जीने के मूल अधिकार में भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अधिकार शामिल: सुप्रीम कोर्ट

Estimated read time 2 min read

उच्चतम न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि देश भर के तमाम राज्य वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम 31 जुलाई तक लागू करें। जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीने के मौलिक अधिकार की व्याख्या मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार को शामिल करने के लिए की जा सकती है, जिसमें भोजन का अधिकार और अन्य बुनियादी आवश्यकताएं शामिल हो सकती हैं। मंगलवार 29 जून 2021को दिए अपने फैसले में पीठ ने कहा कि गरीब लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना सभी राज्यों और सरकारों का बाध्य कर्तव्य है।

पीठ ने राज्यों को कहा है कि जब तक कोविड महामारी की स्थिति बनी रहती है तब तक वह कम्युनिटी किचन चलाएं और प्रवासी मजदूरों को सूखा राशन मुहैया कराएं। इस दौरान मजदूरों का डेटा तैयार करने में हो रही देरी पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से प्रवासी मजदूरों का डेटा तैयार करने में हो रही देरी और लापरवाह रवैये को माफ नहीं किया जा सकता है। पोर्टल में केंद्र की ओर से यह देरी दर्शाती है कि वह प्रवासी मजदूरों के लेकर फिक्रमंद नहीं है।

पीठ ने यह फैसला एक स्वत: संज्ञान मामले में पारित किया गया, जिसे उच्चतम न्यायालय ने मई 2020 में प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं से निपटने के लिए लिया था। अदालत ने कहा: 14. हमारा संविधान यह आदेश देता है कि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण कमजोर वर्ग को सामाजिक और आर्थिक न्याय हासिल करके लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए है ताकि आय और उद्यम में असमानताओं को कम करने के लिए और स्थिति में असमानता को दूर करने के लिए आम सेवा की जा सके। संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा गारंटीकृत जीवन का अधिकार प्रत्येक मनुष्य को कम से कम जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओं तक पहुंच के साथ गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है। गरीब व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना सभी राज्यों और सरकारों का बाध्य कर्तव्य है।

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि भारत के संविधान में भोजन के अधिकार के संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है पीठ ने कहा कि मनुष्य के भोजन के अधिकार के संबंध में विश्व भर में जागरूकता आई है। हमारा देश कोई अपवाद नहीं है। हाल ही में, सभी सरकारें कदम उठा रही हैं और यह सुनिश्चित करने के उपाय कर रही हैं कि कोई भी इंसान भूख से प्रभावित न हो और कोई भूख से न मरे। विश्व स्तर पर खाद्य सुरक्षा की मूल अवधारणा यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोगों को अपने सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए हर समय बुनियादी भोजन प्राप्त हो। भारत के संविधान में भोजन के अधिकार के संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के मौलिक अधिकार की व्याख्या मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार को शामिल करने के लिए की जा सकती है, जिसमें भोजन का अधिकार और अन्य बुनियादी आवश्यकताएं शामिल हो सकती हैं।

पीठ ने केंद्र सरकार, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय) को प्रवासी मजदूरों के लिए राज्यों से सूखे खाद्यान्न के वितरण के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की मांग के अनुसार खाद्यान्न आवंटित और वितरित करने का निर्देश दिया। पीठ ने राज्यों को प्रवासी मजदूरों को सूखे राशन के वितरण के लिए एक उपयुक्त योजना लाने का भी निर्देश दिया, जिसके लिए राज्यों को केंद्र सरकार से अतिरिक्त खाद्यान्न के आवंटन के लिए पूछने के लिए खुला होगा, जो कि ऊपर दिए गए निर्देश के अनुसार राज्य को अतिरिक्त खाद्यान्न प्रदान करेगा।

