Subscribe for notification
Categories: बीच बहस

महज चुनाव में वोट देने भर से नहीं, आंदोलनों से जिंदा रहता है लोकतंत्र

प्रधानमंत्री ने आंदोलन करने वाले किसान नेताओं को आंदोलनजीवी कहा है। उनका मानना है कि आंदोलन करना कुछ लोगों का धंधा है। यह बयान उनकी नासमझी दर्शाता है। असल में इंसानी समाज आंदोलन से ही आगे बढ़ा है। रोम के गुलामों ने अपनी गुलामी के खिलाफ स्पार्टकस के नेतृत्व में ईसा के जन्म से पहले विद्रोह किया था। अमेरिका में काले गुलामों ने अपनी गुलामी के खिलाफ आंदोलन किया, जिसके कारण अमेरिका में गृह युद्ध हुआ।

गुलामी प्रथा खत्म हुई, लेकिन गुलामी का समर्थन करने वालों ने अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को गोली मार दी। बाद में अमेरिका में कालों के साथ गोरों द्वारा किए जाने वाले भेदभाव के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ, इसे सिविल राइट्स मूवमेंट कहा जाता है, जिसके नेता मार्टिन लूथर किंग थे, जो गांधी से प्रभावित थे मार्टिन लूथर किंग को भी भेदभाव समर्थकों ने गोली मार दी। हम होंगे कामयाब ‘इसी आंदोलन में गाया जाने वाला गीत का हिंदी अनुवाद है।

पहले मजदूरों से अट्ठारह घंटे काम लिया जाता था। आठ घंटे की शिफ्ट होनी चाहिए, इस मांग को लेकर मजदूरों ने अमेरिका में बड़ी हड़ताल करी। इस प्रदर्शन पर पुलिस ने गोली चलाई। इसमें बहने वाले मजदूरों के खून से झंडे को रंगा गया तब से लाल झंडा क्रांति का प्रतीक माना जाता है, जिसे देख कर संघी बिदकते हैं। रूस में मजदूरों ने जारशाही के खिलाफ आंदोलन किया और मशहूर रूसी क्रांति करी। चीन में माओत्से तुंग के नेतृत्व में किसानों ने क्रांति करी। यूरोप में महिलाओं से बराबरी की मांग करने वाले आंदोलन किए तथा अपने लिए वोट देने के अधिकार के आंदोलन किए।

भारत में समाज की कुरीतियों पर प्रहार करने वाले कवियों और संतों के काम को भक्ति आंदोलन कहा जाता है। भारत में 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन हुआ, जिसमें फांसी चढ़ने वाले साठ प्रतिशत लोग मुसलमान थे। उससे पहले मानगढ़ में हजारों आदिवासी आंदोलन करते हुए मार डाले गए। बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जोरदार उलगुलान आंदोलन किया।

बस्तर में आदिवासियों ने भूमकाल आंदोलन किया, जो इतिहास में अमर है। इसके अलावा भारत में अंग्रेजों ने जब बिहार में किसानों को मजबूर किया कि वे अनाज के बजाय अंग्रेजों के लिए सिर्फ नील उगाएं तो किसानों ने आंदोलन किया, जिसमें गांधी जी शामिल हुए जो चंपारण आंदोलन के नाम से मशहूर है, जिसमें गांधी जी को गिरफ्तार किया गया और बाद में अंग्रेजों को झुकना पड़ा। अंग्रेजों के समय भारत में महिलाओं ने शराब के खिलाफ आंदोलन शुरू किया और आज भी महिलाएं शराब के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करती हैं और शराब बंदी लागू करने के लिए सरकार को मजबूर करती हैं।

