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तानाशाह मोदी! किसान, मजदूर और आम आदमी की रोटी मत छीनिए: वकील ने सुसाइड नोट में कहा

जैसे-जैसे किसान आंदोलन की समयावधि लंबी खिंचती जा रही है आंदोलन में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज़ की जा रही है।  इसी कड़ी में आज रविवार की सुबह आंदोलन में शामिल अमरजीत सिंह नामक एक वकील ने हरियाणा के बहादुरगढ़ में जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली। जहरीला पदार्थ खाने के बाद पीड़ित को पीजीआई रोहतक ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई। मरहूम के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करके लिखा गया है। सुसाइड नोट में मरहूम वकील अमरजीत सिंह ने तीनों कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताया है और नरेंद्र मोदी से कहा है कि- “किसान मजदूर और आम आदमी की रोटी मत छीनिए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एडवोकेट अमरजीत का सुसाइड नोट अंग्रेजी भाषा में है। उन्होंने सबसे ऊपर हेडिंग की शक्ल में लिखा है कि मोदी, तानाशाह को पत्र। भारत के आम नागरिकों ने आपको पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता अपने जीवन को सुरक्षित करने और उसे समृद्ध बनाने के लिए दिया था। स्वतंत्रता के बाद आम लोग आपके प्रधानमंत्रित्व काल में एक बेहतर भविष्य की अपेक्षा कर रहे थे। लेकिन मुझे पूरे दुख और पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि आप अडानी और अंबानी जैसे विशेष समूह के प्रधानमंत्री बन गए।…..कुछ पूंजीपतियों की इच्छा को पूरा करने के लिए आपने पूरी जनता और कृषि को बर्बाद कर दिया जो भारत की रीढ़ है।

उन्होंने लिखा है कि कुछ पूंजपतियों के लिए कृपया किसानों, मजदूरों और आम लोगों की रोजी-रोटी मत छीनिए और उन्हें सल्फर खाने के लिए मजबूर मत कीजिए।

उन्होंने कहा कि सुनिये लोगों की आवाज ईश्वर की आवाज होती है। आगे उन्होंने लिखा है कि वह तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के समर्थन में बलिदान दे रहे हैं। टाइप किए इस पत्र के नीचे हस्ताक्षर के साथ हरे रंग की स्याही वाले पेन से 18 दिसंबर की तारीख लिखी है। उन्होंने पंजाबी में हाथ से लिखी कुछ पंक्तियों में देश की न्यायपालिका के प्रति भी निराशा व्यक्त की है।

अमरजीत सिंह पंजाब के फाजिल्का जिले के जलालाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य थे और अपने साथी आंदोलनकारियों के साथ नयागांव चौक के निकट धरनारत थे। बता दें कि टिकरी बॉर्डर से करीब सात किलोमीटर दूर पकौड़ा चौक के पास किसान आंदोलन में शामिल वकील अमरजीत सिंह ने आज सुबह जहरीला पदार्थ निगल लिया। उनकी हालत बिगड़ती देख साथी उन्हें तुरंत (करीब 9 बजे) बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल लेकर गए। जहाँ प्राथमिक इलाज देने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इससे पहले 16 दिसंबर को दिल्ली हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल संत बाबा राम सिंह ने गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने भी अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह किसानों की हालत देखकर दुखी हैं। साथ ही उन्होंने लिखा था कि वो किसानों के हक़ में अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। पंजाबी भाषा में लिखे उनके सुसाइड नोट का तर्जुमा हिंदी में यूँ है-“

किसानों का दुख देखा है अपने हक के लिए

सड़कों पर उन्हें देखकर मुझे दुख हुआ है
सरकार इन्हें न्याय नहीं दे रही है
जो कि जुल्म है
जो जुल्म करता है वह पापी है

जुल्म सहना भी पाप है
किसी ने किसानों के हक के लिए तो किसी ने जुल्म के खिलाफ कुछ किया है
किसी ने पुरस्कार वापस करके अपना गुस्सा जताया है
किसानों के हक के लिए, सरकारी जुल्म के गुस्से के बीच सेवादार आत्मदाह करता है

यह जुल्म के खिलाफ़ आवाज़ है
यह किसानों के हक़ के लिए आवाज़ है
वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतेह।

बता दें कि बाबा राम सिंह सिंगड़ा वाले करनाल के निवासी थे हरियाणा और पंजाब ही नहीं और विश्वभर में संत बाबा राम सिंह जी को सिंगड़ा वाले संत के नाम से ही जाना जाता था। वह सिखों की नानकसर संप्रदाय से जुड़े थे । नानकसर संप्रदाय में संत बाबा रामसिंह का बहुत ऊंचा स्थान माना जाता है। काफी दिनों से संत बाबा राम सिंह किसान समस्याओं को लेकर व किसान आंदोलन को लेकर दुखी थे।

