Monday, October 25, 2021

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नेपाल में राष्ट्रपति ने संसद भंग किया; 12 और 19 नवंबर को होंगे मध्यावधि चुनाव

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नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने वहां की प्रतिनिधि सभा (संसद) को भंग कर दिया है। राष्ट्रपति ने ये बड़ा कदम नेपाल में सरकार बनाने को लेकर मचे घमासान के बीच उठाया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और विपक्षी दलों दोनों ने ही राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र सौंपकर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था। मगर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने दोनों के दावों को खारिज कर मध्यावधि चुनाव की घोषणा कर दिया। नेपाल में अब 12 और 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होंगे। 

गौरतलब है कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री ओली राष्ट्रपति कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के अनुसार पुन: प्रधानमंत्री बनने के लिए अपनी पार्टी सीपीएन-यूएमएल के 121 सदस्यों और जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल (जेएसपी-एन) के 32 सांसदों के समर्थन के दावे वाला पत्र सौंपा।

प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति कार्यालय पहुंचने के कुछ देर बाद ही नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री पद का दावा पेश करने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं के साथ राष्ट्रपति के कार्यालय पहुंचे थे जहां उन्होंने 149 सांसदों का समर्थन होने का दावा किया था। 

हिमालयन टाइम्स की ख़बर के मुताबिक विपक्षी गठबंधन के नेता 149 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ सरकार बनाने का दावा करने वाला पत्र राष्ट्रपति को सौंपने के लिए उनके सरकारी आवास ‘शीतल निवास के लिए रवाना हो गए। इस पत्र में शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री बनाने की सिफारिश की गयी है।

बता दें कि 74 वर्षीय देउबा नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वह 1995 से 1997 तक, 2001 से 2002 तक, 2004 से 2005 तक और 2017 से 2018 तक इस पद पर रहे हैं। साल 2017 में आम चुनावों के बाद से ही देउबा विपक्ष के नेता हैं। 

इससे एक दिन पहले यानि गुरुवार 20 मई को ओली सरकार ने राष्ट्रपति भंडारी से सिफारिश की थी कि नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के अनुरूप नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए क्योंकि प्रधानमंत्री ओली एक और बार शक्ति परीक्षण से गुज़रने के पक्ष में नहीं हैं। प्रधानमंत्री ओली को 10 मई को उनके पुन: निर्वाचन के बाद प्रतिनिधि सभा में 30 दिन के अंदर बहुमत साबित करना था। आशंका थी कि अगर अनुच्छेद 76 (5) के तहत नयी सरकार नहीं बन सकी तो ओली अनुच्छेद 76 (7) का प्रयोग कर एक बार फिर प्रतिनिधि सभा को भंग करने की सिफारिश करते।

बता दें कि के पी शर्मा ओली सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष हैं। उन्हें 14 मई को संविधान के अनुच्छेद 76 (3) के अनुसार नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गयी थी। इससे चार दिन पहले ही वह संसद में विश्वास मत में पराजित हो गये थे। नेपाल की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 121 सीटों के साथ सीपीएन-यूएमएल सबसे बड़ा दल है। इस समय बहुमत सरकार बनाने के लिए 136 सीटों की ज़रूरत थी।

वहीं एनसी के वरिष्ठ नेता प्रकाश मान सिंह ने मीडिया को जानकारी दी है कि नेपाली कांग्रेस (NC), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), जनता समाजवादी पार्टी (JSP) के उपेंद्र यादव नीत धड़े और सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के माधव नेपाल नीत धड़े समेत विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने प्रतिनिधि सभा में 149 सदस्यों का समर्थन होने का दावा किया था। ‘माई रिपब्लिका वेबसाइट के अनुसार इन सदस्यों में नेपाली कांग्रेस के 61, सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के 48, जेएसपी के 13 और यूएमएल के 27 सदस्यों के शामिल थे। ‘

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