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यूपी में अब ऐ मुहब्बत मुर्दाबाद! मुर्दाबाद, मुर्दाबाद, ऐ मुहब्बत मुर्दाबाद!

मुगले आजम यदि आज के परिप्रेक्ष्य में बनती तो ऐ मुहब्बत जिंदाबाद गाने के बजाय ऐ मुहब्बत मुर्दाबाद गाना होता। इधर यूपी सरकार लव जिहाद को लेकर अध्यादेश लाई, जिसे राज्यपाल ने शुक्रवार को मंजूरी भी दे दी, उधर शनिवार को बरेली के देवरनिया थाने में लव जिहाद पर पहली एफआईआर दर्ज कर ली गई। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे एफआईआर दर्ज कराने के लिए अध्यादेश का इंतजार हो रहा था। इस अध्यादेश से कथित लव जेहाद पर रोक लगेगी या नहीं यह भविष्य के गर्भ में छिपा है पर इतना निश्चित है कि पुलिस को प्रेमियों के उत्पीड़न का नया धारदार हथियार मिल गया है।

अध्यादेश न केवल अंतर-विश्वास विवाह बल्कि सभी धर्म परिवर्तनों को नियंत्रित करता है। यूपी में विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन के एकमात्र प्रयोजन से किया गया विवाह शून्य घोषित माना जायेगा। अध्यादेश सिर्फ अंतर-विवाह विवाहों को प्रभावित नहीं करता है। जो कोई भी एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित होना चाहता है, उसे अध्यादेश द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने लव जिहाद पर पहली एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित छात्रा के पिता की तहरीर पर देवरनिया थाने में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी पिछले एक साल से छात्रा पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। आरोप है कि यहां एक किसान की बेटी को युवक ने पहले अपने प्रेम जाल में फंसाया और फिर निकाह करने के लिये धर्म बदलने का दबाव डालने लगा। इस मामले में नये कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

पीड़ित छात्रा के पिता ने आरोप लगाया है कि प्यार का झांसा देकर आरोपी ने उसकी बेटी पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। आरोपी ने छात्रा को लालच देकर पहले अपने प्रेम जाल में फंसाया और एक साल पहले उसका अपहरण भी कर लिया था, जिसके बाद पुलिस ने छात्रा को बरामद किया था। लेकिन उसके बावजूद आरोपी ने छात्रा का पीछा नहीं छोड़ा और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता रहा। ये बात जब छात्रा के पिता को पता चली तो उन्होंने इसकी शिकायत देवरनिया थाने में की। आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन 3/5 की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।आरोपी की तलाश की जा रही है।

विवाह के लिए धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को धर्म परिवर्तन अध्यादेश लागू किया। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के मसौदे को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दी थी। शनिवार को प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अध्यादेश पर मुहर लगा दी। अध्यादेश के तहत गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन को गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध बना दिया गया है। प्रस्तावना के अनुसार, अध्यादेश का उद्देश्य, गलत बयानी, बल, अनुचित प्रभाव, जबर्दस्ती, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधनों द्वारा या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में गैर कानूनी धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने फैसलों में कहा था कि बालिगों को अपनी पसंद के आदमी के साथ रहना, उनके धर्म की परवाह किए बगैर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन की स्वंतत्रता में निहित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आद‌ित्यनाथ ने हफ्ते भर पहले कथ‌ित ‘लव जिहाद’ पर रोक लगाने के लिए कानून लाने का दावा किया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यादेश के रास्ते उक्त कानून को लागू किया है।

अध्यादेश के तहत, प्रलोभन के आधार पर गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध है। धर्म खंड और प्रलोभन की परिभाषा में कहा गया है कि धर्म’ का तात्पर्य भारत में या उसके किसी भाग में प्रचलित और तत्समय प्रवृत किसी विधि या परंपरा के अधीन यथा परिभाषित पूजा पद्धति, आस्था, विश्वास, उपासना या जीवन शैली की किसी संगठित प्रणाली से है

धर्म परिवर्तन की परिभाषा में कहा गया है कि धर्म परिवर्तक ’[धारा 2 (i)] का अर्थ किसी ऐसे धार्मिक व्यक्ति से है जो किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण का कोई भी कार्य करता है और उसे जिस भी नाम से पुकारा जाये यथा पिता, कर्मकांडी, मौलवी या मुल्ला, आदि।

