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Categories: बीच बहस

वाम, दलित-मुस्लिम आवाज़ों के दमन में लगी है सरकार!

बहुजन नायक लालू प्रसाद यादव का इलाज कर रहे डॉक्टर के वॉर्ड में एक मरीज के कोविड-19 संक्रमित पाए जाने के बाद उनका इलाज कर रहे डॉक्टर उमेश प्रसाद और 22 सहयोगियों की कोविड-19 जांच हुई है। रिपोर्ट का प्रतीक्षा है। जबकि डॉ. उमेश ने खुद को क्वारंटाइन कर लिया है। ऐसे में लालू प्रसाद यादव के संक्रमित होने का ख़तरा बढ़ गया है। बता दें, चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव रिम्स के प्राइवेट वार्ड में भर्ती हैं। लालू यादव किड़नी, हॉर्ट, शुगर जैसी अनेक क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बीमारियों की वजह से लालू यादव पर कोरोना से संक्रमित होने का सबसे ज्यादा खतरा है।

वहीं दूसरी ओर 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दिन दलित स्कॉलर आनंद तेलतुंबडे और गौतम नवलखा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया है। इनकी गिरफ्तारी भीमा कोरेगांव केस में माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में की गई। वहीं एनआरसी-सीएए के विरोध करने वाले कई छात्र-छात्राओं और एक्टिविस्टों को भी गिरफ्तार किया गया है।

इस बीच ‘द वायर’ के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन के साथ-साथ वरिष्ठ वक़ील प्रशांत भूषण और पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन पर भी उनके ट्विटर पोस्ट के लिए मामले दर्ज किए गए हैं और देर सबेर इन्हें भी जेल भेजा जा सकता है। बीते हफ़्ते कश्मीरी लेखक और पत्रकार गौहर गिलानी, पत्रकार पीरजादा आशिक़ तथा फ़ोटो-जर्नलिस्ट मसर्रत ज़हरा पर उनकी सोशल मीडिया पोस्ट के लिए यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया। इनकी गिरफ्तारी भी तय है।

इसके अलावा जामिया की छात्रा व जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी की मीडिया प्रभारी सफूरा जरगर, और इशरत जहाँ को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ ड्रैकोनियन कानून यूएपीए लगाया गया है। सफूरा तीन महीने की गर्भवती हैं। जामिया के ही एक शोधार्थी छात्र मीरान हैदर को भी गिरफ्तार करके यूएपीए लगाया गया है। 28 साल की गुलिफ्शा को भी इस काले कानून के तहत तिहाड़ की सींखचों के पीछे डाल दिया गया है। गुलिफ्शा एमबीए की छात्रा रही हैं और नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में चले सीएए विरोधी आंदोनल में सक्रिय थीं।

गुलिफ्शा।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में भड़के दंगों की जांच कर रही दिल्ली पुलिस जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और जामिया के दो छात्रों के खिलाफ UAPA लगा चुकी है। अब पुलिस इस मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी (JCC), पिजड़ा तोड़ और ऑल इंडिया स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन (AISA) के कई सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उनके रडार पर एक प्रोफेसर और डीयू के कई छात्र और पूर्व छात्र भी हैं।

इसके अलावा जेएनयू के भी कई मौजूदा और पूर्व छात्र निशाने पर हैं। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के कई बहुजन प्रोफेसर भी दिल्ली पुलिस के रडार पर हैं। जल्द ही उनके खिलाफ यूएपीए लगाकर जेल में डालने की ख़बर भी मिलेगी। आइसा दिल्ली विश्वविद्यालय की फायरब्रांड नेता कंवलप्रीत कौर की प्रताड़ना के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने उनका मोबाइल ज़ब्त कर लिया है। इसे कंवलप्रीत को पुलिस के अगले निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार एक ओर तो लॉकडउन थोपकर लोगों से घर में रहने की अपील कर रही है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील कर रही है वहीं दूसरी ओर दलित आदिवासी मुस्लिम लेखकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों के खिलाफ गैर जमानती यूएपीए कानून का इस्तेमाल कर उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने का बंदोबस्त कर रही है। वो भी उस समय जबकि 31 मार्च के बाद से कोर्ट कचहरी बंद हैं।

कश्मीर के पत्रकार जिनके ख़िलाफ़ यूएपीए लगा है।

गुजरात और मध्यप्रदेश की जेलों में फैल रहा कोरोना का संक्रमण

अहमदाबाद के साबरमती जेल में बंद दो कैदियों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। साबरमती जेल के पुलिस उपाधीक्षक डीडी राणा के मुताबिक दोनों हाल ही में जेल आए थे। एहतियात के तौर पर उन्हें जेल के पृथक वार्ड में रखा गया है। इन दोनों कैदियों के नमूनों की जांच की गई और तीन दिन पहले इनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। उनमें से एक हत्या का दोषी है जो 25 अप्रैल को अपनी पैरोल पूरी करने के बाद लौटा था, जबकि दूसरा बलात्कार का आरोपी है जिसे 26 अप्रैल को जेल में लाया गया था। अधिकारी के अनुसार उन दोनों को 27 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने कहा कि जेल के अंदर सभी कैदियों को सप्ताह में दो बार कोविड​​-19 के लक्षणों की जांच के लिए डॉक्टरों द्वारा दिखाया जाता है। बता दें कि साबरमती जेल के मुख्य परिसर में 2400 कैदी बंद है।

