Subscribe for notification

तेलतुंबडे की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ 10 दलित और बहुजन शख़्सियतों ने लिखा खुला खत, पूरी घटना को बताया राष्ट्रीय शर्म

(मशहूर लेखक और बुद्धिजीवी आनंद तेलतुंबडे कल यानी 14 अप्रैल अंबेडकर जयंती के दिन मुंबई में अपनी गिरफ़्तारी देंगे। ऐसा वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी और उन्हें मुंबई सेशन कोर्ट के सामने समर्पण करने का निर्देश दिया था। तेलतुंबडे की इस गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ देश के 10 दलित और बहुजन नेताओं ने एक खुला पत्र लिखा है। पेश है उनका पूरा खत- संपादक)

अंबेडकर जयंती के मौक़े पर डॉ. आनंद तेलतुंबडे की गिरफ्तारी: एक राष्ट्रीय शर्म

जय भीम,

संयोगवश आने वाली अंबेडकर जयंती के मौक़े पर भारत के सर्वप्रमुख जन बुद्धिजीवियों में से एक और सच्चे लोकतांत्रिक भारत के लिए संघर्ष करने वाली  बाबा साहेब डाक्टर भीम राव अंबेडकर की परंपरा के वाहक आनंद तेलतुंबडे जेल अधिकारियों के सामने समर्पण करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे।वह 14 अप्रैल, 2020 को दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच मुंबई सेशन कोर्ट के सामने समर्पण करेंगे। यह दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों समेत देश के बहुत सारे लोगों के लिए बेहद शर्मनाक है।

यह दिन इस बात को चिन्हित करता है

  • जब यह देश अपने सबसे महान मस्तिष्कों और दिलों में से एक डॉ. अंबेडकर की 129 वीं जयंती मना रहा होगा तो उसी दिन ताकतवर राष्ट्रवादी मशीनरी उस जज़्बे को तोड़ देना चाहती है जो हमारे बीच लोकतंत्र की मशाल को ज़िंदा रखती है;
  • यहाँ तक कि जब दुनिया की सबसे तानाशाह सरकारें कोरोना वायरस के ख़तरे को देखते हुए अपने सभी बंदियों की रिहाई कर रही हैं तब डॉ. तेलतुंबडे जैसे महान विचारकों को बंदी बनाया जा रहा है;
  • तब हम डॉ. तेलतुंबडे जैसे शख़्स के संवैधानिक अधिकारों को दरकिनार करने की इजाज़त देंगे।
  • तब डॉ. तेलतुंबडे की गिरफ़्तारी जातिवादी मनुवादी सत्ता द्वारा दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और अल्पसंख्यक बुद्धिजीवियों के लिए विरोध की अपनी आवाज़ों को न उठाने की एक खतरनाक चेतावनी होगी।

एक ऐसे ‘अपराध’ के लिए जिसका कि कोई भी सबूत नहीं पेश किया गया है, डॉ. तेलतुंबडे की गिरफ़्तारी भारतीय मानस के भीतर बेहद गहरी पैठ बनाए जातिवाद का पर्दाफ़ाश कर देती है।

हम नीचे हस्ताक्षरित लोग सभी दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक नेतृत्व से खड़े होने और बाबा साहब की उस शानदार परंपरा जिसे वह छोड़ गए हैं, का पालन करते हुए न्याय माँगने का आह्वान करते हैं। जैसा कि डॉ. तेलतुंबडे अपनी हाल की किताब “दि रिपब्लिक ऑफ कास्ट” में कहते हैं, “ पीड़ितों का रोष दुनिया को डराता है।” इस मौक़े पर हमें एक साथ मिलकर भारतीय पदाधिकारियों से यह माँग करने का कर्तव्य बन जाता है कि डॉ. तेलतुंबडे को ज़िंदा रहने और पूरी स्वतंत्र भावना के साथ लिखने की इजाज़त दे जो हमारे लोकतंत्र को सजीव बनाता है और डॉ. तेलतुंबडे वही मशाल बने रहें जो शिक्षा, संगठन और आंदोलन के ज़रिये वह एक बेहतर दुनिया और बेहतर भारत के लिए कर रहे हैं।

आइये, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर एकजुट होते हैं।

जय भीम!

हस्ताक्षरकर्ता:

डॉ. थोल थिरुमवलावन, सांसद

संस्थापक अध्यक्ष- विदुथलाई चिरुथैगल काची;

डी राजा, सांसद (राज्यसभा)

महासचिव,  भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी;

जिग्नेश मेवानी, स्वतंत्र विधायक

वडगाम (गुजरात);

डॉ. उदित राज, पूर्व सांसद

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस;

प्रकाश अंबेडकर, पूर्व सांसद

वंचित बहुजन उघाड़ी;

डी. रविकुमार, सांसद

महासचिव, विदुथलाई चिरुथैगल काची;

विनय रतन सिंह

राष्ट्रीय अध्यक्ष, भीम आर्मी भारत एकता मिशन;

नौशाद सोलंकी, एमएलए, गुजरात

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस;

प्रोफ़ेसर डॉक्टर सुजाता सूर्यपल्ली

संयोजक, बहुजन रेजिस्टेंस फ़ोरम, तेलंगाना;

डॉ. राजकुमार चाबेवाल, विधायक

(होशियारपुर, पंजाब)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on April 13, 2020 12:31 pm

Share