Tuesday, December 6, 2022

भूख, कुपोषण और भुखमरी का सामना कर रहे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था “रॉक बॉटम”  पर पहुंची 

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(पत्रकार तुषार धारा द्वारा कोविड-19 के बाद श्रीलंका में आर्थिक और सामाजिक संकट पर लेखों की श्रृंखला में यह पहला लेख है।वह देश में आंखों देखी वहां की घटनाओं पर रिपोर्ट करने के लिए गए थेसंपादक)

जैसे 31 दिसंबर को नए साल की पूर्व संध्या ढल रही थी, श्रीलंका में लोगों ने सोचा कि सबसे बुरा समय अब खत्म हो गया है। कोविड -19 प्रेरित आर्थिक व्यवधान और लॉकडाउन के दो वर्षों के बाद, कोलंबो में पार्टी करने वालों ने नए साल का स्वागत करने के लिए गॉल फेस ग्रीन्स और रेस्तरां और नाइट क्लबों  में जश्न मनाने की तैयारी की। उम्मीदें बहुत थीं, लेकिन उन्होंने 2022 में सामने आने वाले आर्थिक और राजनीतिक संकट की कल्पना भी नहीं की थी।

कोलंबो में एक लॉजिस्टिक्स और निर्यात फर्म मैक होल्डिंग्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आंद्रे फर्नांडो ने कहा, “यह एक पूर्ण सदमे और आश्चर्य के रूप में आया।” फर्नांडो ने मुझे बताया, “बेरूत में भोजन और ईंधन की कमी के बारे में ह्वाटस्अप और सोशल मीडिया पर बहुत सारी पूर्व-चेतावनी थी और यह कि श्रीलंका को भी इससे गुजरना होगा, लेकिन हमने सोचा कि विपक्षी राजनेता एक खेल खेल रहे हैं।” फर्नांडो ने मई में कोलंबो में एक साक्षात्कार में बताया।

मैक होल्डिंग का मुख्य फ्रेट और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय श्रीलंका के बैंकों में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण अपनी विदेशी डॉलर प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असमर्थ रहा। इसके अलावा, उत्पादकता में कमी आई, क्योंकि कर्मचारियों को बिजली कटौती से निपटने के अलावा भोजन और ईंधन खोजने में मुश्किल हो रही थी।

यह मई में था। अत्यधिक मुद्रास्फीति और कमी के बावजूद , सुपर मार्केट अलमारियों में कुछ भोजन था और लोगों को केवल 3-4 घंटे के लिए पेट्रोल पंपों के बाहर इंतजार करना पड़ता था।

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह चरमरा गई है। विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) में देश के पास केवल $ 25 मिलियन है, मुश्किल से कुछ दिनों के लिए पर्याप्त आयात कवर। पिछले चार महीनों में इसकी मुद्रा में 80% की गिरावट आई है, जिससे भोजन और दवा और भी महंगी हो गई है। ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकेरा ने संकेत दिया है कि तेल टैंकर “बैंकिंग कारणों” की वजह से श्रीलंका को ईंधन नहीं पहुंचा रहे हैं। अप्रैल के बाद ईंधन की कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी-26 जून को पेट्रोल के लिए LKR 50 और डीजल के लिए LKR 60 की गई थी। पेट्रोल की कीमत अब LKR 470 प्रति लीटर होगी। कोलंबो में मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि उसे अपनी कार भरने के लिए पिछले हफ्ते 12 घंटे लाइन में लगना पड़ा। पेट्रोल पंपों की कतारों में लोगों के मरने की खबरें तक आ रही हैं।

हालांकि, 22 मिलियन आबादी के लिए सबसे बड़ा खतरा तीव्र भूख और भुखमरी है। कोविड -19 महामारी के दो साल, और भोजन, उर्वरक और ईंधन की कीमतों पर यूक्रेन युद्ध के प्रभाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर-विशेष रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उभरते बाजारों में आर्थिक तबाही मचाई है। यमन से लेकर जिम्बाब्वे और ट्यूनीशिया से लेकर इक्वाडोर तक, लोग भोजन और रहने के खर्च के लिए अधिक भुगतान कर रहे हैं और कम भोजन कर रहे हैं। श्रीलंका आर्थिक संकट का सबसे चरम मिसाल है।

मैं कोलंबो में अफ़ज़ल से मिला था, जब हम दोनों ने एक दुकान में हल्की वर्षा से आश्रय ली। यह 30 वर्षीय युवक कोलंबो के एक स्कूल में प्रशासक के रूप में काम करता है और LKR 30,000 प्रति माह पर तीन सदस्यों के परिवार को चलाता है, जिसमें से लगभग दो-तिहाई भोजन पर खर्च हो जाता है। अफ़ज़ल को अपने बेटे की शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा खर्च के लिए भी भुगतान करना पड़ता है। कोविड -19 महामारी ने श्रीलंका में तालाबंदी को प्रेरित किया, जिसने स्कूलों और कॉलेजों को बाधित कर दिया, और दो साल की अनिश्चितता के बाद अफ़ज़ल को लगा कि देश आखिरकार संकट के दिन पार कर लिया है। लेकिन फिर अर्थव्यवस्था का संकट खुलकर सामने आने लगा।

“चावल, सब्जियों और दूध की कीमतें बढ़ रही हैं, और भोजन, ईंधन और दवा की कमी तथा बिजली कटौती है,” उन्होंने कहा। जैसे ही रसोई गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ी अफ़ज़ल ने खाना पकाने के लिए इंडक्शन स्टोव का उपयोग करना शुरू कर दिया।

जून में संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान जारी कर जीवित बचत सहायता (lifesaving assistance) के लिए तत्काल $47.2 मिलियन की मांग की। इसने कहा कि लगभग 22% आबादी को सहायता की आवश्यकता है क्योंकि खाद्य उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 40% से 50% कम है और बीज और उर्वरक की कमी से अगले फसल चक्र को खतरा है। बयान में कहा गया है, “2021 के अंत से कीमतों में काफी उछाल आया है, जिससे परिवारों को भोजन छोड़ने, कम महंगे भोजन खाने या भोजन की मात्रा को सीमित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”

कोविड -19 महामारी से पहले भी लगभग 8.2% आबादी – 1.7 मिलियन लोगों ने मध्यम खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया, जिसे स्वस्थ आहार के लिए अपर्याप्त धन के रूप में परिभाषित किया गया है। लगभग 1% आबादी ने गंभीर खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया। 1950 के दशक में, 7 मिलियन की आबादी वाले देश ने अपना अधिकांश भोजन आयात किया था। 2020 तक, श्रीलंका की आबादी तीन गुना बढ़ गई थी और राष्ट्र ने चावल और कई अन्य खाद्य पदार्थों में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली थी। उदाहरण के लिए, इसने 82 % सब्जियां, 81% दूध, 79% जड़ और कंद और 98% मांस का उत्पादन किया। उन लाभों में से कई तो आर्थिक और राजनीतिक संकट के कारण खत्म हो गए होंगे।

श्रीलंका की समस्याएं सरकारी ऋण और विदेशी मुद्रा बाजारों (foreign exchange markets) में भुगतान संतुलन के संकट के रूप में शुरू हुईं। उच्च मुद्रास्फीति, घरेलू खाद्य उत्पादन में कमी, उर्वरक की कीमतों में वृद्धि और मुद्रा मूल्यह्रास ने इसे एक सामान्यीकृत आर्थिक अस्वस्थता में बदल दिया है। संकट की उत्पत्ति पिछले एक दशक में श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक परिवर्तनों में निहित है। 

लगभग तीन दशक के गृहयुद्ध के बाद, श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय ऋण द्वारा वित्तपोषित ऋण-प्रेरित विकास की शुरुआत की। पैसे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर निर्माण, रियल एस्टेट, पर्यटक बुनियादी ढांचे और सट्टा गतिविधियों के लिए किया गया था। साथ ही चाय और परिधान जैसे निर्यात उद्योग ठप हो गए। श्रीलंका जैसे छोटे देश के लिए आयात हेतु डॉलर में भुगतान करना महत्वपूर्ण है, और देश अपनी विदेशी मुद्रा आय के लिए पर्यटन और प्रेषण पर बढ़ती निर्भरता की ओर अग्रसर था।

