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अमेरिका की ग्राउंड रिपोर्ट : डरावना बनता जा रहा है कोरोना का निर्दयी मौत नृत्य

न्यूजर्सी (अमेरिका)। विश्व में सर्वाधिक कोरोना संक्रमण अमेरिका में है जहाँ संक्रमित लोगों की संख्या हर रोज़ बढ़ती जा रही है। अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज़ों की बड़ी संख्या मौत की तरफ बढ़ रही है। न्यूयॉर्क प्रदेश में सवा तीन लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। अब तक 25 हज़ार लोग कोरोना की बलि चढ़ चुके हैं। अमेरिका में दूसरे नंबर पर न्यू जर्सी है- एक लाख तीस हज़ार से अधिक संक्रमित और साढ़े आठ हज़ार से ज्यादा मृत…दुखद बात तो यह है कि जल्दी ही अमेरिका वासियों को भारी सदमे झेलने के लिए तैयार रहना है।

ट्रम्प कह रहे हैं, निकट भविष्य में मृतकों की संख्या एक लाख पार कर सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले माह तक रोज़ाना दो लाख से अधिक संक्रमण के मामलों की आशंका, प्रतिदिन 25 हज़ार से अधिक संक्रमण की आशंका का दर्द सहना पड़ सकता है।

अमरीका के दो प्रमुख महानगरों, न्यूयॉर्क और लॉस एंजेलस में, बेघर लोगों की संख्या 70 हज़ार से ज्यादा है। लॉस एंजेलस में बेघर लोगों की बस्तियों में फुटपाथ पर झुग्गी-झोपड़ी की एक मील से भी लम्बी कतार है जिनमें बेघर लोग रहते हैं। न्यूयॉर्क की आबादी 84 लाख है। एक आंकड़े के अनुसार 125 न्यूयॉर्क वासियों में से एक बेघर है। यानी न्यूयॉर्क के लगभग 70 हज़ार स्त्री, पुरुष और बच्चे बेघर-इनमें से चार हज़ार फुटपाथ, सबवे ट्रेन या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रातें बिताने के लिए मज़बूर। न्यूयॉर्क के बेघर लोग सब वे ट्रेनों को आश्रय बनाते हैं, वातानुकूलित डब्बों में रात के समय नींद लेने के लिए।

न्यूयॉर्क मेट्रो सेवा के 2400 कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें 68 की मृत्यु हो गयी और 4,000 क्वारंटाइन हुए। कोरोना के साम्राज्य में अस्पतालों के कर्मचारी रात के समय काम पर जाने के लिए सब वे ट्रेनों का उपयोग करते हैं। लेकिन बेघर लोगों को स्नान या चिकित्सा की सुविधा तो है नहीं। उनके शरीर से आने वाली दुर्गन्ध आस पास यात्रियों को बैठने की इज़ाज़त नहीं देती। अस्पताल कर्मचारी रात के समय सब वे ट्रेनों से सफ़र करें तो कैसे? गवर्नर क्यूमो को जब इसकी सूचना मिली तो उन्होंने रात 1 बजे से प्रातः 5 बजे तक सबवे ट्रेनों का आवागमन बंद करवाया ताकि सभी ट्रेनों को सैनिटाइज़ किया जा सके। न्यू यॉर्क प्रदेश का राज्यपाल स्वयं गया ट्रेन के डब्बों को सैनिटाइज करने! ज़ाहिर है पुलिस अब बेघर लोगों को रात की ट्रेनों में सोने नहीं देगी। ये लोग सरकारी आश्रय या रैन बसेरों में जाना नहीं चाहते क्यों कि वहाँ हालात असुरक्षित हैं, नशीले पदार्थों के सेवन करने वालों का वहाँ राज चलता है ।

इन दिनों अमेरिका के अनेक प्रदेशों में इकोनॉमी खोलने के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं। गर्मी के आगमन की ख़ुशियाँ मनाने लोग समुद्र तटों या पार्कों में जाने को बेताब हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प भी मानसिक तौर अमेरिका को बंधन मुक्त करने के लिए अधीर हो रहे हैं। पिछले दिनों इंटरव्यू में वे तो यहाँ तक संकेत दे चुके हैं….क्या लोग फ्लू से नहीं मरते? नशीली दवाओं से कितने लोग मरते हैं? और दूसरी बीमारियां? कैंसर, दिल, डायबिटीज आदि…