अंग्रेजों द्वारा भारत की लूट को रोकने के लिए विदेशी वस्त्रों को जलाने का आंदोलन हुआ। नमक पर अंग्रेजों ने टैक्स लगाया तो उसके खिलाफ गांधी जी पैदल निकल पड़े, जिसे दांडी मार्च कहा जाता है। उसके बाद धरसाना की नमक फैक्ट्री के बाहर सत्याग्रह हुआ, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज किया। एक जत्था गिरता था तो दूसरा जत्था आगे आता था। लोगों के सर फटते गए और लोग आगे बढ़ते ही रहे। यह दृश्य देख कर बीबीसी के पत्रकार ने लिखा कि अंग्रेजों का जो इक़बाल था आज भारत में वो खत्म हो गया। अब भारत की आत्मा आजाद है। इसे अब कोई गुलाम बना कर नहीं रख सकता।

चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारी अपने तरीके से अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। गोलियां खा रहे थे। फांसी चढ़ रहे थे। सुभाष चंद्र बोस, अंग्रेजों के खिलाफ आजाद हिंद फ़ौज बना कर आंदोलित हुए। भारत की आजादी के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में आंदोलन चला, जिसमें नेहरू, पटेल, मौलाना आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे सैंकड़ों नेता शामिल थे।

आजादी के बाद भी आंदोलनों का सिलसिला चलता रहा। किसानों के आंदोलन हुए। मजदूरों के आंदोलन हुए। जयप्रकाश नारायण की अगुआई में संपूर्ण क्रांति आंदोलन हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी शामिल था। मृणाल गोरे के नेतृत्व में पानी के लिए आंदोलन हुआ, जिसके बाद वे पानी वाली बाई के नाम से मशहूर हुईं। नर्मदा घाटी में लोगों ने मशहूर नर्मदा आंदोलन किया। सूचना के अधिकार के लिए आंदोलन हुआ, जिसके बाद कानून बना। पेंशन के लिए आंदोलन हुआ, जिसके बाद विधवा पेंशन और बुजुर्गों के लिए पेंशन का कानून बना।

भोजन के अधिकार के लिए बड़ा आंदोलन हुआ, जिसके बाद सरकारों को बहुत से नए कानून बनाने पड़े। एक साल पहले मुस्लिम महिलाओं की अगुवाई में सीएए-एनआरसी कानूनों के खिलाफ आंदोलन हुआ। अब किसान आंदोलन कर रहे हैं। भाजपा की सरकारें आंदोलन करने वालों पर गुंडा एक्ट लगा रही हैं। उन्हें यूएपीए में फंसा कर जेल में डाल रही हैं।

लोकतंत्र आंदोलनों से ही जिंदा रहता है। लोकतंत्र का यह मतलब नहीं होता कि आप पांच साल के बाद वोट डालिए और बस हो गया लोकतंत्र। सरकार की गलत नीतियों, गलत कानूनों, समाज में चलने वाली गलत बातों के खिलाफ जनता हमेशा आंदोलन करती रहेगी, लेकिन आंदोलनों को विदेशियों का षड़यंत्र, आतंकवाद और धंधा बताना किसी व्यक्ति का अज्ञान या चालाकी ही हो सकती है। जो समाज जिंदा है, वह हमेशा आंदोलनरत रहेगा।

भाजपा यह भूल जाती है कि उसने भी हमेशा आंदोलन किए हैं। उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई के विरोध में आंदोलन के रूप में आरएसएस का गठन किया। उन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया। उन्होंने भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, गांधी और भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया। उन्होंने भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता को खत्म करने के लिए बाबरी मस्जिद तोड़ने का आंदोलन किया और सत्ता हसिल करने में सफल हुए।

जब भाजपा विपक्ष में थी, तब भाजपा के लोग प्याज की माला पहन कर कमीजें उतार कर बैलगाड़ी पर बैठ कर आंदोलन करते थे, इसलिए हमें यह समझना होगा कि समाज को आगे बढ़ाने वाला आंदोलन जरूर होने चाहिए, लेकिन भाजपा जैसे आंदोलन समाज को नुकसान पहुंचाते हैं।

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on February 10, 2021 3:03 pm

Share