Friday, August 19, 2022

बिहार: गाय के नाम पर मुसलमानों की गिरफ्तारी और राजनीति का बदलता रंग

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दुनिया को धर्म और ज्ञान की रोशनी देने वाला और दुनिया में गणतंत्र की जननी कहे जाने वाले वैशाली जिले के हाजीपुर में बसहा बैल के साथ भिक्षाटन करते छह मुसलमानों को बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। 

पूरा मामला जानिए

बिहार के वैशाली जिले में छह लोग साधु के वेश में बसहा बैल (नंदी, शिवजी की सवारी) के साथ भीख मांग रहे थे। सभी लोगों को बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिए। वजह सभी के सभी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

स्थानीय निवासी रवि सिंह के अनुसार ये सभी युवक साधु बनकर कई दिनों से हाजीपुर के शहरी इलाके में भीख मांग रहे थे। कभी भी कोई गलत हरकत या गलत काम करते हुए नहीं पाए गए। स्थानीय लोग यूं ही जब उनका पता पूछे तो उन्होंने आसानी से अपना पता बता दिया। मुसलमान बताने पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने ऑब्जेक्शन किया फिर थाना भेज दिया। वहीं एक और स्थानीय निवासी सृजन के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में ये सभी झूठ बोलते रहे। हो सकता है वह डरे हुए हों, मगर जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पिटाई का डर दिखाया तो उन्होंने असली पहचान बताई। साथ ही ये सब लोग ठहरते मंदिर में हैं, भजन भी करते हैं लेकिन प्रसाद ग्रहण नहीं करते हैं।

पुरानी परंपरा और खानदानी पेशा है

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और कशिश न्यूज़ के संपादक संतोष सिंह बताते हैं कि, “यूपी में एक जिला है बहराइच!  जहाँ पचास से अधिक मुसलमानों का ऐसा गांव है। जहां वर्षों बरस से मुसलमान अलग-अलग नस्ल के नंदी पालते हैं और संत साधु का वेश धारण कर पूरे भारत में पैदल घूम धूम कर भीख मांगते रहते हैं। ये उन मुसलमानों की पुरानी परंपरा है। मतलब अभी भी बहुत सारी परम्परायें हैं जिसे धर्म के बंधन में बाँध नहीं सकते। साथ ही हिन्दू विकलांग नंदी को रखना शुभ नहीं मानते और ऐसे विकलांग नंदी को हिन्दू यहाँ आकर दे जाते हैं।”

बजरंग दल का अध्यक्ष आर्यन सिंह

वहीं हाजीपुर के एसडीपीओ राघव दयाल ने भी कहा कि हाजीपुर कदम घाट पर कुछ लोग भिक्षा वृत्ति का काम कर रहे थे। वे बसहा रखे हुए थे। आधार कार्ड में पते दर्ज हैं पुलिस उनका वेरिफिकेशन कर रही है। बहराइच पुलिस से संपर्क किया जा रहा है। आगे पूछताछ चल रही है। वहीं गिरफ्तार हुए करीम अहमद (38 वर्ष) कहते हैं कि, “हम लोग मुसलमान हैं। हमारा खानदानी पेशा है। हमारे बाप-दादा, उनके बाप-दादा के समय से काम करते आ रहे हैं। आज ये लोग आए और हम लोगों को मारे-पीटे।” करीम अहमद के अलावा सैयद अली, हसन, महबूब, हलीम अहमद और सुबराती शामिल हैं।

बजरंग दल का सुनिए

बजरंग दल के कार्यकर्ता आर्यन सिंह का कहना है कि, “यह लोग जब से साधु बनकर आए हुए हैं तभी से इनके आचार व्यवहार से शक हुआ था तो उनके पीछे गुप्तचर लगाए गए। सावन के पावन माह में भगवान शिव की सवारी नंदी महाराज के साथ इनका पकड़ा जाना बहुत संदेह पैदा करता है।”

गाय के नाम पर राजनीति का बदलता रंग

मैथिली लेखक और पत्रकार आत्मेश्वर झा बताते हैं कि, “बिहार में एक समुदाय है जो नट कहलाता है, जिसमें लोग हिंदू और मुसलमान दोनो होते हैं, इसी तरह जानवर की मदद से अपना रोज़गार चलाते हैं। जड़ी बूटी बेचते हैं, झाड़ फूंक करते हैं। भारत के कई क्षेत्रों में ऐसे लोग मिल जाएंगे। ग़रीब लोगों को तंग करना आर्यन सिंह और उसके संगठन के लोगों की आदत हो गई है।”

जेएनयू के पूर्व छात्र और वकील सुनील ठाकुर बताते हैं कि, “नरेंद्र मोदी के केंद्र में प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता की बागडोर संभालने के बाद गौ हत्या का मामला बढ़ गया है। गौ-रक्षा की राजनीति सीधे-सीधे वोट की राजनीति से जुड़ गई है। जितना बांट सकते हो समाज को, अल्पसंख्यकों को जितना मार सकते हो उतना वोट मिलेंगे।”

मुसलमानों का गाय रखना लव जिहाद

बहराइच!  जहाँ पचास से अधिक मुसलमानों का ऐसा गांव है। वहां बरसों-बरस से मुसलमान अलग अलग नस्ल का नंदी पालते हैं। वहां के बीजेपी के नेता और पूर्व नगर पालिका के चेयरमैन रंजीत बहादुर श्रीवास्तव का कहना था कि, “मुसलमानों के घरों में जो गायें हैं उन्हें वापस ले लेना चाहिए। जब हमारी लड़कियां उनके घर जाती हैं तो हम उसे लव जिहाद का नाम देते हैं तो हम अपनी गऊ माता को उनके घर क्यों जाने दे रहे हैं। इसे भी लव जिहाद ही माना जाना चाहिए।” वाकई गाय पालने वाले उन मुसलमानों को बहराइच के नफरत का असर बिहार में भी देखने को मिला।

(पटना से राहुल की रिपोर्ट।)

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