वहीं कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन में शामिल किसान भीम सिंह 17 दिसंबर की सुबह ड्रेन में मृत पाये गये थे। भीम सिंह की मौत डूबने से हुई थी। उनकी मौत को साथियों द्वारा खुदकुशी बताया गया था। जबकि प्रशासन इसे हादसा बता रहा था। भीम सिंह के पास से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था। भीम सिंह पटियाला के निवासी थे।

वहीं 21 दिसंबर को एक 65 साल के किसान निरंजन सिंह ने दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। हालांकि पंजाब के तरनतारन के रहने वाले निरंजन सिंह नाम के इस शख्स को रोहतक के पीजीआईएमएस ले जाया गया जहाँ उनकी जान बचा ली गई। निरंजन सिंह के पास से भी एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था। जिसमें उन्होंने लिखा था कि – “घर बैठे जब टीवी पर 3-4 महीनों से अपने भाई-बहन और बच्चों को बिना छत के बारिश, आंधी और धूप के बावजूद पहले रेल की पटरियों पर और फिर सड़कों पर बैठे देख रहा हूं तो, यह सवाल उठ रहा है कि क्या सच में हम इस देश के वासी हैं, जिनके साथ गुलामों से भी बदतर जैसा सलूक किया जा रहा है?

आज जब आ कर खुद देखा तो यह सब देखा नहीं गया। हमारे 9वें गुरू श्री तेग बहादुर साहिब ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई थी और बलिदान दिया था और इसलिए मैं अपने प्राणों का बलिदान दे रहा हूं ताकि गूंगी बोली और अंधी सरकार के कानों तक आवाज पहुंच सके।”

बता दें कि 21 दिसंबर को सिखों के नवें गुरु तेग बहादुर सिंह का शहादत दिवस था। जिंदा बचने के बाद निरंजन सिंह ने बयान देते हुए कहा था कि – “उन्होंने कहा, “मैं फिलहाल ठीक महसूस कर रहा हूं। सामान्य तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने वाले के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज करती है। मेरे मामले में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए।’ उन्होंने पूछा कि अगर किसान मर गए तो बाकी लोग कैसे जिएंगे। बता दें कि देश भर में किसान केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।”

वहीं 19 दिसंबर को दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन से वापस लौटे किसान कुलबीर ने 20 दिसंबर को फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया था। पारिवारिक सदस्यों के मुताबिक कुलबीर के पास सवा दो एकड़ जमीन थी और उस पर नौ लाख रुपये का कर्ज है। कुलबीर के बेटे संदीप सिंह ने बताया था कि कृषि कानून को लेकर उसके पिता बेहद चिंतित थे। दिल्ली बार्डर पर किसानों का सहयोग करने के लिए वो 11 दिसंबर को धरने में शामिल होने गए थे। नौ दिन आंदोलन में रहने के बाद वह शनिवार को ही गांव लौटे थे। आंदोलन से लौट कर उनके पिता काफी मायूस थे। उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन का केंद्र सरकार पर जरा भी असर नजर नहीं रहा। वह रविवार रात गेहूं की फसल को पानी लगाने की बात कह कर खेतों में चले गए थे। सोमवार सुबह उसका शव खेतों में लगे पेड़ से झूलता मिला।

20 दिसंबर को किसान आंदोलन में 20 दिन तक भाग लेने के बाद घर लौटे नौजवान किसान गुर लाभ सिंह ने सल्फास की गोली खाकर आत्महत्या कर लिया। गुर लाभ सिंह बठिंडा जिले के गांव दयालपुरा मिर्ज़ा का रहने वाला था। वह दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन से दो दिन पहले शुक्रवार देर शाम अपने घर लौटा था। शनिवार की सुबह वह अपने खेतों पर टहलने निकले और वहीं जहर खाकर आत्महत्या कर ली। गुर लाभ सिंह की उम्र महज 22 साल थी। गुर लाभ सिंह अपने क्षेत्र का अच्छा खिलाड़ी माना जाता था।

आंदोलन से लौटे होशियारपुर के किसान की हार्टअटैक और तलवंडी साबो के किसान की ठंड से मौत हो गई। एक महीने से कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली किसान आंदोलन में गए होशियारपुर जिले के गांव रड़ा के एक किसान की घर वापसी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतक किसान की पहचान भूपिंदर सिंह पुत्र मोहन सिंह (48) निवासी रड़ा के रूप में हुई है।

जबकि तलवंडी साबो के गांव भागीवांदर के गुरप्यार सिंह (61) की ठंड लगने से शुक्रवार देर रात घर में मौत हो गई। वह 20 दिनों से टिकरी बार्डर पर सेवा निभा रहे थे। उन्हें मोर्चे में रहते ही ठंड लग गई। गुरुवार को हालत गंभीर होने पर घर लाया गया, जहां शुक्रवार देर रात उनका देहांत हो गया।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 27, 2020 9:20 pm

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