Monday, August 8, 2022

जन्मदिन पर विशेष: क्रिकेट ही नहीं, राजनीति की पिच पर भी खूब चमके चेतन चौहान

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भारतीय क्रिकेट में सबसे साहसी सलामी बल्लेबाजों में से एक, चेतन चौहान को मुख्य रूप से ’70 के दशक और 80 के दशक की शुरुआत में कई टेस्ट मैचों में सुनील गावस्कर के साथ ओपनर के रूप में याद किया जाएगा। जब तक सहवाग-गंभीर की ओपनिंग का दौर नहीं आया था, तब तक यह जोड़ी दस शतकीय साझेदारियों के साथ टेस्ट क्रिकेट में सबसे सफल भारतीय सलामी जोड़ी साबित हुई। सन् 1969 में टेस्ट डेब्यू करने वाले चेतन चौहान ने करियर में 40 टेस्ट खेले और 31 की औसत से 2084 रन बनाए। वर्ष 1979 के ओवल टेस्ट में हुई ओपनिंग पार्टनरशिप आज भी याद की जाती है।

इंग्लैंड के खिलाफ 438 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए गावस्कर और चौहान ने पहले विकेट के लिए 213 रन बनाए थे। गावस्कर ने इस मैच में दोहरा शतक (221) जड़ा था जबकि चौहान 80 रन ही बना पाए थे। इसके बावजूद भारतीय टीम 429/8 रन ही बना पाई जिसके कारण मैच हार गई थी। उनका सर्वाधिक स्कोर 97 रहा, जिसमें 16 अर्धशतक शामिल हैं इसके अलावा उन्होंने 7 वन-डे अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले। अपने क्रिकेट करियर में बिना शतक लगाए दो हजार रन बनाने वाले चौहान दुनिया के पहले क्रिकेटर थे। चेतन महाराष्ट्र और दिल्ली की तरफ से रणजी ट्रॉफी खेलते थे, पिता के ट्रांसफर होने के बाद 13 साल की उम्र में वह पुणे शिफ्ट हो गए थे। उन्हें अर्जुन एवार्ड से भी नवाजा गया था।

मंकीगेट कांड के गवाह रहे टीम मैनेजर चेतन

वर्ष 2001 में जब कोलकाता टेस्ट के ऐतिहासिक मैच में भारत ने आस्ट्रेलिया को करारी मात दी थी, तब चेतन टीम इंडिया के मैनेजर थे। 2007-2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी वह मैनेजर रहे, इसी दौरे में ‘मंकीगेट विवाद’ छाया। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई टीम इंडिया के टीम मैनेजर भी चेतन ही थे। उस दौरे पर भज्जी और एंड्रयू साइमंड्स के बीच मंकी गेट प्रकरण काफी चर्चित रहा, जिसकी वजह से काफी विवाद गहराया था। क्रिकेट के इतिहास में यह प्रकरण सबसे विवादित मामलों में से एक है।चेतन जून 2016 से जून 2017 के बीच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) के चेयरमैन पद पर भी रहे।

गंभीर ने क्यों कहा था कि बिशन सिंह बेदी और चौहान के मिडिल स्टंप उखड़ गए हैं ?

4 अगस्त 2019 को भारत ने सेंट्रल ब्रोवार्ड रीजनल स्टेडियम में खेले गए पहले टी-20 मैच में वेस्टइंडीज को चार विकेट से हराया था, इस जीत के हीरो युवा गेंदबाज नवदीप सैनी थे। सैनी ने इस मैच से अपना धमाकेदार अंदाज में डेब्यू किया था। इसके बाद सैनी को वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय टीम की ओर से टी 20 और वनडे मैचों के लिए टीम में शामिल कर लिया गया था। सैनी ने अपने पहले ही ओवर में 2 विकेट झटककर अपनी खूबी का परिचय कराया। सैनी के इस प्रदर्शन को खूब सराहा गया। इसमें पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर भी थे उन्होंने बिशन सिंह बेदी और चेतन चौहान को निशाने पर लेकर लिखा था, “भारतीय टीम में पहली पारी खेलने के लिए नवदीप सैनी तुम्हें बधाई। तुमने गेंदबाजी से पहले ही बिशन सिंह बेदी और चेतन चौहान के विकेट गिरा दिए। टीम इंडिया में तुम्हारा डेब्यू देखकर उनके मिडिल स्टंप उखड़ गए हैं, क्योंकि खेल के मैदान में उतरने से पहले ही उन्होंने तुम्हारा शोक सन्देश लिख दिया था।” शर्म की बात है!!!” 

