रामीणों की हत्या एवं प्रताड़ना जैसे काले कारनामों पर पर्दा डालने के लिए क्षेत्र के लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।”

(सुकमा से पूनम मसीह की रिपोर्ट।)

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