Tuesday, October 26, 2021

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Resistance

जयंती पर विशेष: हर तरह का पाखंड बना देवताले की कलम का निशाना

हिंदी साहित्य में साठ के दशक में नई कविता का जो आंदोलन चला, चंद्रकांत देवताले इस आंदोलन के एक प्रमुख कवि थे। गजानन माधव मुक्तिबोध, नागार्जुन, शमशेर बहादुर सिंह, केदारनाथ अग्रवाल जैसे कवियों की परंपरा से वे आते थे।...

रंज यही है बुद्धिजीवियों को भी कि राहत के जाने का इतना ग़म क्यों है!

अपनी विद्वता के ‘आइवरी टावर्स’ में बैठे कवि-बुद्धिजीवी जो भी समझें, पर सच यही है, इत्ते बड़े मुल्क में, एक सीधी सी बात को ऐसे खरेपन से कह देना, राहत इंदौरी के ही हिस्से में आया था। हिर्स करो,...

निरंकुशता के स्रोत, प्रतिरोध के संसाधन

राजनीति का आम सहजबोध यह है कि सत्ता की निरंकुशता लोकतंत्र का निषेध है। लोकतंत्र राजनीतिक सत्ता का गठन तो करता है, लेकिन उसे निरंकुश नहीं होने देता। यदि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत निरंकुश सत्ता का उद्भव होता है तो...

फासीवाद को सबसे बड़ा खतरा कला से लगता है

कलाकार (कवि, फिल्म लेखक, संगीतकार, आर्ट एक्टिविस्ट) मयंक मुंबई से दिल्ली तक एनआरसी-सीएए-एनपीआर के खिलाफ़ देशभर में चल रहे जनांदोलन में अपनी कला के जरिए प्रतिरोध को अलग ही मुकाम दे रहे हैं। जनचौक के लिए सुशील मानव से...

‘उनकी’ पहचान कपड़ों से नहीं उनके विचारों से होगी

उनकी पहचान कपड़ों से नहीं उनके विचारों से होती है। वे उदारवाद का मुखौटा लगाकर आपके आसपास मंडराते हैं। वे बढ़-चढ़कर देश के विकास की बातें करेंगे मगर किसी भी तरह के विरोध और प्रतिरोध पर वे नाक-भौं सिकोड़ते...
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वो जो तारीक राहों में मारे गये: खाद शहीद भोगीलाल पाल की याद को सलाम

शुक्रवार ( 22 अक्टूबर) को dap खाद कि लाइन में खड़े-खड़े, उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के नया गांव...
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