बीच बहस

लोकसभा में किसानों का मुद्दा उठाने के लिए मोर्चे ने की विपक्ष की सराहना

नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद के भीतर किसानों के मामले को उठाने के लिए विपक्ष को धन्यवाद दिया है। उसका कहना है कि इसके पहले उसने सभी सांसदों को एक पीपुल्स व्हिप जारी किया था और एसकेएम के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने कई सांसदों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी। विपक्षी सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में उन मुद्दों को उठाया जिन्हें किसान आंदोलन कई महीनों से उठा रहा है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी सांसदों के नारों के जवाब में आरोप लगाया कि विपक्षी दल महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अन्य वंचित समुदायों और किसानों के बच्चों को मंत्रियों के पद पर पदोन्नत करने का समर्थन नहीं कर रहे हैं।

मोर्चा ने कहा कि नरेंद्र मोदी का बयान वास्तव में निरर्थक है क्योंकि संसद भवन में गूंज रहे नारे किसान आंदोलन से सीधे संसद पहुंचे थे। जो नारे लगाए जा रहे थे, वे हाशिए के नागरिकों के थे, जिन्हें विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक कानूनों और नीतियों का सामना करना पड़ रहा है। एसकेएम ने कहा कि वह प्रधानमंत्री को याद दिलाना चाहता है कि महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, किसानों और ग्रामीण भारत के अन्य लोगों सहित देश के हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सच्चा सम्मान तभी मिलेगा जब उनके हितों की वास्तव में रक्षा की जाएगी। इसके लिए सरकार को तीन किसान विरोधी कानूनों और चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को रद्द करने और ईंधन की कीमतों को कम से कम आधा करने के अलावा सभी किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांगों पर अमल करना चाहिए। अन्यथा बचाव के लिए खोखले शब्द अर्थहीन हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना था कि दिल्ली पुलिस, किसानों की संसद विरोध मार्च की योजनाओं के बारे में स्पष्ट रूप से सूचना होने के बावजूद, इसे “संसद घेराव” करार दे रही है। एसकेएम ने पहले ही सूचित कर दिया था कि संसद की घेराबंदी करने की कोई योजना नहीं है, और विरोध शांतिपूर्ण और अनुशासित होगा। दिल्ली पुलिस जानबूझकर गलत सूचना दे रही है और एसकेएम ने दिल्ली पुलिस को ऐसा करने से बचने को कहा।

इस बीच, सिरसा में सरदार बलदेव सिंह सिरसा का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन आज दूसरे दिन में प्रवेश कर गया। प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांगों, कि सभी मामलों को वापस लिया जाए और गिरफ्तार किए गए किसान नेताओं को तुरंत रिहा कर दिया जाए, को अभी तक पूरा नहीं किया है। हरियाणा पुलिस और प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे किसानों पर राजद्रोह और अन्य गंभीर आरोप लगाने में अपनी हद से आगे बढ़ रही है और यह पूरी तरह से आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है।

चंडीगढ़ की एक नागरिक समिति ने एसकेएम लीगल सेल के प्रेम सिंह भंगू के साथ, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और तीन प्रदर्शनकारियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के संबंध में आज चंडीगढ़ प्रशासन से मुलाकात की। एसएसपी ने आश्वासन दिया कि रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जायेगा और पूरा किया जाएगा। इसमें गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों के लिए जमानत, हाल की घटनाओं के साथ-साथ 26 जून को दर्ज मामलों पर पुनर्विचार और आगे कोई गिरफ्तारी नहीं, शामिल है।

उधर, भाकियू कादियान ने स्पष्टीकरण जारी किया है कि उन्होंने चंडीगढ़ में सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए कोई आह्वान नहीं किया है। न तो एसकेएम और न ही भाकियू कादियान ने ऐसा कोई कॉल किया है, और इस तरह की कॉल के बारे में सोशल मीडिया में प्रसारित की जा रही कोई भी खबर फर्जी है, और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

एसकेएम ने इस बात को चिन्हित किया कि भारत सरकार ने मानसून सत्र के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग विधेयक 2021 (फिर से जारी किए गए अध्यादेश को बदलने के लिए) के साथ-साथ विद्युत संशोधन विधेयक 2021 को विधायी व्यवसाय के तहत सूचीबद्ध किया है। एसकेएम ने सरकार को इन मामलों पर 30 दिसंबर 2020 को प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रति की गई प्रतिबद्धता से मुकरने के खिलाफ चेतावनी दी है।

एसकेएम ने किसान आंदोलन के समर्थकों द्वारा लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर आयोजित विरोध प्रदर्शन का भी संज्ञान लिया है और उसकी सराहना की है। उसने कहा है कि वह लंदन में विरोध प्रदर्शन में, उच्चायोग के बाहर, फुटपाथ पर खुले में सोये प्रदर्शनकारियों से प्रेरणा लेता है।

विभिन्न सीमाओं पर किसानों का विरोध कैंप लगातार बारिश से जूझ रहा है। यहां के किसान बहादुरी और बिना शिकायत के कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। दरअसल वे बारिश पर खुशी जाहिर कर रहे हैं, क्योंकि यह बोई गई खरीफ फसलों के लिए अच्छा है।

भारतीय संसद की घेराबंदी की मांग करने वाले कुछ सोशल मीडिया पोस्टरों की संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा कड़ी और स्पष्ट निंदा की जाती है। जैसा कि 14 जुलाई 2021 को पहले ही कहा जा चुका है, एसकेएम स्पष्ट करता है कि इस तरह की सभी कॉल, असली या नकली, किसान विरोधी हैं, और चल रहे किसान आंदोलन के हित के खिलाफ हैं। एसकेएम इसकी कड़ी निंदा करता है। एसकेएम और प्रदर्शन कर रहे किसानों का इस तरह के कॉल या ऐसे किसी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है।

जारीकर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, हन्नान मुल्ला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहन, शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव

This post was last modified on July 19, 2021 6:59 pm

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