तेलंगाना से छत्तीसगढ़ के बीजापुर पैदल लौट रही नाबालिग मज़दूर बच्ची की रास्ते में मौत

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रायपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण (Covid-19) से बचने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का साइड इफेक्ट देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में लाखों की तादाद में मजदूरी करने गए मजदूर अब धीरे-धीरे वापस हो रहे हैं। जिन्हें दीगर राज्यों से वापस लाने का राज्य सरकार के पास कोई कार्य योजना नहीं है। कोरोना की वजह से देश भर में लगे लाॅकडाउन की भयावह और मार्मिक तस्वीर छत्तीसगढ़ के बीजापुर से निकल कर सामने आयी है, यहां 12 साल की एक नाबालिग बच्ची अपने परिवार का पेट भरने के लिए बीजापुर के आदेड गांव से रोजगार की तलाश में तेलंगाना के पेरूर गयी हुई थी। 

लाॅकडाउन 2.0 लगने के बाद वो अपने ही गांव के 11 लोगों के साथ पैदल ही जंगली रास्ते से होते हुए तेलंगाना से बीजापुर के लिए रवाना हुई। तेलंगाना से लगातार 3 दिनों तक पैदल सफर कर 12 साल की जमलो मडकामी छत्तीसगढ़ के बीजापुर के मोदकपाल इलाके में पहुॅंची ही थी कि डीहाइड्रेशन का शिकार हो गयी और अंतत: नहीं बचायी जा सकी।

एक शख़्स का कहना था कि “आवागमन साधन बंद होने का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ रहा है। मजदूरी करने गए मजदूर अब मजबूरी में पैदल चलकर अपने गांवों को पहुंच रहे हैं। कुछ मजदूर तो सड़कों के बजाय नक्सल प्रभावित जगलों से होकर पहुंच रहे हैं।”

प्रवासी मजदूर के मौत कि खबर लगते ही एहतियात के तौर पर प्रशासन ने बच्ची के शव साथ दूसरे प्रदेश यानि कि तेलंगाना से आ रहे मजदूरों को भी क्वारंटाइन कर दिया। 

बच्ची जिसकी मौत हो गयी।

अपनी इकलौती बेटी की मौत की खबर लगते ही पिता आंदोराम मडकम और मां सुकमती मडकम जिला चिकित्सालय बीजापुर पहुंचे। मौत के तीन दिनों बाद आज बच्ची के शव का पोस्टमार्टम बीजापुर में हुआ। जिसके बाद जमलो के शव को उसके मां-बाप को सौंप दिया गया। जमलो के पिता ने मीडिया को बताया कि 2 महीने पहले उनकी मासूम बेटी रोजगार की तलाश में तेलंगाना गयी हुई थी। लाॅकडाउन 2 लगने के बाद गांव के लोगों के साथ पैदल ही वापस लौट रही थी। इसी दौरान उनकी बेटी की मौत हो गयी। मौत की खबर भी उन्हें जमलो के मजदूर साथियों से मिली।

बीजापुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. बीआर पुजारी ने बताया कि तेलंगाना से पैदल लौट रहे मजदूरों के दस्ते में से एक  बच्ची के मौत की खबर लगते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आयी। बच्ची के शव को बीजापुर लाने के साथ ही उनके साथ पैदल सफर कर रहे सभी मजदूरों को क्वरंटाइन कर लिया गया। एहतियात के तौर पर शव का कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल भी भेज दिया गया। जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आयी। डाॅ. पुजारी का कहना था कि गर्मी कि वजह से शरीर में इलेक्ट्रॉल इम्बेलेंस या पानी की कमी होने से बच्ची की मौत हुई होगी। हालांकि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही बच्ची के मौत का असल वजह स्पष्ट हो पायेगी। 

एक नाबालिग को अगर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य में पलायन करना पड़ रहा है, तो ये हमारे सिस्टम की बहुत बड़ी कमजोरी और लापरवाही है। और जमलो की मौत हमारी सरकारों और हुक्मरानों के गालों पर करारा तमाचा है। लेकिन इतनी तादाद में मजदूर अलग-अलग जगहों पर पहुंच रहे हैं कि उनकी जानकारी रखना भी प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।

बस्तर अंचल में ही मजदूरों का एक जत्था जंगली रास्तों से 300 KM पैदल चलकर सुकमा पहुंचा। सुकमा में सबसे ज्यादा संख्या में कोंटा जहां से आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना की सीमा जुड़ती है, से मजदूर आ रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से ही लगातार मजदूरों के आने का सिलसिला जारी है। पलायन कर मजदूरी करने गए ग्रामीण अब मजबूरी में वापस लौट रहे हैं। क्योंकि वहां अपने पैसों से खाना पड़ रहा था, जो पैसे खत्म हो गए। दूसरा रोजगार भी नहीं मिल रहा था। इसलिए मजबूरी में वो लोग पैदल ही लौट आए या फिर कुछ लोग कुछ जगहों से ऑटो पकड़ कर लौटे।

मजबूरी का आलम यह है कि कल करीब 84 लोग घोर नक्सल प्रभावित किस्टाराम, गोलापल्ली जैसे इलाकों से पैदल चलकर पहुंच गए। इधर प्रशासन सभी लोगों के स्वास्थ्य की जांच करवा रहा है और उनको आइसोलेशन में रख रहा है। कोंटा एसडीएम हिमांचल साहू ने बताया कि दूसरे राज्यों से आ रहे मजदूरों की जांच की जा रही है। उन्हें क्वारंटाइन किया जा रहा है।

(जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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