…”अगर मैं दरवाज़ा खुला छोड़ दूं तो बकरियां अंदर आ जाएंगी और सारी पेंटिंग खा लेंगी, उन्हें काग़ज़… Read More
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सूरत, मुंबई, पूना और फिर दिल्ली के रेलवे स्टेशनों से मजदूरों के गांव लौटने के दृश्य कुछ… Read More
वाराणसी के पिंडरा इलाके की सुबह आज भी पहली नजर में वैसी ही लगती है जैसी दशकों… Read More
“29 साल के लम्बे संघर्ष, तपस्या और आदिवासियों के बलिदान का परिणाम है पेसा नियमावली का अधिसूचित… Read More
रात का सन्नाटा था और मिट्टी के आँगन में टिमटिमाती लालटेन की रोशनी में सरिता अपनी किताब… Read More
मुजफ्फरपुर, बिहार। बिहार के सरकारी स्कूल पिछले कई सालों से शिक्षकों एवं बुनियादी संसाधनों की कमी से… Read More
मेरा बचपन पूर्व-आधुनिक, ग्रामीण, वर्णाश्रमी, सामंती परिवेश में बीता, हल्की-फुल्की दरारों के बावजूद वर्णाश्रम प्रणाली व्यवहार में… Read More
वर्षा के न होने की वजह से अकाल व सुखाड़ का असर झारखंड के गांवों में दिखने लगा है।… Read More
आधी रात के समय बिहार के समस्तीपुर जिले की भागपुरा पंचायत के एक गांव चटोली के तालाब… Read More
मुरैना जिले के बस्तौली गाँव के गयाराम सिंह धाकड़ को समझ ही नहीं आ रहा है कि… Read More