2019 में ईस्टर संडे बॉम्बिंग्स ने पर्यटन को नष्ट कर दिया। 2020 में कोविड -19 की शुरुआत से पुनरुद्धार की उम्मीदें धराशायी हो गईं क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और पर्यटकों का आगमन देश में रुक गया। श्रीलंका का चाय और वस्त्र निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ। नवंबर 2019 में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे शासन ने व्यापक कर कटौती की घोषणा की जिससे राजस्व प्रभावित हुआ। जवाब में सेंट्रल बैंक ने नोट छापे। अप्रैल 2021 में सरकार ने उर्वरकों और कृषि रसायनों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। “ऑर्गेनिक्स बाय डिक्टाट” (“organics by diktat”) निर्णय ने चावल और चाय की पैदावार को कम कर दिया। चावल मुख्य अनाज है, जबकि श्रीलंकाई चाय मूल्यवान विदेशी मुद्रा लाती है।

उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति, जो मई 2020 में साल-दर-साल 4% थी, मई 2022 में बढ़कर 39.1% हो गई, जो लगभग 1,000 प्रतिशत की वृद्धि थी। भोजन, 57.4% पर, और परिवहन, 91.5% पर, अति मुद्रास्फीति क्षेत्र में हैं। एडवोकाटा इंस्टीट्यूट का बाथ-करी इंडिकेटर, एक खाद्य मूल्य ट्रैकर, जो चावल और रसेदार के मूल भोजन की कीमत को प्लॉट करता है, मई 2022 में चार लोगों के परिवार के लिए LKR 1938.15 पर था, जो अक्टूबर 2021 में LKR 1222.58 से 58% अधिक था। यह हैं कुपोषण और भुखमरी की रिपोर्टें।

दिसंबर, 2020 और फरवरी, 2021 के बीच श्रीलंका में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 85% उत्तरदाता कोविड -19 महामारी से प्रभावित थे। लगभग 77% ने आय पर प्रभाव की सूचना दी, जबकि फसल की खेती और कटाई घर पर रहने जैसे उपायों (stay at home measures), इनपुट्स खरीदने में असमर्थता और घटी मांग से प्रभावित हुई। आधे परिवार मध्यम (36%) या गंभीर रूप से (14%) खाद्य असुरक्षित पाए गए।

यूक्रेन में युद्ध ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा को बढ़ा दिया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि 1 जून 2022 को मक्का और गेहूं की कीमतें जनवरी 2021 की तुलना में क्रमशः 42% और 60% अधिक थीं। 2022 के पहले चार महीनों में लगभग 90% इक्विटी मल्टिप्लायर्स (EMs) ने 5% से अधिक खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति का अनुभव किया। अर्जेंटीना, इक्वाडोर और लेबनान उन देशों में शामिल हैं, जिन्होंने पिछले दो वर्षों में अपने विदेशी ऋण में चूक की है, और आने वाले समय में और अधिक की आशंका है।

जाफना विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र पढ़ाने वाले अहिलना कादिरगामार ने मुझे बताया कि उनके परिवार ने खाना पकाने के लिए लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। “हमारे पास अभी भी गैस स्टोव है, जिसका उपयोग भोजन को गर्म करने के लिए किया जाता है, लेकिन रसोई गैस की अनुपलब्धता के कारण मुख्य खाना पकाने को लकड़ी के चूल्हे में स्थानांतरित कर दिया गया है,” उन्होंने मुझे कोलंबो में मिलने पर बताया। “हम जैसे लोग, हमारी पृष्ठभूमि के लोग, किसी भी तरह से काम चलाने में सक्षम होंगे। लेकिन उन लोगों का क्या होता होगा जो इस महंगाई को बर्दाश्त नहीं कर सकते?”

(तुषार धारा एक पत्रकार और शोधकर्ता हैं जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मामलों पर लिखते हैं। यह लेख काउंटर करेंट में अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। इस लेख का अनुवाद कुमुदिनी पति ने किया है।)

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