राजनीति की पिच पर भी खूब चमके चेतन

चेतन मूल रूप से बुलन्दशहर के रहने वाले थे, इनके पिता फौजी थे। परिजन मुरादाबाद के मूढ़ापाण्डे में ननिहाल में बस गए। क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने के बाद चेतन ने राजनीति के मैदान में भी अपने पद चिन्ह छोड़े। अस्सी के दशक तक इंडियन क्रिकेट में अहम स्थान रखने वाले चेतन चौहान ने सियासत में आने की सोची भी नहीं थी लेकिन अपने मित्रों के जोर देने पर सन् 1991 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा से बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतरे और अपने पहले ही चुनाव में सांसद बने। चेतन न केवल कांग्रेस सरकार में भाजपा का कमल खिलाने में कामयाब रहे बल्कि अमरोहा में बीजेपी का खाता खोलने में भी सफल रहे। हालांकि अगले लोकसभा चुनाव 1996 में चेतन को 2.10 लाख मतों के साथ सपा के प्रताप सिंह से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 1998 के लोकसभा चुनाव में वह बसपा प्रत्याशी आले हसन को शिकस्त देने में सक्षम रहे। वहीं अगले लोकसभा चुनाव 1999 में बसपा के राशिद अल्वी के सामने 2.44 लाख मत पाकर पराजित हुए। चेतन ने 2004 में एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमाई लेकिन असफल रहे। 

जब चेतन ने कहा अब गेंद जनता के हाथ में है

 वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन था और सीट रालोद के पास थी। ऐसे में पार्टी ने चेतन चौहान को दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया। चेतन का यहां मुकाबला दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के साथ था। चुनाव प्रचार के दौरान जब संदीप से पत्रकारों ने चेतन के खिलाफ उनकी टक्कर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि “चेतन चौहान अच्छे उम्मीदवार हैं। क्रिकेट में उन्होंने भारत का मान बढ़ाया है, लेकिन यह तो राजनीति है। मैं उन्हें शुभकामना देता हूँ।” चेतन चौहान से यह पूछने पर कि उनके लिए काफी बड़ी चुनौती है, उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही चुनौतियों का सामना करने के आदी हैं। क्रिकेट में भी उन्होंने काफी चुनौतियों का सामना किया। अब गेंद जनता के हाथ में है।” हालांकि चेतन को इस चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा।वह 2.41 लाख मतों से चुनाव हार गए। 

क्रिकेट के साथ-साथ राजनीति के भी खिलाड़ी रहे चेतन

दिल्ली से लोकसभा चुनाव हारने के बाद जब लगने लगा था कि चेतन चौहान केवल क्रिकेट के ही खिलाड़ी हैं राजनीति के नहीं, ऐसे में चेतन अपने भाग्य के संवरने का इंतजार करते रहे। 8 साल बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले जावेद आब्दी को अमरोहा की नौगांवा सादात से मात देकर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र सिंह बताते हैं कि अपने अन्तिम समय में चेतन चौहान अपनी स्मृति धीरे-धीरे खोने लगे थे। चेतन कोरोना से भी संक्रमित हुए उनका निधन गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ।

 चेतन के अधूरे सपने पूरे करने के लिए पत्नी संगीता चौहान ने संभाली विरासत

29 साल तक बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुकीं संगीता चौहान को अपने पति चेतन चौहान के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए सियासी मैदान में उतरना पड़ा। चेतन के निधन से खाली नौगावां सादात विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगीता चौहान ने सपा प्रत्याशी जावेद आब्दी को 15077 वोट से हराया। इसी के साथ उन्होंने चेतन की राजनीतिक विरासत को भी संभाला। आजादी के 70 साल बाद वह अमरोहा जिले की पहली महिला विधायक बनीं।

सभी अपनी दीपावली अच्छे से मनाएं, कोई नहीं होगा बेरोजगार

अक्टूबर 2019 में यूपी के एडीजी ने बजट बैलेंस करने के लिए 25 हजार होमगार्ड्स की ड्यूटी खत्म करने के आदेश दिए और कहा गया है कि पुलिस और बाकी विभागों ने 32 फीसदी होमगार्ड्स की ड्यूटी काट दी है। कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान इस खबर से बहुत दु:खी हुए तब उन्होंने कहा कि हम इस पूरे मामले को लेकर सीएम योगी से बात करेंगे। होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान ने इस पूरे मामले को लेकर आपात बैठक भी बुलाई थी, जिसमें प्रमुख सचिव होमगार्ड और विभाग के दूसरे आलाधिकारियों भी मौजूद थे।चेतन चौहान का कहना था कि पुलिस में निर्धारित बजट के चलते ऐसा निर्णय लिया गया है। लेकिन कैबिनेट मंत्री चौहान ने आश्वासन दिया कि किसी भी होमगार्ड की नौकरी नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा था कि “सभी अपनी दीपावली अच्छे से मनाएं। कोई भी होमगार्ड बेरोजगार नहीं होगा‌।”

ये उपलब्धियां रहेंगी चेतन के नाम 

चेतन न केवल क्रिकेट और राजनीति में ही दिलचस्पी रखते थे बल्कि समाज के लोगों के लिए मदद करना वह अपना सौभाग्य समझते थे। अमरोहा के पत्रकार बीएस आर्य बताते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अनेक उपलब्धियों को प्राप्त किया है। नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना, अमरोहा में एक खेल स्टेडियम का निर्माण, एक प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, जोया सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना, 151 गांव में प्लांटेशन का श्रेय उन्हीं को जाता है।

(प्रत्यक्ष मिश्रा स्वतंत्र पत्रकार हैं आजकल अमरोहा में रहते हैं।)

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