Monday, January 24, 2022

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भारतीय संविधान के मूल तत्वों को बचाने का संकल्प है धनंजय कुमार का शाहकार नाटक ‘सम्राट अशोक’

26 जनवरी, 1950 में संविधान को अपनाकर भारत एक सार्वभौम राष्ट्र के रूप में अवतरित हुआ। विश्व ने भारत के इक़बाल को सलाम किया। भारत में पहली बार जनता को देश का मालिक होने का संवैधानिक अधिकार मिला। संविधान का मतलब...

नब्बेवें जन्मदिन से पूर्व : रोमिला थापर प्राचीन भारतीय अध्ययन की साम्राज्ञी

तीन महीने बाद, 30 नवंबर के दिन भारत की अद्वितीय इतिहासकार रोमिला थापर नब्बे की उम्र में प्रवेश करेंगी। उनके नब्बेवें जन्मदिन की अगुवाई में गोपालकृष्ण गांधी का आज के ‘टेलिग्राफ’ का लेख  ‘प्राचीन भारतीय अध्ययन की साम्राज्ञी: इतिहास...

राजनीति की विरासती पीढ़ी को संघर्ष नहीं सत्ता की मलाई है प्यारी

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान में सचिन पायलट की बगावत के बाद कांग्रेस में जलजला आ गया है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की लापरवाही से ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत नहीं संभली और तीन चुनावों के बाद मध्य...

गलवान झड़प के लिए भारत की बड़ी गलतियाँ ज़िम्मेदार: जनरल अशोक के. मेहता

जनरल अशोक के. मेहता ने साफ तौर पर कहा है कि गलवान में हुई दर्दनाक झड़प के लिए सेना और सरकार की तरफ से बड़ी गलतियाँ की गईं हैं। अंग्रेजी न्यूज़पोर्टल वायर में लिखे एक लेख में उन्होंने ने...

‘मुक्तिबोध के बाद रघुवीर सहाय हिन्दी कविता के सबसे बड़े आइकन’

नई दिल्ली। प्रेस क्लब के सभागार में इतवार शाम को हुए रघुवीर सहाय स्मृति समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि-पत्रकार विष्णु नागर ने कहा कि मुक्तिबोध के बाद रघुवीर सहाय हमारी कविता के सबसे बड़े आइकन हैं। उन्होंने कहा कि सहाय...

राजस्थान ने फिर की ऐतिहासिक पहल, 13 विभागों की 23 योजनाओं से जुड़ी सूचनाओं को किया सार्वजनिक

जयपुर। सूचना के अधिकार के क्षेत्र में देश को रास्ता दिखाने वाले राजस्थान सरकार ने एक बार फिर एक नई पहल की है। उसने तमाम ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक करने की शुरुआत कर दी है जिसके लिए अभी तक लोगों को...

गुजरात दंगों का चेहरा रहे अशोक ने ‘एकता चप्पल शॉप’ खोलकर समाज को दिया भाईचारे का संदेश

अहमदाबाद। गोधरा और 2002 गुजरात दंगों की बात होती है तो दो चेहरे सामने आ जाते हैं। एक अशोक भवान भाई परमार जो कट्टर हिन्दू दंगाई का चहरा बना और दूसरा  कुतुबुद्दीन अंसारी जो पीड़ित मुस्लिमों के चेहरे के तौर पर...
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यूपी चुनाव में जो दांव पर लगा है

यह कहावत बहुचर्चित है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है। यानी अक्सर यह होता है कि...
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