13 अप्रैल 1919, बैसाखी के दिन लगभग 4:00 बजे जनरल डायर लगभग डेढ़ सौ सिपाहियों को लेकर… Read More
संस्कृति-समाज
सारी विपत्तियों का आविर्भाव निरक्षरता से हज्योतिबा फुले ने अपनी पुस्तक ‘गुलामगिरी’ (स्लेवरी) में स्पष्ट लिखा है… Read More
अख़तर पयामी इस बर्रे सग़ीर के (हिंद उपमहाद्वीप) बड़े सहाफ़ी, अज़ीम दानिश्वर और अवामी शायर थे। जिनकी… Read More
बकौल खुद – ‘मेरा विश्वास है कि कथ्य और शिल्प अलग नहीं है। दोनों की सांघातिक इकाई… Read More
‘मेरी आवाज़ सुनो’ तरक़्क़ीपसंद तहरीक से वाबस्ता रहे शायर-नग़मा निगार कैफ़ी आज़मी की जीवनी है। जिसमें इस… Read More
पारसी रंगमंच, 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश रंगमंच के मॉडल पर आधारित था। इसे ‘पारसी रंगमंच’ इसलिए कहा… Read More
अपनी बात शुरू करने से पहले एक बात मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि कविता की समीक्षा/आलोचना… Read More
पिछली सदी का आखिरी दशक भारतीय समाज, राजनीति और मीडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस… Read More
अल्योशा यानी अलिक्सेय मक्सिमाविच पेशकोफ यानी मैक्सिम गोर्की पीड़ा और संघर्ष की विरासत लेकर पैदा हुए। उनके… Read More
वह एक कविता थे, लंबी सी इक तस्वीर थे, खूबसूरत सी वह एक कहानी थे, सुंदर सी… Read More