Sun. May 9th, 2021

देवेंद्र पाल

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दुनिया भर में मानवाधिकारों पर काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया को देश निकाला कोई छोटी ख़बर नहीं है।...

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सड़क से लेकर चौक-चौराहों तक जहां भी आंदोलनकारी किसान बैठे हैं, जाने कहाँ-कहाँ से दूध के बड़े-बड़े बलटोहों में लंगर-पानी...

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नाटककार गुरशरण सिंह जनवादी रंगमंच के पितामह थे। उन्हें सब प्यार से ‘भा जी’ (भाई साहब) कहते थे। वह दोज़ख...

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कोरोनाकालीन राजनीति में सब कुछ बुरा हो रहा है, ऐसा नहीं है। गाहे-बगाहे ‘अंजाम ख़ुदा जाने’ की चेपी लगाए कुछ...

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कभी सुलगी हुई को लहकाने के लिए, कभी लहकी हुई को भड़काने के लिए और कभी भड़की हुई में घी...