ट्रम्प के तौर तरीकों में विश्वास रखने वाले लोग निजी स्वतंत्रता को सर्वोपरि मानते हैं। कौन सी निजी स्वतंत्रता? लोग संक्रमण से मरते हैं तो क्या हुआ, सब काम धाम छोड़ कर कब तक बैठे रहेंगे? मिशिगन प्रदेश में इकोनोमी खोलने की माँग करते हुए बंदूक़ धारी सरकारी इमारतों में घुस गए। आखिर बंदूकें रखना, उनका खुलेआम प्रदर्शन  करना अमेरिका के संविधान में निहित मौलिक अधिकारों में शामिल है। ट्रम्प ने कहा: ये अच्छे लोग हैं!

ये अच्छे लोग सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं, जैसे कह रहे हों -खोल दो अमेरिका के बंद दरवाज़े! मरने वाले तो मरते ही रहेंगे ।

जॉर्जिया प्रदेश (जिसकी राजधानी एटलांटा है) में राज्य सरकार को बाल काटने के सैलून खोलने पड़े। टेक्सास, विस्कॉन्सिन और अब न्यू जर्सी में धीरे-धीरे शॉपिंग मॉल, पार्क, समुद्र तटों के प्रवेश द्वार खुलने लगे हैं।

एडिसन नगर में, जहाँ मैं रहता हूँ, मेनलो पार्क नामक सुप्रसिद्ध शॉपिंग माल है, जहाँ थैंक्स गिविंग और क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान पार्किंग की जगह नहीं मिलती । माल के निकट वार वेटरन यानी भूतपूर्व सैनिकों की देखभाल के लिए निर्मित विशाल आवासीय परिसर भी है। द्वितीय विश्व युद्ध, या वियतनाम  युद्ध के अमेरिकी सैनिक रहते हैं, जो कि अब वृद्धावस्था में पहुँच चुके हैं। सरकारी सहायता से चल रहे वेटरन्स होम (भूतपूर्व सैनिक निवास) में रह रहे इन वृद्ध सैनिकों की देखभाल किस तरह हो रही है इसका अंदाज़ा एडिसन नगर परिसर की दुर्व्यवस्था से ज़ाहिर होता है। एक स्थानीय टीवी चैनल के अनुसार परिसर में एक ही कमरे में कोरोना पॉजिटिव मरीज़ के साथ निगेटिव मरीज़ को रखा जाता था। 50 भूतपूर्व सैनिकों की संक्रमण से मौत हो गयी, 198 संक्रमित हुए।

अमेरिका में ऐसे स्वास्थ्य केन्द्रों या नर्सिंग होम में रहने वाले हज़ारों लोग संक्रमित हुए। अमेरिका के विभिन्न राज्यों में बने नर्सिंग होम में 20 हज़ार संक्रमित लोगों की मौतें हो चुकी हैं। ये लोग इस देश के बुज़ुर्ग हैं, जो अपने अंतिम दिन व्यतीत कर रहे हैं इन तथाकथित स्वास्थ्य केन्द्रों में ।

इस सप्ताह न्यू जर्सी के डेमोक्रेटिक गवर्नर फिल मर्फी ने पार्क के दरवाजे खोल दिए। एडिसन के पर्पियनी पार्क में एक बड़ा सा तालाब है, जिसमें पानी के पक्षी दिन-रात चहलक़दमी करते हैं। तालाब के चारों तरफ़ टहलने के लिए रास्ता बनाया गया है। मैंने सोचा-देखें अपने पार्क किस हालत में हैं। पार्क के प्रवेश द्वार पर पुलिस ने  रुकावट हटा दी है। कुछ लोग तालाब की परिक्रमा करते दिखे।

पास के बैंक परिसर में एटीएम से पैसा निकालने या चेक जमा करने के लिए गाड़ियों की लम्बी क़तार देखी। मैं अपने साथ सैनिटाइज़र नैप्किन ले गया था। एटीएम मशीन में कार्ड डालने के पूर्व मशीन के स्क्रीन को पोंछा, कार्ड को भी पोंछा, फिर पैसे निकाले। पता नहीं यह वायरस कहाँ बैठा हो?

