Sunday, October 24, 2021

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भावुकता की आड़ में छुपाई नहीं जा सकती है गवर्नेंस की अक्षमता

राम भरोसे आई सरकार, हाईकोर्ट द्वारा राम भरोसे कह देने पर आहत हो गयी। हुआ यूं कि 17 मई को हाईकोर्ट इलाहाबाद ने कोरोना संक्रमण के संदर्भ में सरकार की बदइंतजामी पर सुनवाई करते हुए कह दिया कि, उत्तर...

क्या दवाई नहीं, ढिलाई नहीं के बीच अनिश्चितकालीन लॉकडाउन से कोविड संक्रमण दूर हो जायेगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल के तीसरे हफ्ते में राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान यह कहा था कि फिलहाल देश में लॉकडाउन नहीं लगने जा रहा। देश को लॉकडाउन से बचाना है, यह आखिरी विकल्प होना चाहिए। उत्तर...

ऐसा लगा कि प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि संबित पात्रा का भाषण हो रहा है!

एक राजनेता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ख्याति’ भले ही मजमा जुटाऊ एक कामयाब भाषणबाज के तौर पर हो, लेकिन उन पर यह 'आरोप’ कतई नहीं लग सकता है कि वे एक शालीन और गंभीर वक्ता हैं!...

‘हिज मास्टर्स वॉयस’ में बदल गया भागवत का संबोधन

यह सच है कि मोहन भागवत के विजया दशमी के कर्मकांडी भाषण का संघ के एक पूर्व कट्टरतावादी प्रचारक की सरकार के काल में भी कोई विशेष सांस्थानिक मायने नहीं है। यह किसी पिटे हुए मोहरे की जोर आजमाइश...

देश कोरा संबोधन नहीं, ठोस समाधान चाहता है: कांग्रेस

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि कोरा संबोधन नहीं, देश ठोस समाधान चाहता है। और पीएम मोदी हैं कि 210 दिन बाद टेलीविज़न पर कोरे...

चायना को छोड़ चना पर जोर, मोदी जी माजरा क्या है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले। पर, क्या वाकई बोले? नहीं, वो नहीं बोले। पर, क्या वाकई नहीं बोले? नहीं, नहीं, वो बोले तो। मगर, जो बोले उसके लिए ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’! कृषि विभाग के मंत्री बोल सकते थे, गृहमंत्री...

राष्ट्र के नाम संबोधन: दर्शन और उपदेश देकर चले गए प्रधानमंत्री जी

दिल-दिमाग लाख मना करे, लेकिन प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन सुनना ही पड़ता है, आखिर वे देश के मालिक जो ठहरे। कहने को भारत में लोकतंत्र है, संसद, कैबिनेट, नौकरशाही, न्याय पालिका और तमाम तथाकथित स्वायत्त लोकतांत्रिक संस्थाएं...

20 लाख करोड़ के पैकेज की हक़ीक़त

जब 12 मई की रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया तब सबकी निगाहें इस इंतजार में थीं कि वे लॉकडाउन के संबंध में आगे की योजना के बारे में कुछ बोलेंगे, दुनिया के इतिहास...

ग़रीबों और मज़दूरों ने प्रधानमंत्री के ‘मन की’ तो सुनी, लेकिन उनकी ‘बात’ कहाँ थी!

प्रधानमंत्री ने 12 मई के अपने राष्ट्रीय के सन्देश में क्या-क्या कहा, ये तो अब तक आप जान ही चुके होंगे। मेरी बात उससे आगे की है। पहली तो यही कि 34 मिनट के भाषण में 2,000 से ज़्यादा...

‘राष्‍ट्र के नाम सम्‍बोधन’ में ‘प्रचार मंत्री’ ने फिर की झूठों की बौछार

पहला झूठ: भारत सरकार ने सही समय पर सही कदम उठा लिया। सफेद झूठ! भारत में पहला केस 30 जनवरी को आया। उस समय भारत ने कुछ एयरपोर्टों पर मात्र तापमान लेना प्रारंभ किया था, न कि उपयुक्‍त स्‍क्रीनिंग...
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जटिल मनःस्थितियों की उलझी हुई कविताएं

कवर के अंतिम पृष्ठ पर कवि का परिचय पढ़ते हुए बहुत प्रभावित हुआ और कुछ ऐसा ही प्रभाव पड़ा...
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