वहीं इंदौर मध्यप्रदेश के सेंट्रल जेल के मुख्य द्वार पर ड्यूटी करने वाले प्रहरी सचिन द्विवेदी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जबकि जेल में बंद एक कोरोना संदिग्ध कैदी की उपचार के दौरान कल 1 मई शुक्रवार को मौत हो गई। एक औऱ कोविड-19 संक्रमित मरीज के बढ़ने से सेंट्रल जेल में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है।

सेंट्रल जेल में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने असरावद खुर्द में अस्थाई जेल तैयार की है। बता दें कि इस अस्थायी जेल में 133 कैदियों को क्वारंटाइन किया गया है।

ओवर क्राउडेड जेलों में सोशल डिस्टेंसिंग कैसे मेंटेन होगी

दुनिया भर में इस बात को लेकर बहस चल रही है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी को देखते हुए कैदियों को जेल से रिहा कर दिया जाना चाहिए। अमेरिका और ईरान की जेलों में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए कम जोखिम वाले कैदियों को रिहा किया जा रहा है।

जबकि भारत में इसके उलट दलित, आदिवासी मुस्लिम विरोधियों को जेल में डाला जा रहा है।

साबरमती जेल।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 1,339 जेलों में करीब 4,66,084 कैदी बंद हैं। ध्यान देने की बात ये है आँकड़ा जेल में बंद सजायाफ्ता कैदियों का है। अंडरट्रायल कैदियों की संख्या इससे 12 गुना ज़्यादा यानि 50 लाख से ज़्यादा है। जाहिर है जेल में क्षमता से अधिक कैदियों को रखने से जेलों की जनसंख्या घनत्व ज़्यादा है। ऐसे में भारतीय जेलों में सोशल डिस्टेंसिंग की कल्पना भी बेमानी है।

जेल कोरोना वायरस के फैलने का कारण बन सकते हैं

17 मार्च 2020 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कोविड-19 संक्रमण के मद्देनज़र जेल में रखे गए क्षमता से ज्यादा कैदियों को कोरोना के खतरे पर चिंता जताते हुए कहा था कि जेल कोरोना वायरस के फैलने का कारण बन सकते हैं।

चीफ जस्टिस बोबडे की बेंच ने कहा था, “सरकार ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए सामाजिक तौर पर दूरी रखने की सलाह दी है। लेकिन जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं, जिससे दूरी रखना मुश्किल है।”

चीफ जस्टिस बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने संक्रामक बीमारियों के जेल जैसी बंद जगहों में फैलने की ज्यादा आशंका संबंधित अध्ययनों का जिक्र करते हुए कहा था, “जेल में कोरोना का संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक है, क्योंकि जेल में रोजाना आरोपी, दोषी और हिरासत वाले लोग लाए जाते हैं। जेल में कई अधिकारियों के अलावा कई विजिटर्स भी आते हैं। इस वजह से कैदियों को वायरस का संक्रमण लगने की आशंका ज्यादा होती है।

बेंच ने जेल के अधिकारियों से पूछा था कि वे कोरोना को फैलने से कैसे रोकेंगे। साथ ही उन्होंने जेल अधिकारियों को कोरोना पर लगाम लगाने की वैकल्पिक योजना देने को कहा था।
भारतीय जेलों में दलित और आदिवासी आबादी में अपनी संख्या से ज्यादा अनुपात में कैद हैं। चाहे अमेरिका जैसा पूँजीवादी सुपर पॉवर देश हो, चाहे जाति व्यवस्था वाला भारत, अश्वेत और दलित आदिवासी समुदाय के लोग अपराधी बनाकर जेलों में ठूंसे हुए हैं।

एमनेस्टी इंडिया के कार्यक्रम निदेशक अस्मिता बसु के मुताबिक जेल की आबादी का दो तिहाई हिस्सा विचाराधीन क़ैदियों का है जिनमें मुस्लिम, दलित आदिवासी समुदाय की संख्या ज़्यादा है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा वर्ष 2019 में जारी (प्रिजन स्टैटिस्टिक्स – 2016) रिपोर्ट में कैदियों के जाति वार और धर्म संबंधित आंकड़े गायब कर दिए गए हैं।

एनसीआरबी की 2015 की प्रिजन स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, उस साल करीब 21 फीसदी कैदी दलित थे, जो देश में उनकी आबादी (16.2 फीसदी) से ज्यादा है। वर्ष 2014 के आंकड़ों के मुकाबले उनकी संख्या में थोड़ी वृद्धि हुई थी। वहीं आदिवासी कैदियों की संख्या में 2015 में करीब 18 फीसदी (2,805 कैदियों) की बड़ी वृद्धि हुई थी। कुल कैदियों में आदिवासी करीब 14 फीसदी थे, जो देश में उनकी आबादी (8.2 फीसदी) से ज्यादा है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on May 2, 2020 2:57 pm

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