थोड़ी दूर पर न्यू जर्सी के मोटर वाहन विभाग का कार्यालय भी है। यहाँ ड्राइवर लाइसेन्स बनाए जाते हैं, या उन्हें नवीकृत किया जा सकता है। आम तौर पर इस कार्यालय के पार्किंग मैदान में गाड़ियों की भरमार होती है। इन दिनों कार्यालय बंद होने के कारण पार्किंग मैदान एकदम ख़ाली है। पिछले दिनों राज्य सरकार ने यहाँ कोरोना टेस्टिंग केंद्र खोलने की घोषणा की थी। वहाँ देखा पुलिस कि एक इमरजेंसी गाड़ी के सिवा और कोई वाहन नहीं था । क्या यही टेस्टिंग स्थल है?  कहाँ गए जाँच कराने वाले और जाँच करने वाले?

एडिसन नगरपालिका कोरोना संक्रमण रोकने के लिए क्या कर रही है, इसकी कोई जानकारी नागरिकों को नहीं मिलती। मेयर या नगरपालिका प्रशासन की तरफ़ से कोई सूचना प्राप्त नहीं हो रही। नगरपालिका का पक्ष जानने के लिए कि मैंने नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पत्र लिखा है, उनके जवाब का इंतज़ार है। प्रशासनिक उपेक्षा के मामले में क्या अमेरिका, क्या भारत, सब जगह नौकरशाही का बोलबाला है।

एडिसन के सुपर बाज़ार, जैसे कोसको, वॉलमार्ट, शाप राइट ज़रूर खुले हैं, लोग शॉपिंग करने जा भी रहे हैं, लेकिन यह जग ज़ाहिर है कि संक्रमण इन्हीं बाज़ारों में अधिकतम है। एडिसन में एमाजोन का बहुत बड़ा गोदाम है, जहाँ सैकड़ों कर्मचारी ऑनलाइन शॉपिंग का सामान पैक करते हैं। अमेरिका में कुल ऑनलाइन शॉपिंग का पचास प्रतिशत एमाजोन से वितरित होता है जहाँ के गोदामों में कार्यरत लोगों के लिए पर्याप्त सुरक्षात्मक कवच, जैसे कि मुख ढँकने के लिए मास्क या दस्ताने उपलब्ध नहीं हैं।

भारतीय खाद्य पदार्थों की बिक्री जिस दुकान में होती है, वहाँ चहल पहल है। आख़िर राशन की ज़रूरत सबको है। ऑनलाइन ख़रीदारी की अपनी सीमाएँ हैं। ऑनलाइन ख़रीदारों की संख्या ज़्यादा होने के कारण ख़रीदारी कठिन हो गयी है। बाज़ार तो जाना ही पड़ेगा, ख़तरे मोल लेने ही पड़ेंगे, आवश्यक है कि सावधानियाँ बरती जायँ।

कोरोना सहायता के लिए तीन ट्रिलियन डालर की धनराशि अमेरिकी सरकार ख़र्च कर चुकी है। छोटे उद्योग धंधों को इससे ज़रूर राहत मिलेगी। लेकिन यह पैसा खा पीकर जल्दी ही समाप्त होने वाला है। उसके बाद क्या और पैसा सरकार निकालेगी ख़ज़ाने से? शायद हाँ, क्यों कि महामारी तो रूकने का नाम नहीं ले रही, उल्टे साल के बाक़ी महीनों में इसके और फैलने की आशंका है, ऐसी भविष्यवाणी की गयी है ।

रोज़ाना हज़ारों मौतें और संक्रमण का सिलसिला! कोरोना वायरस का निर्दयी नृत्य और भी डरावना बनता जा रहा है।

(अशोक ओझा पत्रकार रहे हैं और आजकल अमेरिका के न्यूजर्सी में रहते हैं।)

This post was last modified on May 9, 2020 4:43 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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