अध्यादेश के प्रमुख प्रावधानों में से एक धारा 3 है जो निषिद्ध करती है कि कोई व्यक्ति दुव्यपर्देशन, बल, असमयक असर, प्रपीड़न, प्रलोभन के प्रयोग या पद्धति द्वारा या अन्य व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अन्यथा रूप से एक धर्म से दूसरे धर्म मे संपरिवर्तन नहीं करेगा/करेगी या संपरिवर्तन करने का प्रयास नहीं करेगा/करेगी और न ही किसी ऐसे व्यक्ति को ऐसे धर्म संपरिवर्तन के लिए उत्प्रेरित करेगा/करेगी, विश्वास दिलाएगा/दिलाएगी या षड्यंत्र करेगा/करेगी परंतु यह कि यदि कोई व्यक्ति अपने ठीक पूर्व धर्म में पुनः संपरिवर्तन करता है/करती है तो उसे इस अध्याधेश के अधीन धर्म संपरिवर्तन नहीं समझा जाएगा।

धारा 4 के अनुसार, कोई भी पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई, बहन, या कोई अन्य व्यक्ति जो उससे संबंधित है/उसके द्वारा रक्त, विवाह, या गोद लेने से ऐसे रूपांतरण की एक प्राथमिकी दर्ज हो सकती है जो धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

धारा 5 में धारा 3 के उल्लंघन के लिए सजा निर्धारित है। धारा 3 के तहत अपराध का दोषी पाए जाने वाले को 1 से 5 साल की कैद और 15 हजार रुपए तक के जुर्माने की सजा होगी। हालांकि, नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के संबंध में धारा 3 का उल्लंघन, 2 से 10 साल के कारावास की सजा को आकर्षित करेगा और 25,000 रुपये तक के जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

अध्यादेश का सबसे विवादित पहलू यह है कि अंतर-धार्मिक विवाहों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। धारा 6 में कहा गया है कि विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन के एकमात्र प्रयोजन से किया गया विवाह शून्य घोषित होगा-यदि विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन के एकमात्र प्रयोजन से या विपर्ययेन एक धर्म के पुरुष द्वारा अन्य धर्म की महिला के साथ विवाह के पूर्व या बाद में या तो स्वयं का धर्म संपरिवर्तन करके या विवाह के पूर्व या बाद में महिला का धर्म परिवर्तन करके किया गया विवाह। विवाह के किसी पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार के विरुद्ध प्रस्तुत की गयी याचिका पर पारिवारिक न्यायालय द्वारा या जहां पारिवारिक न्यायालय स्थापित न हो, वहां ऐसे मामले का विचारण करने की अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया जाएगा।

अध्यादेश सिर्फ अंतर-विवाह विवाहों को प्रभावित नहीं करता है। जो कोई भी एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित होना चाहता है, उसे अध्यादेश द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। प्रक्रिया अध्यादेश की धारा 8 और 9 में व्याख्या की गई है।

धारा 8 के अनुसार, जो अपने धर्म को परिवर्तित करने की इच्छा रखता है, उसे जिला मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष रूप से अधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अनुसूची में निर्धारित प्रपत्र में एक घोषणा पत्र देना होगा कि वह अपने धर्म को बिना किसी दबाव और किसी भी बल, जबरदस्ती, अनुचित प्रभाव या खरीद के बिना अपनी स्वतंत्र सहमति के साथ बदलना चाहता है।

धर्म परिवर्तन करने वाले धर्मपरिवर्तनकर्ता को जिला मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उसी के लिए नियुक्त अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे रूपांतरण की अनुसूची II में निर्धारित प्रपत्र में एक महीने की अग्रिम सूचना देनी चाहिए।

धारा 9 संपरिवर्तन के बाद की प्रक्रिया को पूरा करती है। यह अनिवार्य है कि एक परिवर्तित व्यक्ति को अनुसूची III में निर्धारित प्रपत्र में घोषणा पत्र को उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट को रूपांतरण की तारीख के 60 दिनों के भीतर भेजना चाहिए, जहां वह व्यक्ति निवास करता है।

अध्यादेश में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान धारा 12 है। इस तथ्य के सबूत का भार कि कोई धर्म संपरिवर्तन दुव्यपर्देशन, बल, असमयक असर, प्रपीड़न, प्रलोभन के माध्यम से या किसी कपटपूर्ण साधन द्वारा या विवाह द्वारा प्रभावित नहीं है, उस व्यक्ति पर जिसने धर्म संपरिवर्तन कराया है और जहां ऐसा धर्म संपरिवर्तन किसी व्यक्ति द्वारा सुकर बनाया गया हो वहाँ ऐसे अन्य व्यक्ति पर होगा।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on November 30, 2020 11:29 am

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