पीठ ने स्वत: संज्ञान मामले का निपटारा करते हुए व्यापक निर्देश जारी किये हैं। पीठ ने कहा है कि केंद्र सरकार को असंगठित मजदूरों/प्रवासी कामगारों के पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के परामर्श से पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया जाता है। पीठ ने निर्देश दिया हैं कि केंद्र सरकार के साथ-साथ संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय डेटा बेस (एनडीयूडब्ल्यू परियोजना) के तहत पंजीकरण के लिए पोर्टल की प्रक्रिया को पूरा करने के साथ-साथ इसे लागू करने के लिए भी, जो हर तरह से 31जुलाई 2021 के बाद नहीं होगा। असंगठित मजदूरों/प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए, लेकिन 31दिसम्बर 2021 के बाद नहीं।

पीठ ने केंद्र सरकार, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्रालय को (उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण) प्रवासी मजदूरों को सूखे अनाज के वितरण के लिए राज्यों से अतिरिक्त खाद्यान्न की मांग के अनुसार खाद्यान्न आवंटित और वितरित करने के लिए निर्देश दिया है। पीठ ने प्रवासी मजदूरों को सूखे राशन के वितरण के लिए एक उपयुक्त योजना लाने का निर्देश दिया हैं, जिसके लिए राज्यों के पास केंद्र सरकार से अतिरिक्त खाद्यान्न के आवंटन के लिए पूछने के लिए खुला होगा, जो कि, जैसा कि ऊपर निर्देशित किया गया है, प्रदान करेगा। राज्य अतिरिक्त खाद्यान्न उपयुक्त योजना पर विचार करेगा और लाएगा, जिसे 31जुलाई 2021 को या उससे पहले लागू किया जा सकता है। ऐसी योजना वर्तमान महामारी (कोविड -19) जारी रहने तक जारी और संचालित सकती है।

जिन राज्यों ने अभी तक “वन नेशन वन राशन कार्ड” योजना लागू नहीं की है, उन्हें 31जुलाई 2021 से पहले इसे लागू करने का निर्देश पीठ ने दिया है।  केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 9 के तहत राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के तहत कवर किए जाने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या को फिर से निर्धारित करने के लिए अभ्यास कर सकती है।

 पीठ ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अधिनियम, 1979 के तहत सभी प्रतिष्ठानों को पंजीकृत करने और सभी ठेकेदारों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया है और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रवासी श्रमिकों का विवरण देने के लिए ठेकेदारों पर लगाए गए वैधानिक कर्तव्य का पूरी तरह से पालन किया जाए। पीठ ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को उन प्रमुख स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाने के लिए निर्देशित किया है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पाए जाते हैं और जिनके पास दिन में दो भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। कम से कम महामारी (कोविड-19) जारी रहने तक सामुदायिक रसोई का संचालन जारी रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि प्रवासी मजदूरों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया काफी धीमी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को निश्चित तौर पर तेज किया जाए ताकि कोविड के समय इन प्रवासी मजदूरों को बेनिफिट वाली योजनाओं का लाभ मिल सके। अदालत ने कहा कि प्रवासी मजदूरों और गैर संगठित क्षेत्रों के मजदूरों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तेज की जाए।

इससे पहले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पेपर पर सरकार कह रही है कि हजारों करोड़ आवंटन किया गया है। लेकिन मुद्दा ये है कि क्या ये असल लाभार्थियों तक पहुंच रहा है? ऐसे में आपको (सरकार) इस पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करना होगा। अदालत इस बात को लेकर चिंतित है कि संबंधित लाभार्थियों तक लाभ जल्दी पहुंचे। देश के महानगरों में चाहे कोरोना की पहली लहर हो या दूसरी, लॉकडाउन का एलान होने के बाद बड़ी तादाद में लोग अपने-अपने गृह नगर लौटने लगे थे। दिल्ली से सटे ग़ाज़ियाबाद, गुड़गांव और मुंबई से भारी तादाद में लोग घरों की ओर चल पड़े थे। बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी मज़दूरों ने बड़ी संख्या में पलायन किया था। वन नेशन वन राशन  योजना के तहत सभी राशन कार्ड धारकों को देश भर में चाहे वे कहीं भी रहते हों, अपना हक ले सकते हैं। उन्हें यह हक़ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दिया गया है।

 (वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

You May Also Like

More From Author

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments